लेखक परिचय

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

मीणा-आदिवासी परिवार में जन्म। तीसरी कक्षा के बाद पढाई छूटी! बाद में नियमित पढाई केवल 04 वर्ष! जीवन के 07 वर्ष बाल-मजदूर एवं बाल-कृषक। निर्दोष होकर भी 04 वर्ष 02 माह 26 दिन 04 जेलों में गुजारे। जेल के दौरान-कई सौ पुस्तकों का अध्ययन, कविता लेखन किया एवं जेल में ही ग्रेज्युएशन डिग्री पूर्ण की! 20 वर्ष 09 माह 05 दिन रेलवे में मजदूरी करने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृति! हिन्दू धर्म, जाति, वर्ग, वर्ण, समाज, कानून, अर्थ व्यवस्था, आतंकवाद, नक्सलवाद, राजनीति, कानून, संविधान, स्वास्थ्य, मानव व्यवहार, मानव मनोविज्ञान, दाम्पत्य, आध्यात्म, दलित-आदिवासी-पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक उत्पीड़न सहित अनेकानेक विषयों पर सतत लेखन और चिन्तन! विश्लेषक, टिप्पणीकार, कवि, शायर और शोधार्थी! छोटे बच्चों, वंचित वर्गों और औरतों के शोषण, उत्पीड़न तथा अभावमय जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययनरत! मुख्य संस्थापक तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष-‘भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान’ (BAAS), राष्ट्रीय प्रमुख-हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन, राष्ट्रीय अध्यक्ष-जर्नलिस्ट्स, मीडिया एंड रायटर्स एसोसिएशन (JMWA), पूर्व राष्ट्रीय महासचिव-अजा/जजा संगठनों का अ.भा. परिसंघ, पूर्व अध्यक्ष-अ.भा. भील-मीणा संघर्ष मोर्चा एवं पूर्व प्रकाशक तथा सम्पादक-प्रेसपालिका (हिन्दी पाक्षिक)।

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

राजनेताओं से निराश और अफसरशाही से त्रस्त भोले देशवासियों द्वारा बिना कुछ जाने समझे कथित गॉंधीवादी अन्ना हजारे के गीत गाये जा रहे हैं| गाये भी क्यों न जायें, जब मीडिया बार-बार कह रहा है कि एक अकेले अन्ना ने वह कर दिखाने का विश्‍वास दिलाया है, जिसे सभी दल मिलकर भी नहीं कर पाये| अर्थात् उन्होंने देश के लोगों में जन लोकपाल बिल पास करवाने की आशा जगाई है| मीडिया ने अन्ना हजारे का गीत इतना गया कि बाबा रामदेव की ही तरह हजारे के बारे में भी कुछ छुपी हुई बातें भी जनता के सामने आ गयी हैं| जिनके बारे में व्यावसायिक मीडिया से आम पाठक को जानकारी नहीं मिल पाती है| जबकि इन बातों को देश के लोगों को जानना जरूरी है| जिससे कि अन्ना के आन्दोलन में सहभागी बनने वालों को ज्ञात हो सके कि वे किसके साथ काम करने जा रहे हैं| कुछ बातें, जिन पर वैब-मीडिया ने काफी माथा-पच्ची की है :-

1. अन्ना हजारे असली भारतीय नहीं, बल्कि असली मराठी माणुस :मुम्बई में हिन्दीभाषी लोगों को जब बेरहमी से मार-मार कर महाराष्ट्र से बाहर खदेड़ा जा रहा था तो अन्ना हजारे ने इस असंवैधानिक और आपराधिक कुकृत्य का विरोध करने के बजाय राज ठाकरे को शाबासी दी और उसका समर्थन करके असली भारतीय नहीं, बल्कि असली मराठी माणुस होने का परिचय दिया| जानिये ऐसे हैं हमारे नये गॉंधीवादी अवतार!

2. अन्ना हजारे ने दो विवादस्पद पूर्व जजों के नाम सुझाये : जन्तर-मन्तर पर अनशन पर बैठते समय अन्ना हजारे ने कहा कि उनके प्रस्तावित जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने वाली समिति का अध्यक्ष किसी मन्त्री या किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज को बनाया जायेगा| इस काम के लिये अन्ना हजारे ने दो पूर्व जजों के नाम भी सुझाये|

3. एक हैं-पूर्व चीफ जज जे. एस. वर्मा जो संसार की सबसे कुख्यात कम्पनी ‘‘कोका-कोला’’ के हितों के लिये काम करते हैं : दो पूर्व जजों में से एक हैं-पूर्व चीफ जज जे. एस. वर्मा, जिनके बारे में देश को लोगों को जानने का हक है कि आज जे. एस. वर्मा क्या कर रहे हैं? संसार की सबसे कुख्यात कम्पनी ‘‘कोका-कोला’’ को भ्रष्ट अफसरशाही एवं राजनेताओं के गठजोड़ के कारण भारत की पवित्र नदियों को जहरीला बनाने और कृषि-भूमि में जहरीले कैमीकल छोड़कर उन्हें बंजर बनाने की पूरी छूट मिली हुई है| जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी सही ठहरा दिया है| ये कैसे सम्भव हुआ होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है| ऐसी खतरनाक कम्पनी को देश से बाहर निकालने हेतु देशभर में राष्ट्रभक्तों द्वारा वर्षों से जनान्दोलन चलाया जा रहा है| इस आन्दोलन को कुचलने और इसे तहस-नहस करने के लिये कम्पनी ने अपार धन-सम्पदा से सम्पन्न एक ‘‘कोका-कोला फाउण्डेशन’’ बनाया है, जिसके प्रमुख सदस्य हैं पूर्व चीफ जज जे. एस. वर्मा| इसके अलावा सारे संसार को यह भी पता है कि कोका कोला कम्पनी साम्राज्यवादी देशों के हितों के लिये लगातार काम करती रही है| ऐसी कम्पनी के हितों की रक्षा के लिये काम करते हैं, इस देश के पूर्व चीफ जज-जे. एस वर्मा| जिन्हें अन्ना हजारे बिल ड्राफ्ट करने वाली समिति का अध्यक्ष बनाना चाहते थे| देश का सौभाग्य कि बना नहीं सके|

4. दूसरे पूर्व जज हैं-एन. सन्तोष हेगड़े जो संविधान की मूल अवधारणा सामाजिक न्याय के विरुद्ध जाकर शोषित एवं दमित वर्ग अर्थात्-दलित, आदिवासी और पिछड़ों के विरुद्ध निर्णय देने से नहीं हिचकिचाये : अन्ना हजारे द्वारा सुझाये गये दूसरे पूर्व जज हैं-एन. सन्तोष हेगड़े| जो सुप्रीम कोर्ट के जज रहते संविधान की मूल अवधारणा सामाजिक न्याय के विरुद्ध जाकर आरक्षण के विरोध में फैसला देने के लिये चर्चित रह चुके हैं| जो व्यक्ति देश की सबसे बड़ी अदालत की कुर्सी पर बैठकर भी मूल निवासियों को इंसाफ नहीं दे सका हो, जो अपने जातिगत पूर्वाग्रहों को नहीं त्याग सका हो और हजारों वर्षों से शोषित एवं दमित वर्ग अर्थात्-दलित, आदिवासी और पिछड़ों के विरुद्ध (जिनकी आबादी देश की कुल आबादी का 85 प्रतिशत है) निर्णय देने से नहीं हिचकिचाया हो, उसे अन्ना हजारे जी जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने वाली समिति का चैयरमैन बनाना चाहते थे| देश का सौभाग्य कि बना नहीं सके|

5. वकालती हुनर के जरिये बीस करोड़ सम्पत्ति एक लाख में ले लेने वाले शान्तिभूषण को बनाया सह अध्यक्ष : उक्त दोनों जजों की सारी असलियत अनशन के दौरान ही जनता के सामने आ गयी, तो अन्ना हजारे वित्तमन्त्री प्रणव मुखर्जी को अध्यक्ष एवं अपनी ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शान्तिभूषण को सह-अध्यक्ष बनाने पर सहमत हो गये, जो 1977 में बनी पहली गैर-कॉंग्रेसी सरकार में मन्त्री रह चुके है| हजारे की ओर से समिति के सह अध्यक्ष बने शान्तिभूषण एवं उनके पुत्र प्रशान्त भूषण (दोनों जन लोकपाल का ड्राफ्ट बनाने वाली समिति में हैं) ने 2010 में अपने वकालती हुनर के जरिये इलाहाबाद शहर में बीस करोड़ से अधिक बाजार मूल्य की अचल सम्पत्ति एवं मकान मात्र एक लाख में ले ली और स्टाम्प शुल्क भी नहीं चुकाया|

6. शान्तिभूषण एवं नियुक्त सदस्यों की सत्सनिष्ठा, देशभक्ति एवं देश के संविधान के प्रति निष्ठा के बारे में अन्ना हजारे को कैसे विश्‍वास हुआ : इससे अन्ना हजारे की राजनैतिक एवं भ्रष्ट व्यक्ति को समिति का अध्यक्ष नहीं बनाने वाली बात की असलियत जनता के सामने आ चुकी है| भूषण पिता-पुत्र सहित हजारे की ओर से नियुक्त अन्य सदस्यों की सत्सनिष्ठा, देशभक्ति एवं देश के संविधान के प्रति निष्ठा के बारे में अन्ना हजारे को कैसे विश्‍वास हुआ, यह आज तक देश को अन्ना हजारे ने नहीं बताया है| जबकि इस बारे में देश के लोगों को जानने का पूरा-पूरा हक है|

7. बाबा रामदेव और अन्ना हजारे कितने गॉंधीवादी और अहिंसा के कितने समर्थक हैं? हजारे ने अनशन शुरू करने से पूर्व गॉंधी की समाधि पर जाकर मथ्था टेका और स्वयं को गॉंधीवादी कहकर अनशन की शुरूआत की, लेकिन स्वयं अन्ना की उपस्थिति में अनशन मंच से अल्पसंख्यकों को विरुद्ध बाबा रामदेव के हरियाणा के कार्यकर्ता हिंसापूर्ण भाषणबाजी करते रहे| जिस पर स्वयं अन्ना हजारे को भी तालियॉं बजाते और खुश होते हुए देखा गया| यही नहीं अनशन समाप्त करने के बाद हजारे ने आजाद भारत के इतिहास के सबसे कुख्यात गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी को देश का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमन्त्री घोषित कर दिया| अब यह देशवासियों को समझना होगा कि बाबा रामदेव और आधुनिक गॉंधी अन्ना हजारे कितने गॉंधीवादी और अहिंसा समर्थक हैं?

8. एनजीओ और उद्योगपतियों के काले कारनामों और भ्रष्टाचार के बारे में भी एक शब्द नहीं बोला : अन्ना हजारे ने सेवा के नाम पर विदेशों से अरबों का दान लेकर डकार जाने वाले और देश को बेचने वाले कथित समाजसेवी संगठनों (एनजीओज्) के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला, सरकारी बैंकों का अस्सी प्रतिशत धन हजम कर जाने वाले भारत के उद्योगपतियों के काले कारनामों और भ्रष्टाचार के बारे में भी एक शब्द नहीं बोला! आखिर क्यों? क्योंकि इन्हीं सबके मार्फत तो अन्ना के अनशन एवं सारे तामझाम का खर्च वहन किया जा रहा था|

9. अन्ना की मानसिक स्थिति-‘‘देश का आम मतदाता सौ रुपये में और दारू की एक बोतल में बिक जाता है|’’ स्वयं अन्ना हजारे अपनी अप्रत्याशित सफलता के कारण केवल दिल्ली से महाराष्ट्र रवाना होने से पूर्व आम मतदाता को गाली देने से भी नहीं चूके| संवाददाताओं को अन्ना ने साफ शब्दों में कहा कि ‘‘देश का आम मतदाता सौ रुपये में और दारू की एक बोतल में बिक जाता है|’’ अब अन्ना को ये कौन समझाये किमतदाता ऐसे बिकने को तैयार होता तो संसद में आम लोगों के बीच के नहीं, बल्कि अन्ना के करीब मुम्बई में रहने वाले उद्योगपति बैठे होते| अन्ना जी आम मतदाता को गाली मत दो, आम मतदाता ही भारत और स्वयं आपकी असली ताकत हैं| इस बात से अन्ना की मानसिक स्थिति समझी जा सकती है!

10. लोकपाल कौन होगा? ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि हजारे के प्रस्तावित जन लोकपाल बिल को यदि संसद पास कर भी देती है, तो इस सबसे शक्ति सम्पन्न संवैधानिक संस्था का मुखिया अर्थात् लोकपाल कौन होगा? क्योंकि जिस प्रकार का जन-लोकपाल बिल ड्राफ्ट बनाये जाने का प्रस्ताव है, उसके अनुसार तो लोकपाल इस देश की कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका से भी सर्वोच्च होगा| उसके नियन्त्रणाधीन केन्द्रीय एवं सभी राज्य सरकारें भी होगी और वह अन्तिम और बाध्यकारी निर्णय लेकर लागू करने में सक्षम होगा| बाबा राम देव तो लोकपाल को सुप्रीम कोर्ट के समकक्ष दर्जा देने की मांग कर रहे हैं|

11. भ्रष्ट, चालाक और मानसिक रूप से रुग्ण व्यक्ति के लोकपालबनने की सम्भावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता : ऐसे में देश के सवा सौ करोड़ लोगों की ओर से मेरा सीधा सवाल यह है कि यदि गलती से इस (लोकपाल) पद पर कोई भ्रष्ट, चालाक और मानसिक रूप से रुग्ण व्यक्ति आ गया तो..? आने की सम्भावना को पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता है| इतिहास के पन्ने पटलकर देखें तो पायेंगे कि जब संविधान बनाया गया था तो किसने सोचा होगा कि पण्डित सुखराम, ए. राजा, मस्जिद ध्वंसक लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, संविधान निर्माता डॉ. अम्बेड़कर को गाली देने वाले अरुण शौरी जैसे लोग भी मन्त्री के रूप में संविधान की शपथ लेकर माननीय हो जायेंगे? जब सीवीसी अर्थात् मुख्य सतर्कता आयुक्त बनाया गया था तो किसी ने सोचा होगा कि इस पथ पर एक दिन दागी थॉमस की भी नियुक्ति होगी? ….ऐसे हालातों में हमें हजारे जी कैसे विश्‍वास दिलायेंगे कि जितने भी व्यक्ति आगे चलकर प्रस्तावित जन लोकपाल के शक्ति-सम्पन्न पद पर बिराजमान होंगे, वे बिना पूर्वाग्रह के पूर्ण-सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के साथ राष्ट्रहित में अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करेंगे| विशेषकर तब जबकि जन लोकपाल का बिल ड्राफ्ट बनाने वाली समित के लिये हजारे जी को अपनी ओर से मनवांछित और पूर्व घोषित पैमाने पर खरा उतरने वाला एक अराजनैतिक एवं निष्‍कलंक छवि का यक्ति नहीं मिल सका!

इसलिये जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने वाली समिति को प्रस्तावित जन लोकपाल को नियन्त्रित करने की व्यवस्था भी, बिल में ही करनी चाहिये| अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि इस देश के सभी संवैधानिक निकायों पर नियन्त्रण करने वाला लोकपाल स्वयं अधिनायक बन जाये और भारत की लोकतान्त्रिक विरासत मिट्टी में मिल जाये और, या ऐसा शक्ति-सम्पन्न कोई भी व्यक्ति उन सभी से अधिक भ्रष्ट हो जाये, जिन भ्रष्टों के भ्रष्टाचार की रोकथाम के पवित्र उद्देश्य से हजारे और देशवासियों द्वारा उसे बनाया और रचा जा रहा है? विशेषकर तब जबकि थॉमस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भारत सरकार की ओर से यह कहा जा चुका है कि पूरी तरह से निर्विवाद और निश्कलंक छवि का व्यक्ति ढूँढना आसान नहीं है!

20 Responses to “अन्ना जी मतदाता को गाली मत दो! आप एक निश्कलंक व्यक्ति तक नहीं ढूँढ सके!!”

  1. शैलेन्‍द्र कुमार

    शैलेन्द्र कुमार

    मीना जी भी एनजीओ चलाते है लेकिन इन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेता सो अपनी कुंठा नेट पर निकालते रहते है

    Reply
  2. atul shridhar

    डॉ मीनाजी
    नेट पर पहली बार अपने विचार व्यक्त करने मजबूर कियाiमाफ़ करना आप जैसे बाजारू विचारक मीडिया अवम मानवतावादी संगठनो का अपहरण कर चुके है. लोकतंत्र की दुहाई देते है और लोकतांत्रिक पद्धति से तिन बार चुने गए नरेन्द्र मोदी को गलियां देते है. क्या ये गुजरात की जनता का सरासर अपमान नहीं है?
    अन्ना हजारे के पीछे देश का बहोत बड़ा वर्ग खड़ा है और आप जैसो के पीछे शायद आप के घर के लोग भी नहीं खड़े होंगे. जीस शांति भूषण और प्रशांत भूषण पर आप आरोप लगा रहे हो इन्ही लोगोने supreme कोर्ट के सोलह में से आठ मुख्य न्यायधिशो पर हलफनामा देकर भ्रष्टाचारी होने का supreme कोर्ट में दावा किया है. आप जैसे बाजारू विचाराकोने ऐसा ही दम हो तो उनके खिलाफ आप भी कोर्ट में जाईये. दुसरे को गली देने से आप सही नहीं हो जाते.
    Yadi अन्ना हजारे, Baba Ramdev, Lalkrishna Adwani, Naendra मोदी sabhi chor है तो is prithwi tal पर koi भी imandar नहीं है. आप hamesha negative bat karke surkhiyo में bane rahena chahate है. Yeh भी ek mansik vikruti है.

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  3. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    उपरोक्त आलेख के सन्दर्भ में दैनिक भास्कर की खबर का एक अंश विचारणीय है| लिंक प्रस्तुत है :
    http://www.bhaskar.com/article/NAT-anna-hazare-said-parliament-is-supirior-in-lokpal-issue-2029626.html?SL1=

    अन्ना हजारे ने कहा “….मैं सिर्फअपनी गारंटी दे सकता हूं, …….. उन्होंने शांति भूषण के संबंध में किसी भी तरह की गारंटी देने से इनकार कर दिया और कहा कि वे सिर्फ अपनी गारंटी दे सकते हैं।”

    दूसरा लिंक : http://www.bhaskar.com/article/ABH-after-movement-raised-questions-2027505.html

    “इस तरह का पैनल सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। ऐसा क्यों है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष कर रहे भारत में एक भी ऐसा आदिवासी कानूनविद् या शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता या विद्वान नहीं मिला, जो पैनल में अपनी सेवाएं दे सके? यही वह वर्ग है, जिससे उसकी जमीन, जंगल और आजीविका छीन ली गई है। पैनल में कोई महिला प्रतिनिधि भी नहीं है।”

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  4. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    यहाँ पर टिप्पणी करने वाले प्रत्येक विद्वान साथी और पाठक का मेरी ओर से भी स्वागत है. यदि जरूरी हुआ तो मैं विद्वान पाठकों के विचारों पर अपना पक्ष या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करूंगा, लेकिन यह टिप्पणी केवल आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी को ही सम्बोधित है! हाँ इतनी जरूर आग्रह है कि यदि आपको उचित लगे तो आप मेरी निम्न टिप्पणी को पढ़कर आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी से अनुरोध करें कि वे मेरे निम्न विनम्र अनुरोध को स्वीकार करें!

    नीचे लिखी टिप्पणी केवल आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी को ही सम्बोधित हैं और उन्हीं से प्रतिउत्तर (यदि वे जरूरी समझें तो) की भी अपेक्षा है, यद्यपि आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी प्रतिउत्तर लिखने के लिये कतई भी बाध्य नहीं हैं| अन्य सम्माननीय पाठकों को इस बारे में टिप्पणी करने का पूर्ण हक है, जिसका मैं समर्थन भी करता हूँ, लेकिन साथ ही विनम्र आग्रह भी है कि कृपया आदरणीय श्री डॉ. कपूर जी को ही टिप्पणी करने दें तो बेहतर होगा| अन्य कोई पाठक आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी की टिप्पणियॉं पूर्ण होने तक इस बारे में अपनी राय व्यक्त करके मुझसे अपनी टिप्पणी के बारे में प्रतिउत्तर की अपेक्षा नहीं करें तो और भी बेहतर होगा| इसके लिये मैं आप सभी का आभारी रहूँगा| आगे आप सबकी इच्छा सर्वोपरि है|

    आप सभी का अग्रिम धन्यवाद|

    सभी का शुभाकांक्षी
    सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
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    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, आखिर आप इस आलेख पर प्रकट हो ही गए! आपका स्वागत है! वास्तव में आपको मेरे हर छोटे से छोटे प्रयास पर अपना नकारात्मक आशीष देना ही चाहिए!

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, मैंने प्रवक्ता पर अनेकों स्थानों पर आपको दूसरों को (जो आप अल्पसंख्यक आर्यों के राष्ट्रवाद का समर्थन नहीं करते हैं उनको) योग और शान्ति की शरण में जाने की और योग तथा शांति के बहाने बाबा रामदेव तथा रवि शंकर को देश वासियों का हितैषी मानने की शिक्षा देते और लिखते हुए पाया/पढ़ा है| जबकि सारा देश जान चुका है कि ये दोनों ही और ऐसे ही अनेक लोग भारत के नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (आर एस एस) और अल्पसंख्यक आर्यों के शुभचिंतक हैं! ऐसे लोग भारत में अल्पसंख्यक आर्यों के साम्राज्य की स्थापना के लिए लोगों का धार्मिक, अध्यात्मिक और भावनात्मक शोषण करते रहते हैं! जिन आर्यों ने अपने साथ आये सुरक्षा प्रहरियों (क्षत्रियों) को ही एकाधिक बार इस भारत भूमि से समूल नष्ट कर दिया था और फिर भी संसार से सबसे बड़े और क्रूरतम हत्यारे परसराम की जयंती मानते हों और अनार्यों के विनाश में आधुनिक भारत में भी क्षत्रियों का सहयोग मांगते हों, उन आर्यों पर विश्वास करके अनार्य अपनी आने वाली पीढ़ियों को गर्त में डालने के अलावा और क्या कर रहे हैं?

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, जनता के सामने सारे कुकृत्यों के उजागर हो जाने के उपरांत भी अपने अपराधों को स्वीकारने के ठीक विपरीत आप जैसे आर्य साम्राज्य के समर्थक और रातदिन सपने देखने वाले जगह-जगह जो कुछ लिखते हैं, उन टिप्पणियों को पढकर तो ऐसा लगता है कि मनो आपके मनोमस्तिष्क पर विद्वेष, घृणा, पूर्वाग्रह, जातिवाद, वर्णवाद, साम्प्रदायिता, गुप्त हिंसा, धार्मिक उन्माद, दलित-आदिवासी और पिछड़ों की प्रगति के प्रति विरोध आदि मानसिक विकृतियों का कब्ज़ा है तथा आप और आप जैसों के दिमांग में दलित, आदिवासी, पिछड़ों, स्त्रियों और अल्पसंख्यकों के प्रति भयंकर वितृष्णा भरी हुई है और लगता है कि आप अनेक मानसिक बीमारियों से लम्बे समय से ग्रस्त हैं| (काश मेरी यह सोच गलत हो और आप पूरी तरह से स्वस्थ और प्रसन्न हों)

    अत: आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, यदि आप स्वस्थ हैं तो बेहतर है अन्यथा आप आप दूसरों को सलाह देने या किसी को राष्ट्र द्रोही, धर्मद्रोही, विदेशी एजेंट, ईसाई, आदि करार देने से पूर्व किसी योग्य डॉक्टर से अपना मानसिक उपचार करावें| आप आपका, मनुवाद का, आर्य साम्राज्य की स्थापना की कल्पना का और आर एस एस की रुग्ण एवं भारत विरोधी (क्योंकि भारत नब्बे फीसदी अनार्यों का है) मानसिकता का का समर्थन नहीं करने वाले या इनसे असहमति प्रकट करने वालों को जगह-जगह ललकारते रहते हैं|

    [यह भी इस बात का संकेत है की आपके मनोमस्तिष्क पर मानसिक विकृतियों (कट्टरता भी ऐसी ही एक विकृति मानी जाती है) का कब्ज़ा है]

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, आपकी टिप्पणियों को पढ़ने पर एक सामान्य व्यक्ति को भी ऐसा लगता है, मानों विद्वता, सुसंस्कृतता, धार्मिकता और देशभक्ति का ठेका केवल और केवल अकेले आपने ही ले रखा है|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, यहाँ पर और अनेकों अन्य स्थानों पर (प्रवक्ता पर) आपने मेरा (यदि आपकी टिप्पणियों में डॉ. मीना/मीणा लिखने का मतलब मुझसे ही है तो) उल्लेख करके मुझसे अकारण टिप्पणी मांगी हैं, लेकिन मेरे उन आलेखों पर आपकी एक भी टिप्पणी नहीं हैं, जिनपर टिप्पणी करते ही आप जैसों को मुखौटे उघड़ जाने का खतरा नजर आता है|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, आप उम्र और अनुभव में (सम्भवत:) मुझसे काफी बड़े हैं, इसलिये मैं आपको आपकी भॉंति ललकारूँगा नहीं, बल्कि आपसे निवेदन की भाषा में ही विनम्र आग्रह ही करना चाहूँगा कि आप प्रवक्ता पर प्रकाशित मेरे आलेख ‘‘हिन्दू क्यों नहीं चाहते, हिन्दुवादी सरकार?’’ पर अपनी समग्र और ईमानदार टिप्पणी बिन्दुबार विस्तार से करने का कष्ट करें| जिससे आप लगातार बचते रहे हैं| फिर आपसे संवाद को आगे बढाना मुश्किल नहीं होगा| इस पर विचार रखने के बाद आपकी धर्मनिष्ठ समर्पित भावना और हिंदुत्व की सच्चाई भी लोगों को समझ में आ जायेगी| लिंक दे रहा हूँ :

    http://www.pravakta.com/story/12527

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, आपसे विनम्र आग्रह है कि आप जिन भी संस्कारों में पले-बढे हों, लेकिन आप अपने आपको भारतीय संस्कृति का वाहक और संरक्षक मानने का दम्भ भरते हैं, परन्तु दु:ख के साथ लिखने को विवश हूँ कि आपकी टिप्पणियॉं भारतीय संस्कृति और बहुसंख्यक (अनार्य) भारत, भारतीयता, स्त्रियों को अपमानित और बदनाम करने वाली होती हैं!

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, आशा है कि आप मेरे विनम्र निवेदन पर विचार करेंगे और मेरे आलेख ‘‘हिन्दू क्यों नहीं चाहते, हिन्दुवादी सरकार?’’पर अपनी टिप्पणी विस्तार से लिखेंगे| जिससे कि आगे से संवाद कायम रहे|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, यदि आपको मेरी भाषा के कारण तकलीफ हुई हो या आपको किसी प्रकार का आघात पहुँचा हो तो उसके लिये मैं कोई क्षमायाचना नहीं करूँगा, क्योंकि आप इसी प्रकार की टिप्पणी प्राप्त करने के लिए उपयुक्त पात्र हैं|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, किसी भी व्यक्ति को वही मिलता है, जिसकी वह आकांक्षा करता है| संसार का सनातन और वैज्ञानिक सत्य है कि दूसरों का अहित चाहने वाला या दूसरों को स्वयं से निम्नतर समझने वाला, कभी सुख, शान्ति, स्वास्थ्य और सम्पन्नता का रसास्वादन नहीं कर सकता|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, यदि आप अपने जीवन में और राष्ट्र में शान्ति, सद्भाव, प्रगति और सम्पन्नता चाहते हैं तो दूसरों को भी शान्त और सम्मानित रहने दें| यदि आप अपने धर्म का (आर्य/मनुवाद या जो भी हो उसका) भला चाहते हैं तो दूसरों के धार्मिक एवं आस्था से जुड़े मामलों में अनाधिकार और अशिष्टता पूर्वक हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं करें तो समाज और देशहित (अनार्य भारत) में होगा| देश का धर्मनिरपेक्ष, समतावादी और समाजवादी स्वरुप बचा रहेगा और सभी लोगों को इंसाफ मिलने की आशा धुंधली नहीं होगी|

    आदरणीय श्री डॉ. राजेश कपूर जी, यदि इस देश के दस प्रतिशत आर्य नब्बे प्रतिशत अनार्यों और आर्य स्त्रियों पर शासन करना चाहते हैं, तो अनार्यों एवं स्त्रियों को अपमानित और तिरस्कृत करना बन्द करें| छोटे से छोटे व्यक्ति का भी सम्मान अक्षुन्य होना चाहिए!

    परमात्मा सभी को शान्ति, स्वास्थ्य, सुद्बुद्धि, सुख और सम्पन्नता प्रदान करें|

    सभी का शुभाकांक्षी
    सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

    Reply
  5. आर. सिंह

    आर.सिंह

    आज मै वाध्य होकर टिप्पणी कर रहा हूँ .मीना जी से अनुरोध है की वे जन लोकपाल बील के मसौदे को एक बार फिर से पढ़ें और खासकर अनुछेद ७ को जहां लोकपाल को हटाने का पूर्ण विवरण है.मेरे पास मसौदे का २.१ वर्सन है और मैंने उसीका हवाला दिया है.मसौदे को पढने के पहले मेरे मन में भी यह विचार उठा था.ऐसे मसौदे में मेरे विचार से कुछ कमियां हैं और उसपर मैं अपना कमेन्ट ड्राफ्ट कमिटी को अलग से भेज रहाहूं. ऐसे भी यह मसौदा अभी अंतिम तो नही ही है..

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  6. mukesh

    डॉ मीना जी मै अन्ना का समर्थक नही हु लेकिन जो देश के लिए कुछ कर सकता है.उसका प्रबल समर्थक हु.लेकिन आप तो चाँद पर पत्थर मरने का काम कर रहे हो. आप तो कुछ कर नही सकते, दूसरो पर लांछन लगा रहे हो. सर जब देश सामने हो तो सब गौण हो जाना चाहिए. या आप ये कहना चाहते हैं की यह कोई गंभीर समस्या नहीं है.लगभग सभी लोगों में आपको कोई न कोई कमी नज़र आती है.आप ही आगे आकर कुछ कर के दिखाएँ क्योकि संसार में ऐसा तो कोई प्राणी मिलेगा नहीं जिसमें कोई कमी न हो. दुसरे की आलोचना करने से कुछ कर के दिखाना ज्यादा अच्छा है.

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  7. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    अभिषेक पुरोहित जी , मीना जी को आपने सही पहचाना है.
    आपने करारे, तर्कसंगत जवाब दिए हैं.
    डा. मीना जी के सारे तर्क वे ही होते हैं जो देश को दुर्बल बनानेवाले, देश को तोड़ने वाले विदेशी ईसाई (अँगरेज़ और उनके भारतीय पिट्ठू ) देते आये हैं. इसी प्रकार के तर्क, नारे व प्रचार का प्रयोग विदेशी इशारों पर नाचने वाले वामपंथी करते हैं. आजकल ये वापंथी और ईसाई देशों के एजेंट, ईसाई चर्च मिल कर अनेकों देश विरोधी कार्य रहे हैं. देशभक्त ईसाईयों और वामपंथियों को इन विदेशी पिट्ठुओं के चुंगल से बच कर रहना होगा.
    – डा. मीना जी के बारे में यह तथ्य विचारणीय है कि उनके तर्क देश तोड़क, अत्यधिक पूर्वाग्रही और देश के दुश्मनों जैसे क्यूँ होते हैं ? भारत कि प्रशंसा या गौरव कि बात इन्हें फूटी आँख भी नहीं सुहाती. आखिर माजरा क्या है ?

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  8. V K Rai

    डॉ मीना के अनुसार कुछ भी ठीक नहीं है तो कृपया डॉ साहब ये बताएं की अन्ना हजारे ने जो किया वह बेकार था. भ्रस्ताचार आपके हिसाब से कैसे समाप्त होगा. या आप ये कहना चाहते हैं की यह कोई गंभीर समस्या नहीं है.लगभग सभी लोगों में आपको कोई न कोई कमी नज़र आती है.आप ही आगे आकर कुछ कर के दिखाएँ क्योकि संसार में ऐसा तो कोई प्राणी मिलेगा नहीं जिसमें कोई कमी न हो. दुसरे की आलोचना करने से कुछ कर के दिखाना ज्यादा अच्छा है.

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  9. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    इसलिये जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने वाली समिति को प्रस्तावित जन लोकपाल को नियन्त्रित करने की व्यवस्था भी, बिल में ही करनी चाहिये| अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि इस देश के सभी संवैधानिक निकायों पर नियन्त्रण करने वाला लोकपाल स्वयं अधिनायक बन जाये और भारत की लोकतान्त्रिक विरासत मिट्टी में मिल जाये और, या ऐसा शक्ति-सम्पन्न कोई भी व्यक्ति उन सभी से अधिक भ्रष्ट हो जाये, जिन भ्रष्टों के भ्रष्टाचार की रोकथाम के पवित्र उद्देश्य से हजारे और देशवासियों द्वारा उसे बनाया और रचा जा रहा है? विशेषकर तब जबकि थॉमस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भारत सरकार की ओर से यह कहा जा चुका है कि पूरी तरह से निर्विवाद और निश्कलंक छवि का व्यक्ति ढूँढना आसान नहीं है!

    आपकी इस बात से सहमति है एसा प्रावधान भी Dalana चाहिए व् जनता से सीधे राय लेनी चाहिए भारत सरकार तो हर पल में अपना स्टेंड बदलती है इस नाते उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है लेकिन किसी तानाशाह बनने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है आपका ये सुझाव उचित है उस पर वीचार करना चाहिए सिमिति को |
    मेने लगभग आपके सभी तर्कों की कट में अपने तर्क दे दिए है
    आप इनको पढ़ते है व् पढ़ कर पुनह रिपली भी करते है इस लिए मेने इतने विस्तृत तर्क रखे है ये आपकी न केवल सज्जन्नता है बल्कि आप अपने विरोधी विचार को भी सुनते है उसका प्रमाण है माने या न माने ये अलग विषय है हमारा विचार है की संवाद व् विचारों को रख दिया जाये जनता अपने आप तय कर लेगी सही क्या है गलत क्या है ओउर जनता से भी बड़ा समय का डंडा है जो बता देता है की इतिहास घटते समय हम सही थे या गलत क्युकी अभी बैठे बैठे हम सब सोचते है की हम ही सही है …………….विश्वास है आप पढेंगे व् समय मिलने पर उचित उत्तर भी देंगे.

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  10. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    पण्डित सुखराम, ए. राजा, मस्जिद ध्वंसक लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, संविधान निर्माता डॉ. अम्बेड़कर को गाली देने वाले अरुण शौरी जैसे लोग

    ?????क्या मतलब???shibu सोरेन,लालू,मुलायम,पासवान,मायावती,तस्मुल्ध्धीन,मुफी मोहम्मद सैद,राजीव गाँधी,सज्जण कुमार,जगदीश TaiTalar का नाम kyu नहीं लिखा??अरुण शोरी ne एक tathyatamk kitab लिखी अप केस कर use band kara सकते हो उससे वह अपराधी सिद्ध नहीं होते,लालकृष्ण अडवानी,जोशी जी,uma के खिलाफ मुक़दमा चल रहा है तब तक वो अपराधी नहीं है ,सुखराम के नाम के आगे अपने जिस तरह जोर देकर “पंडित” लिखा है वैसे ही जोर्देकर राजा के बारे में लिख देते??क्या यहाँ पर आपकी सोच बेनकाब नहीं हो जाती है??फिर करूणानिधि,जयललिता,शरद पंवार,चोहान का नाम न लिख कर आप उनके समर्थक सिद्ध नहीं होते है??क्या जो तर्क आप अपने पहले point में अन्ना पर लगा रहे है वो आप पर ही लागु नहीं होता है ??
    आन्द्रा को kanrvashn का बड़ा खेल खेलने वाले राजशेखर रेड्डी,राम की गणेश की मूर्तियों को तोड़ने वाले भी सत्ता में आये है ,क्या इससे संविधान का मखोल नहीं उड़ता है??उसकी कमी उजागर नहीं होती है??पूर्व भारत में तो एक विदेशी सांसद बन गया था तो क्या ये संविधान की कमजोरी नहीं है?साफ जाहिर होता है की आप एक जाती व् एक विचाराधार से न केवल ग्रीना करते है बल्कि उसके ग्रीना के आवरण में आप बहुत से महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी कर जाते है

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  11. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    8. एनजीओ और उद्योगपतियों के काले कारनामों और भ्रष्टाचार के बारे में भी एक शब्द नहीं बोला
    9. अन्ना की मानसिक स्थिति-‘
    सही कहा उन्हें बोलना चाहिए था बहुत से फर्जी एनजीओ भी चलते है देश में ,लेकिन उससे ज्यादा खतरा तो अफसर-नेता-मिडिया का गठजोड़ है एक बार लोकपाल का डंडा पड़ा टी सब सुधर जायेंगे अप क्यों नहीं सुधारना चाहते देश को??
    anna ki mansik sthiti ke bare में tippanni karana अप jaise vidhvan samvidhan visheshgy को shobha नहीं deta है jo anna ne कहा है vo बहुत सही है ise aap भी manate है ,agar aap ne kisi prakar ke chunav में kabhi भी bhag liya ho तो usame paisa v daru hi chalata है ajakl ,mera एक loksabha chunav-do vidhan sabha chunav v do chhatr samgh chunav का anubhav है ye ki सब partiyo को सब pratyashiyo को daru v paisa bahana padata है jo ज्यादा bahayega v jisake पक्ष में जातिगत dhruvikaran ho ga v jitega ,ye बात देश का बच्चा बच्चa जानता है

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  12. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    7. बाबा रामदेव और अन्ना हजारे कितने गॉंधीवादी और अहिंसा के कितने समर्थक हैं?
    पहले दलितों को भड़काने अब अलापसंख्यको भड़काने का एक प्रयास है ये |किसी भी आन्दोलन को तोड़ने का यह अंग्रेजी हथियार है जिसे बाद में कम्यूनिस्टो ओउर कोंग्रेसियो ने अपना लिया है बता व् राज करो यह अंग्रेजो का पुराना हथियार था अंग्रेजो ने दश के प्रत्येक वर्ग को दुसरे वर्ग के खिलाफ खड़ा किया था वह चल आज तक desh के log चल rahe है ,तिन बार जित चुके निर्वाचित मुख्यमत्री नरेन्द्र मोदी जिनके खिलाफ एक भी अभिगोग कही नहीं चल रहा है उनके किसी कम की तारीफ करना मंजूर नहीं इन लोगो को मने इंके पास ही सरे “”सेर्तिविकेट” हो चरित्र प्रमाण पात्र के??जनता ने १३ राज्यों के मुख्य्मंत्र्यो,सरे जातिवादी सम्घथानो के दुकानदारो,सरे कम्यूनिस्टो,चुनाव योग,सरे मिडिया के दुष्प्रचार को किनारा करते हुए मोदी को प्रबल जनादेश दिया है मोदी को किसे एरे गिरे लोगो के सेर्तिविक्त की जरुरत नहीं है जो चुनाव लड़ने पर अपनी जमानत तक नहीं बचा सकते है

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  13. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    5. वकालती हुनर के जरिये बीस करोड़ सम्पत्ति एक लाख में ले लेने वाले शान्तिभूषण को बनाया सह अध्यक्ष
    6. शान्तिभूषण एवं नियुक्त सदस्यों की सत्सनिष्ठा, देशभक्ति एवं देश के संविधान के प्रति निष्ठा के बारे में अन्ना हजारे को कैसे विश्‍वास हुआ

    क्या तर्क है मान गए साहब??आपके कहने का मतलब है की वकील रूप से पैसा कमाना गलत है??या आप मानते है की भूषण का वकील होना बहुत बड़ा अपराध है???देश को इस पास से नहीं मतलब है की वो वकील है या नहीं ,आप के पास उनके भार्शताचार का साबुत है तो दीजिये,वकील के पेशे को बदनाम करने का आपको adhikar नहीं है ,उन्होंने गलत पैसा बनाया है गलत केस जित लकर तो उसका निर्णय आप करेंगे या सुप्रीम कोर्ट???ये मिडिया ट्रायल नहीं वैध है देश में ,जानते है न आप??अन्ना हर सवाल का जवाब देने को बाध्य नहीं है और उन लोगो को तो कदापि नहीं जिन्होंने उनको समर्थन ही नहीं दिया है |
    अन्ना जी हम जनता आपके साथ है आप मत घबराइए |

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  14. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    और हा आप चाहते है की जज साहब निर्णय देने से पहले ज्देखे की निरनय कानून के अनुसार है या तथाकथित ८५% लोग के पक्ष में है ??माने ये की अगर कोई अपराधी ८५% का हो तो उसे छोड़ दिया जाये व् कोई अपराधी १५% का हो तो उसे फ़ौरन फासी पर साधा दिया जाये??मतलब जज साहब के सरे फैसले आपके अनुकूल होने चाहिए ??क्योकि आप ही कानून है आप ही संविधान है??आप को ही पता है संविधान क्या कहता है??बाकी तो सरे वकील साहब लोग व् बड़े बड़े जज साहब लोग सिर्फ काला कोट पहने घुमाते है??क्या जबरदस्त तर्क है??ये कुतर्क की भी श्रेणी में नहीं आता है मतलब मैं कहू वो ही सत्य बाकि सब “ब्रहाम्न्य्वादी”??या ८५% के खिलाफ??कौन पूछे की ये ८५% का आकडा कहा से लाये??

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  15. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    2. अन्ना हजारे ने दो विवादस्पद पूर्व जजों के नाम सुझाये :
    एक हैं-पूर्व चीफ जज जे. एस. वर्मा जो संसार की सबसे कुख्यात कम्पनी ‘‘कोका-कोला’’ के हितों के लिये काम करते हैं :
    दूसरे पूर्व जज हैं-एन. सन्तोष हेगड़े जो संविधान की मूल अवधारणा सामाजिक न्याय के विरुद्ध जाकर शोषित एवं दमित वर्ग अर्थात्-दलित, आदिवासी और पिछड़ों के विरुद्ध निर्णय देने से नहीं हिचकिचाये :

    मुझे नहीं याद कभी आपने कोई “अनादोलन” कोकाकोला” के खिलाफ चलाया हो??आप ज्यादा एलर्जी है कोक से तो आप केस करी,हम आपके साथ है उसके खिलाफ वैसे भी कोक की कमर पहले स्वदेशी जारण मंच फिर बाबा रामदेव ने ही तोड़ी थी ना की आपने या जहा से आप तर्क को उधर लाये है उन कम्यूनिस्टो ने ,वैसे आपको कोक या विदेशी कंपनियों पसंद नहीं है तो ये बहुत अच्छी बात है आप उसने बराबर भारतीय कंपनिया खड़ी कीजिये वैसे प्रोडक्ट बनाइये हम वः प्रोडक्ट खरीदेंगे न केवल खरीदेंगे बल्कि अपने सरे रिश्तेदारों व् स्वयंसेवको को bhI prerit करेंगे ये बहुत ही अच्छी शरुवत हो gi ,तब tak केवल आरोप lagane के liye ही आरोप lagane का कोई ओचित्य नजर नहीं अत है .
    कम्यूनिस्टो से लिया गया एक और तर्क उधार ,आप संविधान के ज्ञाता है संतोष जी के खिलाफ को पेटीशन लगा दीजिये अगर उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है तो अभी के न्यायाधीश इतने समर्थ है की उसकी सजा दे देंगे ,भोले भाले पिchado व् दलितों को भडkaaर उनको इस आन्दोलन के प्रति मन में गरना उत्तपन्न करने की आपका षडयंत्र सफल नहीं होगा ,ओउर ये न्यायपालिका का भी अपमान है जो आप पूर्व जजों पर बिना कोई सबूत के आरोप लगा रहे है अप के पास साबुत है तो यहाँ बताइए केवल आरोप लगा देने भर से अनपढ़ या कम पढेलिखे भी विश्वास नहीं करते है फिर इस मंच पर तो आप जैसे बहुत vidhvan है क्यों न ये माना जाये की आपके कोई अद्र्शय हित लोकपाल के आने से प्रभावित होंगे इसलिए आप अनर्गल लिख रहे है ???क्योकि अभी जितनो ने भी अन्ना का विरोध किया ही वो सिर्फ दर कर ही किया है चाहे वो कोंग्रेस हो या भाजपा या दुसरे दल |

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  16. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    1. अन्ना हजारे असली भारतीय नहीं, बल्कि असली मराठी माणुस : यह तर्क व हथियार बहुत पुराना है कम्युनिस्टो व उनका अनुगमन करने वाले जातीवादी दुकान दारॊ का,किसी भी व्यक्ति को उसके द्वारा नही किए गये कार्य के लिये दोषि ठहराना ताकी वो सफ़ायी देता फ़िरे व उसका मुल काम दुर हो जाए,क्या देश के ९९% लोग मराठि माणुस है जिन्होने राज ठाकरे की गुण्डागर्दी का विरोध नही किया था???राज को धन व बल देने वाले कम्युनिस्ट व कान्ग्रेसी ही थे ताकी शिव्सेना को नुकसान हो।जब देश पर हमला होता है तब ९९.९९% लोग नही लड्ते है दुश्मन से सिर्फ़ सेना लडती है तो क्या सारे पाकिस्तानी हो गये??जाईये कोयी ढंग का तर्क लाईये।वैसे भी किसी का मराठी होना मतलब “manse” का सदस्य होना नहीं होता ,मराठियों के खिलाफ आपकी ग्रीन ही झलकती है इसमे |

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  17. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    जातिवादी प्रलाप के आलावा ओउर इसे क्या कहा जा सकता है??पूरी तरीके से एक जाती व् एक विचेधरा को गली देकर ये जनाब अपने को ‘मोडरेट कहने को तुले है जबकि इनके सरे तर्क ही नहीं है पहले अन्ना को जानो जिसमे सभी भ्रष्टो के नक् में दम कर दिया था कम्युमिस्तो की गोदी में बैठ कर तर्क जल बुन कर देश को जातिवादी झगड़े की अड़ में झोक देने का प्रयास करने वाले शायद ये जानते ही नहीं है की भारत के यवो ने अब थान लिया है भर्ष्टाचार मिटाना उसे अन्ना ने नेत्रित्व दिया था पर अगर वो नहीं भी आते है आगे तो भी आन्दोलन चलेगा जो लोग भार्श्तो के नष्ट हो जाने की आशंका से ही घबरा गए है वो ही अन्ना के खिलाफ अनाप शनाप लिख रहे है लोकपाल बिल अगर पास हो गया जिस रूप में अन्ना छह रहे है तो ये मन कर चलिए छोटे स्टार का भर्ष्टाचार समाप्त हो जायेगा लोकपाल के दर से………………जिसे ये जातिवादी व् कम्युनिस्ट लोग नहीं चाहते है क्योकि अगर भारत में भार्स्ताचार नष्ट हो गया तो इनकी दुकानदारी कैसे चलेगी??
    कम्यूनिस्टो को गरीबी चाहिए व् जतिव्दी लोगो को अशिक्षा व् गरीबी दोनों ……………

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  18. A.K.SHARMA

    अन्ना को वोही लोग बुरा भला कह रहे हैं जिन को भ्रष्ट कांग्रेस की भ्रष्ट नीतियों से लाभ पहुंचा है.अन्ना ने जो मतदाता के विषय में कहा है वोह एक हकीकत है.वास्तव में अनपढ़ मतदाताओं की गरीबी,देश घातिनी जातिगत आरक्षण नीति,जातिवाद,क्षेत्रवाद,भाषावाद,मज़हब जैसे भयानक रोगों से ग्रस्त हमारी चुनाव प्रणाली लोकतंत्र नहीं बल्कि भीड़ तंत्र देती है जो हमारे देश में चल रहा है.जिस चुनाव प्रणाली में एक डी.लिट विद्वान के मत की कीमत एक अनपढ़ दलित की मत के बराबर हो उस से सही मायनों में लोकतंत्र की उम्मीद की ही नहीं जा सकती.यह भ्रष्ट चुनाव प्रणाली ही देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए ज़िम्मेदार है.स्वतंत्र एवं शक्तिशाली लोकपाल की स्थापना अच्छा प्रयास है किन्तु उस से भी ज़रूरी है देश की चुनाव प्रणाली में सुधार.

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  19. sunil patel

    कृपया मेरी पिछली टिपण्णी में १९५७ को १८५७ पढ़ा जाय.

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  20. sunil patel

    आदरणीय डॉ. मीना जी ने अच्छी जानकारी दी है.
    हर व्यक्ति अपना अपना नजरिया होता है, बहुत सी अच्छाई और कुछ न कुछ बुराई भी कुछ न कुछ रूप में हो सकती है. व्यक्तिगत रूप में श्री अन्ना हजारे और समिति के अन्य व्यक्तियो में कमिया हो सकती है किन्तु श्री अन्ना जी ने लोकपाल बिल के लिए तो प्रयास किया है वोह आजाद भारत का एक क्रांतिकारी कदम होगा और इसे स्वीकार किया जाना चाइये. इस बिल से पुरे देश, देश, समाज का भला होगा. सरकारी योजना का लाभ हर व्यक्ति, हर स्तर तक पहुचेगा जो आज नहीं पहुच जा रहा है. हर भ्रष्ट कर्मचारी, अधिकारी, मंत्री पर नकेल कसी जा सकेगी केवल २ से ३ वर्ष में (अभी तो हर अधिकारी और मंत्री साफ़ बच भी जाते है, अगर पकडे भी जाते है तो २०-२५ साल बाद अदालत का निर्णय आता है.
    वैसे भारत की जनता इस बार छली नहीं जायेगी. इस बिल के बाद भी भ्रस्ताचार ख़त्म नहीं हुआ तो इस बार भारत की जनता को १९५७ से भी बड़ी क्रांति करनी होगी.

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