पर्व - त्यौहार समाज दीये मुंडेर पर ही नहीं, घट में भी जलने चाहिए October 19, 2016 | Leave a Comment अधिकतर लोग सिर्फ धन अर्जन को ही सफलता मान लेते हैं और इसी कारण जीवन का रोमांच, उमंग और आनंद उनसे दूर चला जाता है, जबकि गुणों को कमाने वाले लोगों के पास धन एक सहज परिणाम की तरह चला आता है। इसी में शोहरत भी अप्रयास मिल जाती है। साधारणता में ही असाधारणता फलती है। जड़ को सींचने से पूरे पौधे में फल-फूल आते हैं, जबकि टहनियों को भिगोते रहने से जड़ के साथ ही टहनियां भी सूख जाती हैं। Read more » दीये
राजनीति देश कोरे ‘‘वाद’’ या ‘‘वादों’’ से ही नहीं बनेगा October 17, 2016 / October 17, 2016 | 1 Comment on देश कोरे ‘‘वाद’’ या ‘‘वादों’’ से ही नहीं बनेगा बात तो बहुत सीधी-सी है। एक समझदार बालक भी कह सकता है कि घड़े में पानी इसलिए भर गया कि उसमें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। घड़ा पूर्ण था किन्तु चलनी में तो अनेक छिद्र थे, भला उसमें पानी का ठहराव कैसे संभव होता? Read more » देश कोरे ‘‘वाद’’ या ‘‘वादों’’ से ही नहीं बनेगा
समाज अहिंसा है सुखी समाज का आधार October 12, 2016 | Leave a Comment शोषण विहीन समाज की रचना के लिए संग्रह स्पर्धा और उपभोग वृत्ति पर रोक आवश्यक है। इससे न केवल स्वयं के जीवन में संतुलन एवं संयम आएगा, समाज में भी संतुलन आएगा। शोषण की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और इस चक्की में पिस रहे लोगों को राहत मिलेगी। इसलिए भगवान महावीर ने अपरिग्रह को धर्मयात्रा का अभिन्न अंग माना। अपरिग्रह का अर्थ है संग्रह पर सीमा लगाना। इससे शोषण की आधारशिला कमजोर होगी तब हिंसा का ताण्डव नृत्य भी कम होगा। अपरिग्रह के बिना अहिंसा की सही संकल्पना हो ही नहीं सकती और न इसकी सही अनुपालना हो सकती है। Read more » अहिंसा सुखी समाज का आधार
समाज समस्याओं से कैसे निपटा जाये? October 12, 2016 | Leave a Comment जिंदगी एक पन्ने की तरह है, जिसके कुछ अक्षर फूलों से लिखे गए हैं, कुछ अक्षर अंगारों से लिखे गये हैं। क्योंकि जीवन में कहीं सुख का घास है तो कहीं रजनीगंधा के फूल हैं, कहीं रेगिस्तान है तो कहीं सागर है, कहीं मनमोहक घाटियां हैं तो कहीं सुंदर वन हैं, एक जैसा जीवन किसी का नहीं है। सबको संघर्षों से सामना करना पड़ता है। कई बार जीवन-संग्राम में संघर्ष करते-करते बहुत-से व्यक्ति थक-हारकर बैठ जाते हैं। Read more » how to get rid of problems in life समस्याओं से कैसे निपटा जाये?
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म दशहरा बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक है October 8, 2016 / October 8, 2016 | Leave a Comment त्योहार एवं मेले भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग है। हमारे यहां हर दिन कोई-ना-कोई पर्व या त्योहार होता है, उनमें न केवल भौतिक आकर्षण के पर्व है बल्कि प्रेरणा से जुड़े पर्व भी है। एक ऐसा ही अनूठा पर्व है दशहरा। Read more » Featured दशहरा पर्व
विविधा आज गांधी की अहिंसा अधिक प्रासंगिक है October 1, 2016 | Leave a Comment सह-अस्तित्व के लिए अहिंसा अनिवार्य है। दूसरों का अस्तित्व मिटाकर अपना अस्तित्व बचाए रखने की कोशिशें व्यर्थ और अन्ततः घातक होती हैं। आचार्य श्री उमास्वाति की प्रसिद्ध सूक्ति है- ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’ अर्थात् सभी एक-दूसरे के सहयोगी होते हैं। पारस्परिक उपकार-अनुग्रह से ही जीवन गतिमान रहता है। समाज और सामाजिकता का विकास भी अहिंसा की इसी अवधारणा पर हुआ। Read more » AHIMSA DAY mahatma Gandhi birthday अहिंसा अधिक प्रासंगिक अहिंसा दिवस गांधी की अहिंसा
समाज दान उत्सव- परोपकार की खुशी का जीवन September 29, 2016 | Leave a Comment सचमुच कई तरह से खुशियां देती है यह जिंदगी। खुशी एवं मुस्कान भी जीवन का एक बड़ा चमत्कार ही है, जो जीवन को एक सार्थक दिशा प्रदत्त करता है। हर मनुष्य चाहता है कि वह सदा मुस्कुराता रहे और मुस्कुराहट ही उसकी पहचान हो। क्योंकि एक खूबसूरत चेहरे से मुस्कुराता चेहरा अधिक मायने रखता है, लेकिन इसके लिए आंतरिक खुशी जरूरी है। Read more » Featured खुशी का जीवन दान उत्सव परोपकार परोपकार की खुशी
राजनीति पाकिस्तान के प्रति संयम के साथ कूटनीति September 27, 2016 | Leave a Comment पाकिस्तान की जनता शायद कभी युद्ध नहीं चाहती, और वह जो चाहती है वहां की हुक्मरान वह सब देने में नाकाम सिद्ध हो रहे हैं, इसलिये अपनी नाकामी को ढंकने के लिये वह आतंकवाद का सहारा लेती है। Read more » Featured pakistan Terrorist attack from Pakistan Uri Attack uri terrorist attack कूटनीति पाकिस्तान संयम
शख्सियत समाज अद्भुत, अकल्पित है स्वर-माधुर्य की साम्राज्ञी लता मंगेशकर September 26, 2016 | Leave a Comment लता मंगेशकर जन्म दिवस- 28 सितम्बर, 2016 ललित गर्ग वो ब्रह्म है। कोई उससे बड़ा नहीं। वो प्रथम सत्य है और वही अंतिम सत्ता भी। वो स्वर है, ईश्वर है, ये केवल संगीत की किताबों में लिखी जाने वाली उक्ति नहीं, ये संगीत का सार है और इसी संगीत एवं स्वर-माधुर्य की साम्राज्ञी है लता […] Read more » Featured लता मंगेशकर स्वर-माधुर्य की साम्राज्ञी लता मंगेशकर
प्रवक्ता न्यूज़ एक आधुनिक सौगात है क्राउडफंडिंग September 21, 2016 | 1 Comment on एक आधुनिक सौगात है क्राउडफंडिंग -ललित गर्ग- एक नया बनता हुआ भारत हमारे सामने है। इस भारत के कई सपने हैं। कुछ सपने राजनीति के जमीन से उगते हैं तो कुछ समाज के उर्वर मस्तिष्कों से। कुछ सपने उन आंखों के हैं जिन्होंने अतीत देखा है, तो कुछ उनके जिनकी निगाहों में युवा रंग झिलमिलाते हैं। इन्हीं सपनों ने जीने […] Read more » crowd funding क्राउडफंडिंग
शख्सियत समाज महाराजा अग्रसेन : समाजवादी व्यवस्था के महासूर्य September 20, 2016 | Leave a Comment महाराजा अग्रसेन की जन्म जयन्ती- 1 अक्टूबर, 2016 ललित गर्ग कुशल शासकों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन कालजयी होता है और युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। ऐसे शासकों से न केवल जनता बल्कि सभ्यता और संस्कृति भी समृद्ध और शक्तिशाली बनती है। ऐसे शासकों की दृष्टि […] Read more » Featured महाराजा अग्रसेन समाजवादी व्यवस्था के महासूर्य
धर्म-अध्यात्म मृत्यु का भय है अच्छे जीवन की शुरुआत September 19, 2016 | Leave a Comment ललित गर्ग:- इस संसार की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हम प्रतिक्षण जीवन को खोते हैं लेकिन इसके बाद भी मृत्यु के बारे में नहीं सोचते। सृष्टि के विधान में जन्म के साथ मृत्यु का अनिवार्य योग निश्चित है। महापुरुषों का कहना है कि मृत्यु की भी उपयोगिता है इसीलिये ईश्वर ने […] Read more » अच्छे जीवन की शुरुआत मृत्यु मृत्यु का भय