आया है तीजो का त्यौहार

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आओ सखि सब झूला झले,
पींग बढ़ाकर नभ को छूले।
आया है तीजो का त्योहार,
मन में है मेरे खुशी अपार।।

साजन भी मेरे आ जाएंगे,
सुहाग का सामान वे लाएंगे।
करूंगी मै सोलह सिंगार,
महकेगा मेरा सारा संसार।
भूल जाएंगे अब मन के सूले,
आओ सखी सब झूला झूले।।

रिमझम रिमझिम पानी बरसे,
जिया मेरा पिया को तरसे।
हो जाएगा जब मिलन मेरा,
प्रसन्न चित्त होगा तब मेरा।।
आओ सब पिछली बाते भूले,
आओ सखी सब झूला झूले।।

पड़ गए झूले आम की डार पर,
कोयले कूके अपनी तान पर।
भोरे झपटे हर कलि कलि पर,
तितलियां बैठी है हर फूल पर।
ऐसी तीजो को कभी ना भूले,
आओ सखी सब झूला झूले।।

आया है सुसराल से सिंदारा,
भरा इसमें सुहाग का भडारा।
इसमें भरा है मां बाप का प्यार,
और भाई भाभी का है दुलार।
ऐसे पीहर को मै कैसे भुलू ,
आओ सखी सब झूला झूले।।

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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