फैज़ल खान

लेखक मूल रुप से एक पत्रकार होने के साथ-साथ ही समान रुप से एक शायर,कवि और नाटककार भी है। अपने सफ़र की शुरूआत एक ग्रामीण पत्रकार के तौर पर लेखक ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान 1998 में की। तीन वर्षों तक कार्य के बाद लेखक ने दैनिक प्रभात,दैनिक जागरण और दैनिक जनवाणी सहित आधा दर्जन से अधिक समाचार पत्रों में काम किया।

काली कमाई के खि़लाफ़ नमो का ऐतिहासिक फ़ैसला      

काले धन का संग्रहण करने वाले अब इस अकूत धन को ठिकाने लगाने के नये-नये तरीके खोज रहे हैं। इस निर्णय से न जाने कितने ही करोड़पति,धनाढ्य और पूंजीपति कुछ ही पलों में कंगाल हो गए। भले ही फ़ैसले ने भारत के हर छोटे-बड़े उस तबके को भी प्रभावित किया जो कि पूरी तरह निर्दोश,शरीफ़ और ईमानदार था। मगर इसके महान मक़सद को देखते हुए यह हर लोकतन्त्र प्रेमी का फ़र्ज़ बनता है कि वो देश के लिए इन्हें हृदय से भुला दे।