लेखक परिचय

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

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rajneesh'sisterपिछले दिनों जम्मू कश्मीर में एक शादी हुई थी। वैसे तो शादी होना अपने आप में कोई घटना नहीं है । जम्मू कश्मीर में भी हजारों शादियां होती रहती हैं । लेकिन इस शादी में थोडा नयापन था । लडका रजनीश शर्मा हिन्दू था और लडकी अमीना युसूफ कश्मीरी मुसलमान थी । दोनों बालिग थे इसलिए कानूनन अपनी इच्छा से शादी कर सकते थे । इसलिए दोनों ने बाकयदा कचहरी में उपस्थित होकर कानून के सामने ही शादी की । ऐसा माना जाता है कि कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है । कानून, राज्य सरकार बनाती है इसलिए उसे कम से कम अपने बनाए कानून की रक्षा तो करनी ही चाहिए । लेकिन जम्मू कश्मीर में जिन लोगों के हाथों में सरकार की बागडोर चली गयी है उनके लिए शायद कानून की कोई अहमियत नही है । यदि मुसलमान लडकी हिन्दू लडके से शादी कर लेती है तो फिर तो यह कानून घूरे पर फेंकने लायक ही हो जाता है । इस मामले में भी राज्य सरकार ने कानून को घूरे पर ही फेंक दिया । पुलिस ने 29 सितम्बर को रजनीश शर्मा को जम्मू में उसके आवास से उठा लिया और उसे श्रीनगर ले गयी । शायद पुलिस को न्यायालय पर विश्चवास नहीं था या फिर पुलिस कानून की लम्बी प्रक्रिया का इंतजार नहीं कर सकती थी । क्योंकि रजनीश का अपराध तो जघन्य कोटि का था । उसने एक कश्मीरी मुसलमान लडकी से शादी करने की हिम्मत दिखाई थी । इसलिए, शायद राज्य सरकार की पुलिस उसे शरीयत के अनुसार ही कडा दंड देना चाहती थी । 5 अक्टूबर को पुलिस हिरासत में ही रजनीश शर्मा की मौत हो गयी ।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विवाह स्वयं अन्तर्जातीय विवाह है इसलिए वे इस प्रकार के विवाह के साथ आए खतरों से वाकिफ ही होंगे । परन्तु रजनीश शर्मा के मामले में उमर अब्दुल्ला ने भी उसको बचाने का कोई प्रयास नहीं किया । अलबत्ता पूरे षडयंत्र पर पर्दा डालने के लिए राज्य सरकार अब इस हत्या की जांच पुलिस विभाग से ही करवाने की घोषणा कर रही है । इस प्रकार का निराला न्याय भी उमर अब्दुल्ला के राज्य में ही सम्भव है । जिसमें जो हत्या करता है वही उसकी जांच करता है । राज्य सरकार का कहना है कि अमीना युसूफ के पिता मोहम्मद युसूफ मिराजी और उसके भाईयों तारीक अहमद और जावेद अहमद ने अमीना के अपहरण की पुलिस में रपट दर्ज कराई थी । इसलिए पुलिस को रजनीश के खिलाफ कार्रवाई करनी ही थी । लेकिन क्या केवल रपट लिखा देने से पुलिस को अपनी हिरासत में किसी की भी हत्या करने का अधिकार मिल जाता है । जब कोई व्यक्ति पुलिस में रपट लिखाता है तो पुलिस उसकी बाकयदा जांच करती है । यदि पुलिस ने ठीक ढंग से जांच की होती तो उसे तुरंत मालूम हो जाता कि अमीना बेगम ने रजनीश शर्मा से अपनी इच्छा से शादी की है न कि उसका अपहरण हुआ है । लेकिन कश्मीर की पुलिस को अमीना की इच्छा अनिच्छा से कुछ लेना देना नहीं था । उसकी दृष्टि में तो सबसे बडा कुफ्र यह था कि रजनीश ने अमीना से विवाह किया है ।

जम्मू और लद्दाख के लोग यह मांग कर रहे है कि रजनीश की हत्या की सीबीआई से जांच करवाई जाए और जिम्मेदार अपराधियों को उचित दंड दिया जाय । लेकिन राज्य सरकार की जांच या न्याय में कोई रुचि नहीं है । राज्य सरकार अमीना बेगम को रजनीश शर्मा के मृतक शरीर का मुआवजा देकर चुप करवाने के प्रयास में लगी हुई है । इससे लगता है कि राज्य सरकार भी शायद यही मानती है कि रजनीश को उसकी हिमाकत की सजा तो उसे मिलनी ही थी । ताज्जुब है शोपियां में दो अभागी कश्मीरी मुस्लिम लडकियों की संदेहास्पद मृत्यु को लेकर बार-बार जांच करवाई जा रही है लेकिन इस तीसरी कश्मीरी मुस्लिम लडकी अमीना से न्याय करने के लिए कोई तैयार नहीं है । न मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला न पीडीपी और न ही कांग्रेस । इशरत जहां को लेकर दिन रात चिल्लाने वाली तीस्ता शीतलवाड और अरुंधति राय की जबान को भी अब ताला लग गया है । अमीना बेगम के पति रजनीश शर्मा की हत्या में उन्हें मानवाधिकारों का उल्लंघन दिखाई नहीं दे रहा । नेशनल कान्फ्रेस, पीडीपी और कांग्रेस में अन्य अनेक विषयों को लेकर मतभेद हो सकता है लेकिन जहां तक रजनीश शर्मा की राज्य सरकार की पुलिस द्वारा निर्मम हत्या का प्रश्न है वहां ये तीनों दल आपसी मतभेद भूलकर पुलिस के पक्ष में खडे दिखाई दे रहे हैं । शायद, यह राज्य सरकार द्वारा कश्मीरी मुस्लिम लडकियों को चेतावनी भी है कि आगे से किसी हिन्दू लडके से शादी करने की जुर्रत मत करना नहीं तो उनके पति का हश्र भी रजनीश शर्मा जैसा होगा । क्या कारण है कि अंतर्जातीय विवाह के मामले में उमर अब्दुल्ला के लिए अलग कानून है और प्रजा के लिए दूसरा ही कानून है । जिसके तहत अमीना बेगम को विधवा करने की पुख्ता व्यवस्था है ।

(सभार: हिन्दुस्थान समाचार)

4 Responses to “अमीना बेगम का वैधव्य – उमर अब्दुल्ला कटघरे में”

  1. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन उवाच

    इन्साफ़ का तराज़ू झुका हुआ है। इन्साफ़की देवी भी तो आंखपर पट्टी बांधे हुयी है।— करना हो वो कर लो। चाहे जो कर लो। यहां हिंदुस्थानका कानून नही चलेगा। नहीं चलेगा। नहीं चलेगा। जानते नहीं? सारे हिंदू पण्डितोंको हमने भगा दिया। और देखना, चीन भी हमे सहायता करने आएगा। वो वीज़ा तो बिना दिक्कत दे रहा है। हमे संप्रभुता प्राप्त राष्ट्र भी घोषित करेगा। सारा का सारा हिंदोस्तां हमारा क्या बिगाड सकता है? इतालवी रानी हमारा हल निकालेगी। वैसे वो भी हमारा बाल बांका नहीं कर सकती। और आपके प्र. मंत्री —उनसे भी कह दो, हम चुनौति देते हैं; नाहिम्मत हो, तो कहते हो, कि अहिंसक हो। आपकी चाल हम जाने। जरा हम पर ज़ोर लगाके दिखाओ। ज्यादा गड बड की तो हम चीनसे, पाकीस्तानसे हथियार लेकर तहलका मचा देंगे। सारे भारतसे एक न एक दिन आप सभीको भगाके रहेंगे। इतने धीरे फैलेंगे, जैसे कॅंसर फैलता है।आप्को पता भी नहीं चलेगा। आप जैसे कॅंसरसे सडा हुआ अंग काटकर फेंक देते है, जैसे पाकीस्तान और बंगला देश काटके अलग कर दिया, वैसा एक दिन कश्मीर भी काट कर अलग कर देंगे। यह भारतका महत्वपूर्ण सामरिक स्थान है।भारतके दुश्मनोंको सहायता करेंगे।भारतपर निगरानी रखेंगे। देखते रहो। आपसे अलग करवा कर दम लेंगे।

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  2. मर्दुद खान

    भैये अब्दुल्ले के काम की सब तरफ चर्चा है. हिन्दू लड़की से शादी करके एक हिन्दूं लौंडिया को मुसलमन बना दिया. और भाई ये रजनीश शर्मा की हिम्मत केसे हुई, उसको तो मारने का हुक्म खुद अल्लाताला से दरयाफ्त करवा के पड़ोस के मौलवी ने पुलिस वालों को दिया था. अब जांच-वांच कुछ करा लो, उन पुलिस वालों पे आंच नहीं आने की. अरे कश्मीर मुस्लिम मुल्क है, हिन्दुस्तान थोड़ेही है जो इंसाफ-विंसाफ की बाते हों.

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  1.  iedig.com

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