सिनेमा के खांटी खलनायक हैं आशुतोष राणा

विवेक कुमार पाठक 


स्वतंत्र पत्रकार
दुश्मन फिल्म किस किस ने देखी है। जिसने भी देखी होगी उसमें कुछ याद रहे न रहे गोकुल पंडित का खौफ सबको खूब याद होगा। जीहां गोकुल पंडित के किरदार में आशुतोष राणा ने डाकिए के सामान्य किरदार में ही जी भरके खलनायकी दिखा दी थी। इस फिल्म के लिए मप्र के इस प्रतिभासंपन्न कलाकार को दमदार खलनायिकी के लिए कई पुरस्कार मिले थे। आशुतोष अपने मध्यप्रदेश के हैं तो इस दफा उनकी कुछ बात हो जाए फिल्मी गपशप में। 
मध्यप्रदेश से जो कलाकार आज मुंबई सिने जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं उसमें आशुतोष राणा बड़ा नाम है। वे नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के रहने वाले हैं। इस लोकसभा चुनाव में मुंबई से पूरा टाइम निकालकर अपने गृहनगर में वोट देने आए थे। आशुतोष राणा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली से निकलने वाले खांटी कलाकारों में से एक हैं। वे बचपन से अभिनय क्षमता संपन्न हैं। तब गाडरवाड़ा रामलीला में अपनी अट्टाहस क्षमता के कारण वे हर साल ररावण बना करते थे। खलनायक बनना और पर्दे पर खलनायक को जीने में क्या अंतर है ये आशुतोष राणा से बेहतर कौन बता सकता है। महाकौशल से निकला ये प्रतिभाशाली अभिनेता यूंही सिने चमक के लायक नहीं बना है। वे एनएसडी से पास होकर मुंबई पहुंचे तो स्वाभिमान सीरियल में काम मिला। आगे अपने आध्यात्मिक गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दाजी ने जो कहा जैसा कहा उस पर वे चलते गए और बढ़ते गए। दद्दाजी के कहे पर वे महेश भट्ट से मिले। रावण के अट्टाहस को बचपन से जीने वाले इस कलाकार को भट्ट ने खूब पहचाना और उन्हें अपनी सायक्लोजिकल थ्रिलर फिल्म दुश्मन का सनकी खलनायक चुन लिया। नाम मिला गोकुल पंडित। 1988 में आयी इस फिल्म में आशुतोष राणा की अदाकारी का ये जलवा था कि सोनिया सहगल बनी काजोल ही नहीं उसके साथ करोड़ों दर्शक तीन घंटे की फिल्म में गोकुल पंडित के खौफ में रहे। फिल्म में नायक संजय दत्त से कहीं अधिक चर्चा खलनायक गोकुल पंडित बने राणा की रही। आशुतोष राणा ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। लोग उनकी आंखों की क्रूरता, गले की गर्जना और संवादों के बेहतर उतार चड़ाव से ऐसे डरे कि आगे आशुतोष हिन्दी सिनेमा में डर और खौफ को अलग अलग रुपों में जीते दिखे। याद कीजिए अक्षय कुमार प्रीति जिंटा की दूसरी सायक्लोजिकल थ्रिलर फिल्म संघर्ष को। सिनेमा में डरना और डराना कभी रामसे ब्रदर्स ने सिखाया है तो मुख्यधारा की फिल्मों में यह काम मुकेश भट्ट और महेश भट्ट ने बखूबी संभाला है। संघर्ष में जीभ पर उंगली रखकर पूरे सिनेमा हॉल को डराते लज्जाशंकर पांडे को क्या हम भूल सकते हैं कभी। सनक का शिकार ये खलनायक बच्चों का अपहरण करता है ताकि उनकी बलि चढ़ा सके। आशुतोष राणा ने इस फिल्म में साड़ी और नथ पहनकर खलनायक का चरम अपने किरदार में दिखाया था। इस फिल्म में एक दफा फिर खलनायक नायक और नायिका से ज्यादा चर्चा का हिस्सा रहा। ये आशुतोष राणा की अभिनययात्रा का उछाल थे। वे नायक जैसी ही कद काठी और चेहरे के बाबजूद तब के खलनायकों को पानी पिलाते दिखे। राणा का फिल्मी सफर आगे अलग अलग शेड्स में बढ़ता रहा। चीखों से डराने वाली राज फिल्म में वे प्रोफेसर अग्निस्वरुप में खुद डरकर लोगों को डराते दिखे। फिल्म में राणा ने अंतिम दृश्य में अपनी खूनी आंखों और भूतहा चाल से अच्छे अच्छे हिम्मतवालों के मुंह का पानी सुखा दिया था। यही अदाकारी की कामयाबी होती है। आशुतोष लगातार अच्छा काम कर रहे हैं। उनकी संवाद अदायगी जबर्दस्त है। वे अपनी संवाद के उतार चड़ाव से चमत्कृत करना जानते हैं। हाल ही आयी मुल्क फिल्म में वे वकील के फ्रेम में खलनायकी करते दिखे। ऐसा लगता है कि उनके तमाम प्रशंसकों को उनको ताकतवर खलनायक के रुप में देखने की आदत हो गयी है। तभी तो सिम्बा में आदर्शवादी पुलिस वाले के रुप में उनको देखना कुछ हजम सा नहीं हुआ। सैराट की रीमेक धड़क में वे रौबदार राजस्थानी पिता बने। युवा प्रेमियों के बीच उनका डर और खौफ हमने आपने देखा ही लेकिन पर्दे के खलनायक आशुतोष असल जिंदगी के विचारशील नायक हैं। वे शब्दों के जादूगर हैं। तर्कों के धनी हैं। अपनी बात को नियमितता से प्रभावी अंदाज में सोशल मीडिया पर रखते हैं। उनके बारे में पूछा जाता है कि उन्हें अभिनेता कहें या लेखक। वाकई बड़ी दुविधा है। अदाकारी में हरफनमौला तो लिखने में कलमतोड़। अपनी बात को विभिन्न रुपकों और साहित्यिक मर्यादाओं में कैसे रखा जाता है ये आशुतोष राणा की फेसबुक वॉल पर बेहतर देखा जा सकता है। आशुतोष का अब मुंबई से भी काम का ही नहीं निजी रिस्ता नाता है। उनकी पत्नी मराठी सिनेमा की अभिनेत्री और लेखिका रेणुका शहाणे को पूरा देश जानता है। हां संस्कृति से सराबोर टीवी शो सुरभि की प्रस्तोता के रुप में रेणुका शहाणे की 90 के दशक से ही अखिल भारतीय पहचान है। आगे वे कालजयी फिल्म हम आपके हैं कौन की पूजा भाभी के रुप में भी हमारी स्मृति का हिस्सा बनीं। अब आशुतोष और रेणुका शहाणे हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के नामचीन कलाकार हैं। मध्यप्रदेश का ये अभिनेता युगल यूंही ही नित्य उंचाइयां छूता रहे कलमघसीट और उसके पाठकों की यहीं शुभकामनाएं आशुतोष जी।

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