लेखक परिचय

अलकनंदा सिंह

अलकनंदा सिंह

मैं, अलकनंदा जो अभी सिर्फ शब्‍दनाम है, पिता का दिया ये नाम है स्वच्‍छता का...निर्मलता ...सहजता...सुन्दरता...प्रवाह...पवित्रता और गति की भावनाओं के संगम का।।। इन सात शब्‍दों के संगमों वाली यह सरिता मुझे निरंतरता बनाये रखने की हिदायत देती है वहीं पाकीज़गी से रिश्तों को बनाने और उसे निभाने की प्रेरणा भी देती है। बस यही है अलकनंदा...और ऐसी ही हूं मैं भी।

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अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि विवाद को लेकर चल रहे मुकदमे के वादी हाशिम अंसारी का आगे पैरवी न करने की घोषणा के बाद बनारस में मुस्लिम महिलाओं ने नई पहल की है। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की दर्जनों महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय जाकर अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कराने की अपील की है। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन ने बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाशिम अंसारी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामलला को आजाद कराने का बयान देकर हाशिम ने मुसलमानों की इज्जत बढ़ाई है।
मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय जाकर अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए पत्रक दिया। इसकी कॉपी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, आरएसएस के पदाधिकारी इंद्रेश कुमार और विहिप के अशोक सिंघल को भी भेजी गई है।
मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की ओर से मोदी को भेजे गए खत में कहा गया है, ‘बाबर विदेशी और मंगोल आक्रमणकारी था। यह चंगेज खां और हलाकू जैसे मंगोलों का वंशज था जिन मंगोलो ने दुनिया के कई शहर उजाड़़ दिए, लाखों लोगों का कत्ल किया। बाबर के पूर्वज हलाकू ने बगदाद पर आक्रमण कर 40 हजार मुसलमानों के साथ साथ पैगम्बर द्वारा नियुक्त इस्लाम के सर्वोच्च धर्मगुरु खलीफा की भी हत्या कर दी थी। इसी हलाकू की वजह से आज दुनिया में इस्लाम का कोई खलीफा नहीं है।’
पत्रक में आगे लिखा है, ‘कोई भी मुसलमान मंगोलों को कभी माफ नहीं कर सकता। इन्हीं मंगोलों के वंशज बाबर ने 1528 में राम मंदिर तोड़कर हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत का बीज बोया। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की सदर ने कहा कि मुसलमानों की इज्जत तभी बढ़ेगी जब वे श्री राम के पक्ष में रहेंगे। जो लोग मंदिर निर्माण के विरोधी हैं वे मुसलमानों को हमेशा गरीब और पिछड़ा बनाए रखना चाहते हैं।’
नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय में ज्ञापन देने वालों में भारतीय अवाम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन, हिंदुस्तानी अंसारी महासभा के अध्यक्ष रेयाजुद्ददीन अंसारी, मोहम्मद नुसरतुल्लाह, मोहम्मद अजहरुद्दीदन, नसीम अख्तर, सीमा बानो, बिलकिस बेगम, हाजरा बेगम, कहकशा अंजुम, शबाना बानो सहित कई दूसरे लोग भी शामिल थे। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन ने अयोध्या जाकर हाशिम अंसारी से जल्द मुलाकात कर रामलला को आजाद करने की लड़ाई तेज करने की भी बात कही है।    muslim

One Response to “कोई भी मुसलमान मंगोलों को कभी माफ नहीं कर सकता”

  1. शिवेंद्र मोहन सिंह

    एक सराहनीय पहल, और डाक्टर साहब का बहुत सुन्दर सुझाव।


    सादर,
    शिवेंद्र मोहन सिंह

    Reply
  2. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    (१)
    “मुसलमान राम को भगवान ना मानें;राष्ट्र पुरूष तो, मान सकते हैं।”

    (२)
    बीच का रास्ता:
    मुसलमान भाई राम को राष्ट्र पुरूष माने;भगवान ना मानें।
    राम हम सब (हिन्दू और मुसलमान)के पुरखे और राष्ट्र पुरूष थे।
    नास्तिक, कम्युनिस्ट (हिंदू) भी राष्ट्र पुरूष मानें।

    (३)
    अमरिका में सिटीज़नशिप के प्रश्नोत्तरों में कभी कभी सवाल पूछा जाता है।
    सवाल: क्या आप लिंकन और वाशिंग्टन को राष्ट्र पुरुष मानते हैं?
    इस प्रश्नका उत्तर “हाँ” ही अपेक्षित है। “ना” कहनेपर सिटीज़नशिप नहीं मिलती।

    (४)
    अब लिंकन और वाशिंग्टन मुसलमान ये दोनों “राष्ट्र वीर (Heroes) मुसलमान नहीं थे। इस लिए कोई यदि कहे कि, मैं उन्हें राष्ट्र पुरूष स्वीकार नहीं करता, तो, वह सिटीज़न नहीं हो सकता।
    परीक्षा समाप्त।

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