राजनीति

अयोध्या के ‘हनुमानगढ़ी’ और ‘सरयूकुंज’ पर रोजा इफ्तार और नमाज पढ़ने का प्रयास हुआ था 

डॉ.राधे श्याम द्विवेदी 

भाईचारे में धर्म विरुद्ध आचरण होते होते बचा :-

उस समय 2003 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार बनी हुई थी। तत्कालीन राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के बीच हिंदू-मुस्लिम संवाद और भाईचारा बढ़ाने के लिए हनुमानगढ़ी के तत्कालीन महंत ज्ञानदास ने अपने निवास पर एक रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। इसमें बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी और सहित कई मुस्लिम प्रतिनिधि शामिल हुए थे।  

इस अवसर पर अयोध्या में हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने का प्रयास हुआ था। जनमानस के भारी विरोध के चलते और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से नमाज सनातन धर्म के अग्रणी धर्म स्थल पर नमाज पढ़वाने का मामला टालना पड़ा था । उस समय हनुमानगढ़ी में महंत ज्ञानदास ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। 

ऐतिहासिक घटना का नया उल्लेख :-

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उत्तर प्रदेश के वर्तमान माननीय मुख्य मंत्री  योगी आदित्यनाथ ने लगभग 23 वर्ष बाद इस मामले का उल्लेख क्या कर दिया कि सपा में खलबली मच गई। योगी आदित्यनाथ ने विगत 10 जुलाई 2026 को अयोध्या के सोहावल में सम्पन्न हुए एक कार्यक्रम में इसका उल्लेख करते हुए सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा है। सपा नेता श्री पवन पाण्डेय और अन्य अनेक नेता इसके प्रमाण मांगते फिर रहे हैं। इसे लेकर सियासत तेज हो गई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्टे हुआ था –

मामला अदालत में भी गया था और वहां से इसके आयोजन पर रोक (स्टे) लगा दी गई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंदिर परिसर में रोजा इफ्तार के आयोजनों पर रोक (स्टे) लगा दी गई थी। इसके बाद बढ़ते तनाव व विवाद के बाद महंत ज्ञान दास ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भविष्य में हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा इफ्तार नहीं कराया जाएगा।

समाजवादी पार्टी के करीबी थे आयोजक –

महंत ज्ञानदास अयोध्या स्थित प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी के पीठाधीश्वर और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे समाजवादी पार्टी (विशेषकर मुलायम सिंह यादव) के करीबी माने जाते हैं और अक्सर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं।  वे अपने बयानों और सांप्रदायिक सौहार्द की पहलों के लिए जाने जाते हैं, जिसमें 2003 में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर इफ्तार पार्टी का आयोजन करना भी शामिल था। 2003 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान उनके आवास पर एक ‘रोजा इफ्तार’ का आयोजन किया गया था, जिसमें हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने का प्रयास भी हुआ था, जो काफी विवादों में रहा था।

सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का हुआ था प्रयास :-

इफ्तार के समय नमाज अदा करने के लिए हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों और मुख्य मार्ग पर चटाइयां (सफ) बिछाने की कोशिश की गई थी । चूंकि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों से ही महंत के घर का रास्ता जाता था, इसलिए भारी भीड़ होने के कारण सीढ़ियों का उपयोग करने का प्रयास हुआ था।

सुरक्षा बलों और संतों का विरोध :- 

तत्कालीन आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) बृजलाल और पुलिस प्रशासन ने मंदिर की सीढ़ियों और मुख्य परिसर के भीतर नमाज पढ़ने का कड़ा विरोध किया था। पुलिस और स्थानीय संतों के विरोध के बाद सीढ़ियों से चटाइयां हटाई गईं और नमाज को महंत ज्ञान दास के निजी निवास/कक्ष के अंदर ही संपन्न कराया गया।

महंत धर्मदास की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में  हुई थी सुनवाई 

मंदिर परिसर के भीतर इस तरह के गैर-हिंदू धार्मिक आयोजनों और नमाज के प्रयासों का अयोध्या के संत समाज ने तीखा विरोध किया। इसके खिलाफ हनुमानगढ़ी के ही महंत धर्मदास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दायर की। याचिका में दलील दी गई कि सनातन परंपरा के इस पवित्र सिद्धपीठ की मर्यादा और पवित्रता के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

हाईकोर्ट की रोक:-

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा इफ्तार या किसी भी प्रकार के अन्य धार्मिक आयोजनों पर पूरी तरह से रोक (Stay) लगा दी।भविष्य के आयोजनों पर विराम: इस कानूनी विवाद और अदालती आदेश के बाद वर्ष 2005 के आसपास महंत ज्ञान दास ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि भविष्य में हनुमानगढ़ी परिसर में ऐसा कोई भी आयोजन नहीं किया जाएगा, क्योंकि उनकी सौहार्द बढ़ाने की पहल विवादों में घिर गई थी।

महंत ज्ञानदास का परिचय –

अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी महंत ज्ञानदास अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं।राजनीतिक रूप से समाजवादी पार्टी (मुलायम सिंह यादव) के करीबी माने जाने वाले ज्ञानदास उस समय चर्चा में आए थे, जब कथित तौर पर समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उनके हनुमानगढ़ी स्थित निजी आवास (मंदिर के समीप) में नमाज का आयोजन करने का प्रयास किया गया था, जिसका पुलिस और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। जिसे लेकर बाद में राजनीतिक विवाद गहरा गया था। महंत ज्ञानदास हनुमानगढ़ी के प्रमुख संतों में से रहे हैं और उन्हें मुलायम सिंह यादव का करीबी और प्रशंसक माना जाता था। इस घटना को लेकर वर्तमान में भी राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।

हनुमानगढ़ी के पूर्व महंत ज्ञानदास अभी भी जीवित हैं। वर्ष 2019 में उन्हें ब्रेन हैमरेज (मस्तिष्क आघात) हुआ था, जिसके बाद से उनका स्वास्थ्य काफी कमजोर हो गया है। जिसके बाद शिष्य उन्हें तत्काल लखनऊ लेकर पहुंच गए, पीजीआई में भर्ती कराया गया। महंत श्रीज्ञानदास को पूर्व में ब्लाकेज की समस्या पैदा हुई थी। इसके बाद पीजीआइ में उनकी एंजियोप्लास्टी हो चुकी है। वह अब पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से दूर और एकांत में रहते हैं तथा आम लोगों या मीडिया से बातचीत नहीं करते हैं लेकिन समय समय पर अखिलेश यादव और बाकी समाजवादी एंजेट से मिलते रहते हैं।

सरयू कुंज मंदिर में 4 जून 2018 को हुआ था रोजा इफ्तार और नमाज :-

उक्त घटना के बावजूद विगत 4 जून 2018 को अयोध्या के वशिष्ठ कुंड क्षेत्र के सरयू कुंज मंदिर में रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था। इस अनूठी पहल में शामिल होने वाले मुस्लिम रोजेदारों को वही सात्विक पकवान (जैसे हलवा, फल और पकौड़ी) परोसे गए थे, जो भगवान को भोग लगाए जाते हैं।यह आयोजन मूल रूप से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच प्रेम और शांति का संदेश देने के लिए किया गया था। खास बात यह थी कि इसमें किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या वीआईपी को आमंत्रित नहीं किया गया था, बल्कि सिर्फ स्थानीय आम लोग शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में तीन दर्जन से अधिक मुस्लिम रोजेदारों ने शिरकत की थी। इस रोजा इफ्तार का आयोजन मंदिर के महंत युगल किशोर शरण शास्त्री द्वारा किया गया था। 

मंदिर के अंदर पढ़ी गई नमाज :-

मंदिर के अंदर राम, सीता और ब्रह्मा की मूर्तियां हैं। इफ्तार के दौरान साधु अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी से आए हुए लड्डू बांट रहे थे। इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज भी मंदिर परिसर में ही की गई। इससे पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ एक सेमिनार का आयोजन भी मंदिर में किया गया। सेमिनार में कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों आदि ने हिस्सा लिया और सांप्रदायिक तनाव को कम करने की प्रतिज्ञा ली। इफ्तार में हिस्सा लेने वाले उर्दू के शायर मुजम्मिल ने कहा, ‘अयोध्या में अल्पसंख्यक होकर भी हमें कभी डर नहीं लगा। हमारे हिंदू भाइयों को धन्यवाद, जिन्होंने कभी किसी खतरे से परेशान नहीं होने दिया।’

20मई 2019 को अयोध्या में हुआ था रोजा इफ्तार :-

20 मई 2019 को अयोध्या के वशिष्ठ कुंड क्षेत्र के सरयू कुंज मंदिर में रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में शामिल हुए एक रोजेदार मोहम्मद तुफैल का कहना था कि विवादित स्थल के बगल में ही है रामजानकी मंदिर है, जहां पर विवाद है और पूरी दुनिया में झगड़े की वजह है। वहीं इस मंदिर में रोजा इफ्तार कराके यह एकता और मानवता का संदेश भी दिया जा रहा है कि सभी धर्मों के लोगों को आपस में मिलकर रहना चाहिए।

एक अन्य रोजेदार जीशान ने कहा था कि जिस तरह हमलोग मंदिर में नमाज पढ़ सकते हैं, इससे यह मैसेज दिया जाता है कि आप हमारे घर आ सकते हैं। हम आपके घर आ सकते हैं। गंगा-जमुनी तहजीब हम लोगों को यहां से सिखाई जाती है।मैं टीचर भी हूं तो अपने बच्चों को भी यह चीज सिखाता हूं जो समाज मे गंदगी फैल रही है, मानसिकता डैमेज हो रही है उसे सुधारा जाए।

इसी कार्यक्रम में शामिल एक अन्य रोजेदार मुजम्मिल फिजा ने कहा था कि हमारे यहां निर्गुण है, यहां मूर्ति की पूजा नहीं हो सकती लेकिन अगर आप आध्यात्मिक रूप से या बैठकर चिंतन मनन करेंगे तो जा सकते हैं।

महंत युगल किशोर का परिचय

युगल किशोर शरण शास्त्री का जन्म 1958 में बिहार के ज़िला सीतामढ़ी में हुआ। लगभग 45 साल से वह अयोध्या के सरयूकुंज रामजानकी मंदिर के महंत हैं। 1976 से 1985 तक वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे, जहां उन्होंने जन एकता के लिए सबसे बड़ी बाधा ब्राह्मणवाद को जाना। तब से ही सांप्रदायिक ताक़तों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं। महंत युगल किशोर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व प्रचारक भी रहे हैं। यह आयोजन अयोध्या में हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द (गंगा-जमुनी तहजीब) की एक अनूठी मिसाल के रूप में चर्चा में आया था। साम्प्रदायिक सद्भाव व मानव एकता के लिये वे लगभग तीन दशकों से समाजिक कार्य करते आ रहे हैं। पूरे भारत में दो दर्जन से अधिक शान्ति व सद्भाव यात्रा निकाल चुके हैं। हर सच्चाई को वे सामाजिक जीवन में मज़बूती से रखते आ रहे हैं। आठ पुस्तकों के लेखक हैं और आठ दर्जन से ज़्यादा लेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। सामाजिक कार्यों के लिए आधा दर्जन से अधिक बार जेल भी जा चुके हैं।