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    ख्वाहिश

    ख्वाहिश बस इतनी सी है इस दिल में
    देश के लिए मिट पाऊँ
    सजाने को मातृभूमि के रक्षक की राहें
    पुष्प बनकर बिछ जाऊँ।
    सर्वस्व बलिदान जन्मभूमि के लिए करके
    इस जीवन का मोल चुकाऊँ
    कर गुजरूँ कुछ ऐसा कि चहुंओर अपनी
    भारत माँ का गौरव बढ़ाऊँ।
    संभव नहीं देश की माटी का ऋण कभी भी
    किसी तरह चुका पाऊँ
    पर किसी मोड़ पर तो अपनी जीवनधारा
    राष्ट्रहित के लिए बहाऊँ।
    जन्मे थे जिसकी मिट्टी में अनेक शूरवीर
    उस धरा की विजय-पताका फहराऊँ
    अनमोल बहुत है इस पावन देश की माटी
    युवाओं को इसका महत्त्व समझाऊँ।
    शस्य श्यामलां इस धरा पर देशभक्ति के
    सुगंधित पुष्प खिलाऊँ।
    प्रण यही है कि अमर वीरों की शहादत को
    कभी किसी क्षण न बिसराऊँ।
    ख्वाहिश बस इतनी सी है इस दिल में
    देश के लिए मिट पाऊँ
    सजाने को मातृभूमि के रक्षक की राहें
    पुष्प बनकर बिछ जाऊँ।
    लक्ष्मी अग्रवाल

    लक्ष्मी अग्रवाल
    लक्ष्मी अग्रवाल
    दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक, हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा, आज समाज जैसे समाचार पत्रों व डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका 'साधना पथ' तथा प्रभात प्रकाशन में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में स्वतंत्र लेखिका एवं कवयित्री के रूप में सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री संबंधी विषयों के लेखन में समर्पित।

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