डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र

सहायक-प्राध्यापक (हिन्दी) उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल - म.प्र

शिवत्व की प्रतिष्ठा में ही विश्व मानव का कल्याण संभव है

समाज में शिव की प्रतिष्ठा और पूजा-परंपरा देवता के रूप में प्राचीन काल से ही प्रचलित है किंतु हमारे शास्त्रों...

सत्ता की संकल्प-शक्ति से ही हिन्दी बनेगी राष्ट्रभाषा

        भाषा व्यक्ति-व्यक्ति के मध्य अथवा दो समूहों के मध्य केवल संपर्क का ही माध्यम नहीं होती। वह संपर्क से...

शिक्षा एक गंभीर सामाजिक दायित्व-बोध है

भारतवर्ष की सनातन सांस्कृतिक परंपरा में ‘शिक्षा’ स्वयं में बहुअर्थगर्भित शब्द है। यहाँ शिक्षा का अभिप्राय साक्षरता अथवा शैक्षणिक प्रमाणपत्रों...

राजनीति के आदर्श-प्रतिमान : श्रीकृष्ण

‘महाभारत’ के ‘सभापर्व’ में राजनीतिक व्यक्ति (राजा) में छः गुण ( व्याख्यान शक्ति, प्रगल्भता, तर्ककुशलता, नीतिगत निपुणता, अतीत की स्मृति...

क्यों आवश्यक है महाराज दाहिर का पुण्य-स्मरण ?

 अरबों के आक्रमण की विपद-बेला में भारतवर्ष के सिंहद्वार सिंध की रक्षा के लिए वीरगति पाने वाले रणबांकुरे राजा दाहिर...

आखिर क्यों केजरीवाल ने की भेदभाव की राजनीति ?

हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के संघीय ढांचे की एक बड़ी कमी तब उभरकर सामने आयी है, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री...

‘धर्मराज युधिष्ठिर और महात्मा गांधी’

        जम्मू-कश्मीर राज्य से धारा 370 हटाए जाने के उपरांत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्री भारत को बार-बार...

राष्ट्र की प्रगति के लिए हिन्दी की सर्वस्वीकार्यता आवश्यक

        मनुष्य के जीवन की भाँति समाज और राष्ट्र का जीवन भी सतत विकासमान प्रक्रिया है । इसलिए जिस प्रकार...

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