लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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अक्षय तृतीया को शास्‍त्रों में अक्षय पुण्य और धन दायक कहा गया है। शास्‍त्रों में बताया गया है क‌ि इस द‌िन व्यक्त‌ि जो भी शुभ काम करता है उसका पुण्य कभी खत्म नहीं होता। उसी तरह इस द‌िन जो व्यक्त‌ि देवी लक्ष्मी को प्रसन्न कर लेता है उसके घर में हमेशा देवी लक्ष्मी का वास बना रहता है। यदि आप भी चाहें तो इस अक्षय तृतीया अपने घर में देवी लक्ष्मी को बुलाने के यह उपाय आजमा सकते हैं |

“न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गङग्या समम्।।

” वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।

वैशाख मास की विशिष्टता इसमें प़डने वाली अक्षय तृतीय के कारण अक्षुण्ण हो जाती है। भारतवर्ष संस्कृति प्रधान देश है। हिन्दू संस्कृति में व्रत और त्यौहारों का विशेष महत्व है। व्रत और त्यौहार नयी प्रेरणा एवं संस्कृति का सवंहन करते हैं। इससे मानवीय मूल्यों की वृद्धि बनी रहती है और संस्कृति का निरन्तर परिपोषण तथा सरंक्षण होता रहता है। भारतीय मनीषियों ने व्रत-पर्वो का आयोजन कर व्यक्ति और समाज को पथभ्रष्ट होने से बचाया है।
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अक्षय तृतीया कई मायनों में महत्‍वपूर्ण है। माना जाता है कि इस दिन किसी भी कार्य की शुरूआत की जा सकती है। जिनके काम काफी समय से अटके हुए हैं, व्‍यापार में लगातार नुकसान हो रहा है अथवा किसी कार्य के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है तो अक्षय तृतीया का दिन किसी भी नई शुरूआत के लिए अत्‍यंत ही शुभ दिन है। अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन स्वर्ण आभूषणों की ख़रीद-फरोख्त को भाग्य की शुभता से जोड़ा जाता है।हिंदू शास्‍त्र में अक्षय तृतीया का बड़ा महत्‍व है। इस दिन को सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है।

अक्षय तृतीय पूजन मुहूर्त = 10:29 to 12:24
समय अवधि = 1 Hour 55 Mins
सोना/ गोल्ड खरीदने हेतु शुभ मुहूर्त —-
तृतीया तिथि शुरू = 10:29 on 28/Apr/2017
तृतीया तिथि समापन = 06:55 on 29/Apr/2017
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अक्षय तृतीया/आखातीज 2017 के निकटवर्ती स्वयंसिद्ध विवाह के मुहूर्त —
(इन मुहूर्तो में चन्द्रमा, लग्न, वार एवं अन्य कुयोग स्वतः ही नष्ट हो जाते है। इन दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य करना शुभफलदायी होता है। )
28 अप्रैल 2017– 09 रेखा
29 अप्रैल 2017– 09 रेखा
30 अप्रैल 2017– 09 रेखा
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अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है| इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है| इस वर्ष यह पर्व 28 अप्रैल 2017 (शुक्रवार) के दिन मनाया जाएगा. इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्यौहारों की श्रेणी में रखा जाता है| अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है | इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामर्थ्य के अनुसार जितना भी किया जाएं, अक्षय रुप में प्राप्त होता है | वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “अक्षय तृतीया” या “आखा तृतीया” अथवा “आखातीज” भी कहते हैं। “अक्षय” का शब्दिक अर्थ है – जिसका कभी नाश (क्षय) न हो अथवा जो स्थायी रहे। स्थायी वहीं रह सकता है जो सर्वदा सत्य है। सत्य केवल परमात्मा है जो अक्षय, अखण्ड और सर्वव्यापक है। यह अक्षय तृतीया तिथि “ईश्वर तिथि” है। इसी दिन नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था इसलिए इनकी जयंतियां भी अक्षय तृतीया को मनाई जाती है। परशुरामजी की गिनती चिंरजीवी महात्माओं में की जाती है। अत: यह तिथि “चिरंजीवी तिथि” भी कहलाती है। चारों युगों – सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग में से त्रेतायुग का आरंभ इसी आखातीज से हुआ है जिससे इस तिथि को युग के आरंभ की तिथि “युर्गाद तिथि” भी कहते हैं।

अक्षय तृतीया का दिन कई मायनों से बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है| इस दिन के साथ बहुत सारी कथाएं ओर किवदंतीया जुडी हुई हैं| ग्रीष्म ऋतु का आगमन, खेतों में फसलों का पकना और उस खुशि को मनाते खेतीहर व ग्रामीण लोग विभिन्न व्रत, पर्वों के साथ इस तिथि का पदार्पण होता है | धर्म की रक्षा हेतु भगवान श्री विष्णु के तीन शुभ रुपों का वतरण भी इसी अक्षय तृतीया के दिन ही हुए माने जाते हैं | अक्षय तृतीया के द‌िन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। मान्यता है क‌ि इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस द‌िन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी न‌ियम‌ित पूजा करें। क्योंक‌ि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है।

इस तिथि के दिन महर्षि गुरु परशुराम का जन्म दिन होने के कारण इसे “परशुराम तीज” या “परशुराम जयंती” भी कहा जाता है| इस दिन गंगा स्नान का बडा भारी महत्व है. इस दिन स्वर्गीय आत्माओं की प्रसन्नाता के लिए कलश, पंखा, खडाऊँ, छाता,सत्तू, ककडी, खरबूजा आदि फल, शक्कर आदि पदार्थ ब्राह्माण को दान करने चाहिए| उसी दिन चारों धामों में श्री बद्रीनाथ नारायण धाम के पाट खुलते है | अक्षय तृतीया से समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। हालांकि मेष राशि के सूर्य में धार्मिक कार्य आरंभ माने जाते हैं लेकिन शास्त्रीय मान्यता अनुसार सूर्य की प्रबलता व शुक्ल पक्ष की उपस्थिति में मांगलिक कार्य करना अति श्रेष्ठ है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति एकजुट होकर चलते हैं जो हर तरह के काम के लिए शुभ मुहूर्त माना जाता है। यही वजह है कि लोग इस दिन को किसी नए सामान की खरीदारी के लिए अच्छा मानते हैं। खरीदने के साथ ही कोई चीज दान करना भी इस दिन पुण्य बटोरने व समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हवन, पूजा और पितरों को श्राद्ध देना भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर कुंभ का पूजन व दान अक्षय फल प्रदान करता है। यदि इस दिन नक्षत्र व योग का शुभ संयोग भी बन रहा हो तो इसके महत्व में और वृद्धि होती है। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र व सौभाग्य योग के साथ आ रही आखा तीज पर दिया गया कुंभ का दान भाग्योदय कारक होगा।
इस दिन दान एवं उपवास करने का हजार गुना फल मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन महालक्ष्मी की साधना विशेष लाभकारी एवं फलदायक सिद्ध होती है।

इस पर्व से अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं| इसके साथ महाभारत के दौरान पांडवों के भगवान श्रीकृष्ण से अक्षय पात्र लेने का उल्लेख आता है. इस दिन सुदामा और कुलेचा भगवान श्री कृष्ण के पास मुट्ठी – भर भुने चावल प्राप्त करते हैं | इस तिथि में भगवान के नर-नारायण, परशुराम, हयग्रीव रुप में अवतरित हुए थे इसलिये इस दिन इन अवतारों की जयन्तियां मानकर इस दिन को उत्सव रुप में मनाया जाता है| एक पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी | इसी कारण से यह तिथि युग तिथि भी कहलाती है |
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जानिए किन उपायों / टोटकों द्वारा पायें इस अक्षय तृतीय (शुक्रवार, 28 अप्रेल 2017) पर सुख-वैभव-समृद्धि —-

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। अक्षय तृतीया का शाब्दिक अर्थ है कि जिस तिथि का कभी क्षय न हो अथवा कभी नाश न हो, जो अविनाशी हो।अक्षय तृतीया का पर्व ग्रीष्म ऋतृ में पड़ता है, इसलिए इस पर्व पर ऐसी वस्तुओं का दान करना चाहिए। जो गर्मी में उपयोगी एंव राहत प्रदान करने वाली हो।

पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.–09039390067 ) के अनुसार अक्षय तृतीया पर कुंभ का पूजन व दान अक्षय फल प्रदान करता है। धर्मशास्त्र की मान्यता अनुसार यदि इस दिन नक्षत्र व योग का शुभ संयोग भी बन रहा हो तो इसके महत्व में और वृद्घि होती हैं। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र व सौभाग्य योग के साथ आ रही आखातीज पर दिया गया कुंभ का दान भाग्योदय कारक होगा। इस दिन दान एंव उपवास करने हजार गुना फल मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन महालक्ष्मी की साधना विशेष लाभकारी एंव फलदायक सिद्ध होती है।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया की अधिष्ठात्री देवी माता गौरी है। उनकी साक्षी में किया गया धर्म-कर्म व दिया गया दान अक्षय हो जाता है, इसलिए इस तिथि को अक्षय तृतीया कहा गया है। आखातीज अबूझ मुहूर्त मानी गई है। अक्षय तृतीया से समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते है। हालांकि मेष राशि के सूर्य में धार्मिक कार्य आरंभ माने जाते है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता अनुसार सूर्य की प्रबलता व शुक्ल पक्ष की उपस्थिति में मांगलिक कार्य करना अतिश्रेष्ठ हैं।

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*** क्या करें अक्षय तृतीया के दिन–????

—– इस दिन समुद्र या गंगा स्नान करना चाहिए।
—–प्रातः पंखा, चावल, नमक, घी, शक्कर, साग, इमली, फल तथा वस्त्र का दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा भी देनी चाहिए।
—–ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
— इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
—–आज के दिन नवीन वस्त्र, शस्त्र, आभूषणादि बनवाना या धारण करना चाहिए।
— नवीन स्थान, संस्था, समाज आदि की स्थापना या शुभारम्भ भी आज ही करना चाहिए।
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जानिए शास्त्रों में अक्षय तृतीया का वर्णन/ जानकारी —–
—— इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।
—–इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।
—- नर-नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।
— श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।
—– हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था।
—-वृंदावन के श्री बाँकेबिहारीजी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढँके रहते हैं।
——भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है।
——भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।
——ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था। हैं।
अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है।
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यदि आपकी जन्म कुंडली में स्थित ग्रह आपके ऊपर अशुभ प्रभाव डाल रहे हैं तो इसके लिए उपाय भी अक्षय तृतीया से प्रारंभ किया जा सकता है।
उपाय——
अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निपट कर तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं तथा इस मंत्र का जप करें-
“”ऊँ भास्कराय विग्रहे महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य: प्रचोदयात् ।””
प्रत्येक दिन सात बार इस प्रक्रिया को दोहराएं। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपका भाग्य चमक उठेगा। यदि यह उपाय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर किया जाए तो और भी शीघ्र फल देता है।
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जानिए क्यों होता हैं अक्षय तृतीया अभिजीत मुहुर्त —

धर्म शास्त्रों में इस पुण्य शुभ पर्व की कथाओं के बारे में बहुत कुछ विस्तार पूर्वक कहा गया है. इनके अनुसार यह दिन सौभाग्य और संपन्नता का सूचक होता है. दशहरा, धनतेरस, देवउठान एकादशी की तरह अक्षय तृतीया को अभिजीत, अबूझ मुहुर्त या सर्वसिद्धि मुहूर्त भी कहा जाता है. क्योंकि इस दिन किसी भी शुभ कार्य करने हेतु पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती. अर्थात इस दिन किसी भी शुभ काम को करने के लिए आपको मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती. अक्षय अर्थात कभी कम ना होना वाला इसलिए मान्यता अनुसार इस दिन किए गए कार्यों में शुभता प्राप्त होती है. भविष्य में उसके शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.

पूरे भारत वर्ष में अक्षय तृतीया की खासी धूम रहती है. हए कोई इस शुभ मुहुर्त के इंतजार में रहता है ताकी इस समय किया गया कार्य उसके लिए अच्छे फल लेकर आए. मान्यता है कि इस दिन होने वाले काम का कभी क्षय नहीं होता अर्थात इस दिन किया जाने वाला कार्य कभी अशुभ फल देने वाला नहीं होता. इसलिए किसी भी नए कार्य की शुरुआत से लेकर महत्वपूर्ण चीजों की खरीदारी व विवाह जैसे कार्य भी इस दिन बेहिचक किए जाते हैं.

नया वाहन लेना या गृह प्रेवेश करना, आभूषण खरीदना इत्यादि जैसे कार्यों के लिए तो लोग इस तिथि का विशेष उपयोग करते हैं. मान्यता है कि यह दिन सभी का जीवन में अच्छे भाग्य और सफलता को लाता है. इसलिए लोग जमीन जायदाद संबंधी कार्य, शेयर मार्केट में निवेश रीयल एस्टेट के सौदे या कोई नया बिजनेस शुरू करने जैसे काम भी लोग इसी दिन करने की चाह रखते हैं.
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कृषि उत्पादन के संबंध में अक्षय तृतीया : किसानों में यह लोक विश्वास है कि यदि इस तिथि को चंद्रमा के अस्त होते समय रोहिणी आगे होगी तो फसल के लिए अच्छा होगा और यदि पीछे होगी तो उपज अच्छी नहीं होगी। अक्षय तृतीया में तृतीया तिथि, सोमवार और रोहिणी नक्षत्र तीनों का सुयोग बहुत श्रेष्ठ माना जाता है। इस संबंध में भड्डरी की कहावतें भी लोक में प्रचलित है।

दान के पर्व के रूप में :— अक्षय तृतीया वाले दिन दिया गया दान अक्षय पुण्य के रूप में संचित होता है। इस दिन अपनी सामथ्र्य के अनुसार अधिक से अधिक दान-पुण्य करना चाहिए। इस तिथि पर ईख के रस से बने पदार्थ, दही, चावल, दूध से बने व्यंजन, खरबूज, लड्डू का भोग लगाकर दान करने का भी विधान है। अक्षय ग्रंथ गीता : गीता स्वयं एक अक्षय अमरनिधि ग्रंथ है जिसका पठन-पाठन, मनन एवं स्वाध्याय करके हम जीवन की पूर्णता को पा सकते हैं, जीवन की सार्थकता को समझ सकते हैं और अक्षय तत्व को प्राप्त कर सकते हैं। अक्षय तिथि के समान हमारा संकल्प दृढ़, श्रद्धापूर्व और हमारी निष्ठा अटूट होनी चाहिए। तभी हमें व्रतोपवासों का समग्र आध्यात्मिक फल प्राप्त हो सकता है।
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जानिए कैसे करें अक्षय तृतीया पर तंत्र प्रयोगों से बचाव—-

तंत्र का उपयोग पहले जनकल्याण के लिए किया जाता था, पर समय के साथ इसका उपयोग स्वार्थ सिद्धि के लिए किया जाने लगा है. कुछ लोग निहित स्वार्थ से तंत्र के जरिये लोगों को परेशान करते हैं. यदि आप भी दुश्मनों के तांत्रिक-प्रयोगों से पीड़ित हैं, तो अक्षय-तृतीया को यह साधना आपके लिए उपयोगी रहेगी. सर्वप्रथम मूंगा हनुमान (मूंगे से निर्मित हनुमान प्रतिमा) की स्थापना अपने घर के एकांत-कक्ष में चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर करें. उनका यथाविधि पूजन करें और उन पर सिंदूर चढ़ायें. तदुपरांत इस मंत्र का यथासंभव जप करें —

ऊँ नमो हनुमते रु द्रावताराय,
पर यंत्र-मंत्र-तंत्र-त्रटक-नाशकाय,
सर्व-ज्वरच्छेदकाय, सर्व-व्याधि-निकृंतकाय,
सर्व-भय-प्रशमनाय, सर्वदुष्ट-मुख-स्तंभनाय,
देव-दानव-यक्ष-राक्षस-भूत-प्रेत-पिशाच-डाकिनी-शाकिनी-दुष्टग्रह-बंधनाय,
सर्व-कार्य-सिद्धि-प्रदाय रामदूताय स्वाहा.

अक्षय तृतीया के बाद मूंगा हनुमानजी की प्रतिमा को अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें और प्रत्येक दिन उनका धूप-दीप से पूजन करें तथा इस मंत्र का कम से कम 11 बार जप करें |

तंत्र के दुष्प्रभाव से व्यापार को बचाना—-

व्यापार-व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा भी होती है, लेकिन कुछ लोग तंत्र का प्रयोग कर अपने प्रतिस्पर्धी की दुकान या व्यवसाय को बांध देते हैं. इसके कारण चलता हुआ कारोबार या कामधंधा भी ठप हो जाता है. यदि किसी ने आपके व्यापार-व्यवसाय पर भी तंत्र प्रयोग किया हो, तो इस साधना से उस तांत्रिक-प्रयोग को काटा जा सकता है. इस उपाय से व्यापार फिर से उन्नति करने लगेगा. यह उपाय अक्षय-तृतीया को किये जाने से और भी अधिक शुभ फल मिलेगा.

उपाय : एक दिव्य शंख, 11 लक्ष्मीकारक कौड़ियां व सात गोमती-चक्र , 108 काली मिर्च, 108 लौंग व थोड़ी-सी सरसों (करीब 100 ग्राम) को पीस कर रख लें. शाम को लकड़ी के पटरे पर या बेंत की चौकी पर एक काला कपड़ा बिछा कर किसी कटोरी में इस मिश्रण को भर कर स्थापित कर लें. अब सरसों के तेल का दीपक जला कर इस कटोरी को भीतर रख दें.

फिर दक्षिण की तरफ मुख करके बैठें और नीचे लिखे मंत्र की तीन या सात माला जपें.

ऊँ दक्षिण भैरवाय भूत-प्रेत बंध तंत्र बंध निग्रहनी सर्व शत्रु संहारणी सर्व कार्य सिद्धि कुरु -कुरु फट् स्वाहा.

अगले दिन थोड़ा-सा मिश्रण कटोरी में से निकाल कर दुकान के सामने बिखेर दें. इस प्रयोग से आप किसी भी प्रकार के तंत्र-बंधन को काट सकते हैं.

क्या करें : जल से भरे कुंभ को मंदिर में दान करने से ब्रह्मा, विष्णु व महेश की कृपा प्राप्त होती है. वहीं कुंभ का पंचोपचार पूजन व तिल-फल आदि से परिपूर्ण कर वैदिक ब्राह्मण को दान देने से पितरों को अक्षय-तृप्ति होती है. ऐसा करने से पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

—–मोक्ष/बैकुंठ पाने के उपाय—–

वैशाख प्रभु माधव का माह है. शुक्लपक्ष भगवान विष्णु से संबंध रखता है. रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ है. धर्मशास्त्र के अनुसार ऐसे उत्तम योग में अक्षय तृतीया पर प्रात:काल शुद्ध होकर चंदन व सुगंधित द्रव्यों से श्रीकृष्ण का पूजन करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है.

—–सर्वविध सुख के लिए—-

अक्षय तृतीया को की गयी साधना व पूजा का फल कभी निष्फल नहीं नहीं होता. अत: इसे अत्यंत शुभ दिन माना जाता है. अगर आप चाहते हैं कि आपको दुनिया का हर सुख मिले, तो अक्षय तृतीया को यह टोटका करें —

टोटका : अपने सामने सात गोमती चक्र और महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें और सात तेल के दीपक लगायें. ये सब एक ही थाली में रखें और थाली को अपने सामने रखें. फिर शंख माला से इस मंत्र की 51 माला जप करें –

हुं हुं हुं श्रीं श्रीं ब्रं ब्रं फट्

अक्षय तृतीया के दिन ऐसी साधना करने से सभी सुख प्राप्त होते हैं. लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए अक्षय तृतीया पर किया गया यह उपाय किसी चमत्कार से कम नहीं है. स्फटिक के श्रीयंत्र को पंचोपचार-पूजन से विधिवत स्थापित करें. माता लक्ष्मी का ध्यान करें, श्रीसूक्त का पाठ करें. जितना संभव हो सके, कमलगट्टे की माला से नियमित इस मंत्र का जाप करते हुए एक गुलाब अर्पित करते रहें :—

“महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात”.
यूं पूजा करके ऐसे श्रीयंत्र को आप इस दिन व्यावसायिक स्थल पर भी स्थापित कर सकते हैं. लक्ष्मी की अपार कृपा हो जायेगी.
खास बातें

1- जिन जातकों के कार्यो में अड़चनें आ रही हैं, अथवा जिनके व्यापार में लगातार हानि हो रही है.
2- अधिक परिश्रम के बावजूद धन नहीं टिकता है और घर में अशांति बनी रहती है.
3- संतान मनोकूल कार्य ना करें तथा विरोधी चहुंओर से परेशान कर रहे हों.
4- जिन महिलाओं के वैवाहिक सुख में तनाव या अवसाद की स्थिति बनी रहती है.
ऐसे में अक्षय तृतीया का व्रत रख कर और गर्मी में निम्न वस्तुओं जैसे – छाता, दही, जूता-चप्पल, जल का घड़ा, सत्तू, खरबूजा, तरबूज, बेल का शरबत, मीठा जल, हाथवाले पंखे, टोपी, सुराही आदि का दान करने से उपरोक्त समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है.
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– आखा तीज पर ऋण से मुक्ति हेतु ‘कनकधारा यंत्र’ की लाल वस्त्र पर पूजा कर घर में स्थापना करें. पंचोपचार से पूजा करें. 51 दिनों तक श्रद्धा से यंत्र का पाठ करें. धीरे-धीरे ऋण कैसे उतर गया, यह पता भी नहीं चलेगा.
– आकस्मिक धन प्राप्ति हेतु अक्षय तृतीया से प्रारंभ करते हुए माता लक्ष्मी के मंदिर में हर शुक्र वार धूपबत्ती व गुलाब की अगरबत्ती दान करने से जीवन में अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं.
– वास्तुदोष से यदि आर्थिक समृद्धि रु की हो, तो ढक्कन सहित एक चांदी की डिबिया में गंगाजल भर दें. डिब्बी पर मौली के साथ एक मूंगा बांध दें. अक्षय तृतीया को इसे ईशान-कोण में स्थापित कर दें. आर्थिक समृद्धि मिलने लगेगी. सभी प्रकार का नुकसान खत्म हो जायेगा.
– धनधान्य में श्रीवृद्धि हेतु अक्षय तृतीया को एक मुट्ठी बासमती चावल श्री महालक्ष्मी का ध्यान व श्री मंत्र का जाप करते हुए बहते जल में प्रवाहित कर दें. आश्चर्यजनक लाभ होगा.
– धन की विशेष प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया को स्वर्ण में जड़ित चौदहमुखी रु द्राक्ष का प्रथम पंचोपचार से पूजन करें. लाल फूल अर्पित करें. रु द्राक्ष की माला से ú हृीं नम: मम गृहे धनं कुरु कुरु स्वाहा की एक माला का जाप करें. 42 दिन तक जप करें. तत्पश्चात रु द्राक्ष को गले में धारण कर लें.
– अक्षय तृतीया को दान व उपवास करने से हजार गुना फल मिलता है. महालक्ष्मी की साधना विशेष लाभकारी व फलदायी सिद्ध होती है.
अक्षय तृतीया पर यह करें
– अक्षय तृतीया के दिन विवाह, गृह प्रवेश, भूमि-पूजन, वाहन खरीदना, स्वर्णाभूषण क्र य, पदभार ग्रहण, नया सामान क्र य, नया व्यापार शुरू करने के साथ समस्त शुभ कार्यों को प्रारंभ किया जा सकता है.
– इस दिन समुद्र या गंगा अथवा किसी अन्य नदी में स्नान करना चाहिए.
– प्रात: पंखा, चावल, नमक, घी, शक्कर, साग, इमली, फल व वस्त्र आदि दान करके ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए. फिर उसे दक्षिणा भी देकर विदा करना चाहिए.
– इस दिन व्यक्ति को सत्तू अवश्य खाना चाहिए.
– इस दिन नये वस्त्र, शस्त्र, आभूषणादि बनवाना या धारण करना चाहिए.
– नये स्थान, संस्थान, समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी इसी दिन करना चाहिए |
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सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी आखा तीज का विशेष महत्व—-

यदि आपकी जन्म कुंडली में स्थित ग्रह आप पर अशुभ प्रभाव डाल रहे हैं, तो इसके लिए उपाय भी अक्षय तृतीया से ही प्रारंभ किये जा सकते हैं.
उपाय : अक्षय तृतीया को सुबह जल्दी उठ कर नित्य कार्यो से निबट कर तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ायें तथा इस मंत्र का जप करें –
“ऊँ भास्कराय विग्रहे महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य: प्रचोदयात”

प्रत्येक दिन सात बार यह प्रक्रि या दोहरायें.आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपका भाग्य चमक उठेगा. यदि यह उपाय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर किया जाये, तो और भी शीघ्र फल देता है.
अगर नहीं हो रही शादी :— ज्यादातर माता-पिता व युवाओं की अहम समस्या है सही समय पर शादी. आधुनिकता की दौड़ में युवा अपने कॅरियर को लेकर इतने व्यस्त रहते हैं कि उनकी शादी की सही आयु कब निकल जाती है, उन्हें पता भी नहीं चलता. ऐसे में कई लोगों का विवाह होना मुश्किल हो जाता है. यहां एक अचूक प्रयोग बता रहे हैं, जिससे अविवाहित युवाओं की विवाह संबंधी समस्या का त्वरित निराकरण हो जायेगा. यह प्रयोग लड़के व लड़कियों दोनों द्वारा किया जा सकता है |

प्रयोग विधि : इस प्रयोग को अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए |

– यह प्रयोग रात के समय किया जाना चाहिए.
– आप एक बाजोटा (ऊंचा आसन या चौकी) / पटिये पर पीला कपड़ा बिछाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख करके उस पर बैठ जायें.
– मां पार्वती का चित्र अपने सामने रखें.
– अपने सामने बाजोट पर एक मुट्ठी गेहूं की ढेरी रखें.
– गेहूं पर एक विवाह बाधा निवारण यंत्र स्थापित करें और चंदन अथवा केसर से तिलक करें.
उक्त पूरी प्रक्रि या ठीक से होने के बाद हल्दी माला से निम्न मंत्र का जप करें :—

लड़कों के लिए मंत्र—-
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीं
तारणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोदभवां.

लड़कियों के लिए मंत्र—
‘ऊँ गं घ्रौ गं शीघ्र विवाह सिद्धये गौर्यै फट्.
उक्त मंत्र से चार दिनों तक नित्य 3-3 माला का जप करें. अंतिम दिन इस सामग्री को देवी पार्वती के श्रीचरणों में किसी भी मंदिर में छोड़ आयें. शीघ्र ही आपका विवाह हो जायेगा. यह प्रयोग पूरी श्रद्धा व भक्ति से करें. यह सिद्ध प्रयोग है, अतएव मन में कोई संदेह ना लायें अन्यथा उपाय का प्रभाव खत्म हो जायेगा |
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शुभम् भवतु।। कल्याण हो।।

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