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    Homeसाहित्‍यकविताएक नायिका के अंगो की उपमाएं

    एक नायिका के अंगो की उपमाएं


    ये यौवन क्या है तुम्हारा,
    उमड़ता हुआ है समंदर।
    डर लगता है इससे मुझको,
    कहीं डूब न जाऊं मै अंदर।।

    ये काली जुल्फे है तुम्हारी,
    काली घटा भी इनसे हारी।
    इनको जब तुम झटकती,
    बिजली इनके आगे मटकती।।

    ये आंखे क्या है तुम्हारी,
    नीली झील से भी गहरी।
    नौका विहार करूं मै इसमें,
    जो दुनिया देखे मुझे सारी।।

    ये मस्तक है जो तुम्हारा,
    चमकता हुआ है सितारा।
    इसमें सलवटे जब पड़ती,
    बिजली भी इससे डरती।।

    ये नाक क्या है तुम्हारी,
    तोते से भी बहुत प्यारी।
    इसमें नथ ऐसे चमकती,
    मोती की तरह है दमकती।।

    ये कान क्या है तुम्हारे,
    तितलियों के पर है जैसे।
    जब बालिया इनमें लटकाती,
    तितलियां भी शरमा जाती।।

    ये आवाज क्या है तुम्हारी,
    कोयल से ज्यादा है प्यारी।
    सुनता है जब कोई इनको,
    दुनिया भूल जाता है सारी।।

    ये होठ क्या है तुम्हारे
    सारे गुलाब भी इनसे हारे।
    अगर चूम लेता इनको कोई,
    संकट मिट जाते उसके सारे।।

    ये गरदन क्या है तुम्हारी,
    सुराही भी इससे है हारी।
    पीतीं जब कोई तुम शर्बत,
    दंग हो जाते सब नर नारी।।

    ये कपोल क्या है तुम्हारे
    गुलाब भी फिरते मारे मारे।
    जब इन पर हाथ कोई फिराता,
    गुलाब के फूलो का आभास पाता

    ये चाल क्या है तुम्हारी,
    हिरणी की चाल इससे हारी।
    होता अगर मै भी हिरण,
    करता तुम पर मै सवारी।।

    ये दांत है जो तुम्हारे
    मोती भी इनसे है हारे।
    जौहरी मै अगर होता,
    माला इनकी एक पिरोता।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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