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निर्णायक कदम का लंबा इंतजार

चीनी सामान के उपयोग पर पाबंदी का संकल्प तो हम स्वयं कर ही सकते हैं, लेकिन इसके आयात पर पूर्ण प्रतिबंध तो सरकार को ही लगाना होगा । जहाॅं तक पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों की बात है, भारत सरकार को केवल पाकिस्तान से समर्थन पा रहे आतंकवादियों के हमलों पर जवाबी हमले तक सिमटकर अपने फर्ज की इतिश्री नहीं मान लेनी चाहिए, बल्कि आगे रहकर ऐसी कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिससे वह दोबारा दुस्साहस न कर सके । 

भारतीय राजनीति का घटिया स्तर

हमारे विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी इसलिए अप्रिय लग रहे हैं कि वे अगले लोकसभा चुनावों में भी उसे सत्ता में आते हुए दिखायी दे रहे हैं। जनता आज भी उन्हें उतना ही चाह रही है, जितना 2014 में चाह रही थी। राहुल गांधी ना तो विपक्ष को साथ लगा पा रहे हैं और ना ही कांग्रेस को साथ लेकर चल पा रहे हैं। वह विपक्ष के साथ लगते हैं ना कि विपक्ष को साथ लगाते हैं, इसी प्रकार वह कांग्रेस पर थोपे जा रहे हैं-ना कि कांग्रेस उन्हें चाहती है।

चीनः भारत कोप-भवन में क्यों बैठे?

वह क्षेत्र कानूनी तौर पर भारत का है। यह भारतीय संप्रभुता का उल्लंघन है। यह बात कागजी तौर पर सही है लेकिन सच्चाई क्या है? भारत की सरकार ने इस क्षेत्र को वापस लेने के लिए आज तक क्या किया है? कुछ नहीं। वह कभी उसे लेने का दावा भी नहीं करती। मुझे खुशी है कि सुषमा स्वराज आजकल उसके बारे में कभी-कभी बोल देती हैं। हमारे नेताओं को शायद पता नहीं है कि 1963 में हुए एक समझौते के तहत पाक ने चीन को इस क्षेत्र की 5180 वर्ग किमी जमीन भेंट कर दी थी। भारत इस समझौते को गैर-कानूनी मानता है। नेताओं को यह भी पता नहीं होगा कि इस समझौते की धारा 6 में कहा गया है कि कश्मीर-समस्या का स्थायी हल निकलने पर इस पर पुनर्विचार होगा।