करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को

करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को
देश के खातिर जिन्होंने परवाह नहीं की अपने वजिदो को

किसी ने माँ की गोद सूनी की किसी ने पत्नि की माँग को
किसी ने बहन की राखी को,किसी ने माँ-बाप के प्यार को

ऐसे थे वीर बलिदानी,जिन्होंने न्योछावर कर दिया जान को
आओ हम सब श्रद्धा के सु-सुमन चढाये,उन वीर जवानों को

कभी न ऋण चूका पायेंगे,चाहे कितनी सहायता दे तुम परिवारों को
देश की सीमा पर जाकर देखो,न्योछावर करते  जो अपने प्राणों को  

सोते है चैन की नींद हम जब वे पहरा देते है देश की सीमओं को
आओ हम सब  दीप जलाये,और याद करे उनकी कुर्बानियों  को

आज भी प्रतीक्षा कर रहे उनके घर आँगन उनकी आहट सुनने को
रो रहा वह नीम का पेड़ जो लगाया था उसने अपनी छाया देने को

खेत खलियान भी मचल रहे है उनको अपनी नई फसल देने को
बुला रही है वो रहट कुए उसके खेत की,उसको अब नहलाने को

पर अब लौट न सकेगे ये वीर जवान उनकी इच्छाये पूरी करने को
वे वीर जवान शहीद हो चुके है पर सुन रहे है तुम्हारी इच्छाओ को
जवान
आओ हम सब नमन करे कोटि कोटि कारगिल के सब शहीदों को
देश के खातिर जिन्होंने परवाह नहीं की अपने किसी वजिदो को

आर के रस्तोगी  

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