पर्यावरण समाज तपती धरती, झुलसता जीवन: हीटवेव की चुनौती May 22, 2026 / May 22, 2026 | Leave a Comment हीटवेव का सबसे बड़ा कारण केवल बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि वह विकास मॉडल है जिसने धरती की प्राकृतिक ढाल को कमजोर कर दिया। जंगल सदियों से पृथ्वी के प्राकृतिक एयर कंडीशनर रहे हैं। Read more » झुलसता जीवन तपती धरती
राजनीति राजनीति सनातन विरोध की बजाय आममुद्दों पर केंद्रित हो May 21, 2026 / May 21, 2026 | Leave a Comment राजनीति सनातन विरोध की बजाय आममुद्दों पर केंद्रित हो Read more » सनातन विरोध
शख्सियत समाज आदिवासी मौन क्रांति के महानायक: गणि राजेन्द्र विजय May 21, 2026 / May 21, 2026 | Leave a Comment गणि राजेन्द्र विजय Read more » गणि राजेन्द्र विजय
लेख स्वास्थ्य-योग दवा के नाम पर मौत, इलाज के नाम पर भय कब तक? May 19, 2026 / May 19, 2026 | Leave a Comment भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर विकसित भारत, समृद्ध भारत और आत्मनिर्भर भारत Read more » How long will there be death in the name of medicine and fear in the name of treatment दवा के नाम पर मौत
विश्ववार्ता चीन-अमेरिका की निकटता से भारत के सामने वैश्विक चुनौतियाँ May 18, 2026 / May 18, 2026 | Leave a Comment आज अमेरिका और चीन मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 44 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करते हैं। विश्व व्यापार, तकनीकी विकास, ऊर्जा बाजार, वैश्विक निवेश, वित्तीय संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक निर्णयों पर इन दोनों देशों का गहरा प्रभाव है। ऐसे में इनके संबंधों में किसी भी प्रकार का बदलाव पूरी दुनिया की Read more » Global challenges for India due to China-US closeness चीन-अमेरिका की निकटता भारत के सामने वैश्विक चुनौतियाँ
लेख स्वास्थ्य-योग दवा नहीं, जहर का कारोबार: भारत की साख पर संकट May 15, 2026 / May 15, 2026 | Leave a Comment भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी दवा उत्पादन शक्तियों में शामिल है। भारतीय दवाइयां अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और मध्य-पूर्व के अनेक देशों में निर्यात होती हैं। भारत को “फार्मेसी ऑफ द वल्र्ड” कहा जाता है क्योंकि सस्ती और प्रभावी दवाओं की आपूर्ति में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। Read more » जहर का कारोबार
समाज कब तक दोहराई जाती रहेंगी निर्भया जैसी त्रासदियां? May 15, 2026 / May 15, 2026 | Leave a Comment आधुनिकता के चमकदार दावों के बीच भी पुरुष प्रधान सोच का अंधेरा जस का तस मौजूद है। महिलाओं को व्यक्ति नहीं, बल्कि उपभोग की वस्तु मानने वाली सोच आज भी अनेक मन-मस्तिष्कों में गहराई तक बैठी हुई है। यही कारण है कि सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों, स्कूल-कॉलेजों और यहां तक कि घरों के भीतर भी महिलाएं असुरक्षा का अनुभव करती हैं। Read more » How long will tragedies like Nirbhaya continue to be repeated tragedies like Nirbhaya continue निर्भया जैसी त्रासदियां
समाज वैश्विक संकटों के दौर में परिवार ही रिश्तों की अंतिम शरणस्थली May 13, 2026 / May 13, 2026 | Leave a Comment संयुक्त परिवार की अवधारणा फिर प्रासंगिक बनती दिखाई दे रही है। संयुक्त परिवार केवल आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा का भी आधार है। वहां संसाधनों का साझा उपयोग होता है, Read more » परिवार ही रिश्तों की अंतिम शरणस्थली
राजनीति मोदी के राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों? May 12, 2026 / May 12, 2026 | Leave a Comment आज पूरी दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं ने मानव सभ्यता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। Read more » मोदी के राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति मोदी के राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों
समाज बढ़ते अपराध और अपराधमुक्त समाज निर्माण की चुनौती May 11, 2026 / May 11, 2026 | Leave a Comment राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़े केवल सांख्यिकीय दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि वे हमारे समाज के उस अंधेरे और भयावह चेहरे को सामने लाते हैं, जिसे अक्सर विकास, आधुनिकता और राजनीतिक उपलब्धियों की चमक में छिपा दिया जाता है। वर्ष 2024 के अपराध आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि Read more » अपराधमुक्त समाज निर्माण की चुनौती बढ़ते अपराध और अपराधमुक्त समाज
लेख रोगियों की मुस्कान और उम्मीद का दूसरा नाम हैं नर्सें May 11, 2026 / May 11, 2026 | Leave a Comment नर्से भगवान का रूप होती है, वे ही इंसान के जन्म की पहली साक्षी बनती है और उनमें करुणा का बीज बोती है। एक रोगी को स्वस्थ करने में वे अपना सब कुछ दे देती हैं। रोगी की सेवा करते हुए वे अपना पारिवारिक सुख, करियर, जीवन और वर्तमान सबकुछ झांेक देती है। वर्ष 2026 की थीम “हमारी नर्सें, हमारा भविष्य Read more »
राजनीति बंगाल की हिंसा है लोकतंत्र पर धब्बा और बड़ी चुनौती May 8, 2026 / May 8, 2026 | Leave a Comment दरअसल जब राजनीति विचार और जनसेवा से हटकर केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम बन जाती है, तब हिंसा उसका स्वाभाविक परिणाम बनती है। हार को लोकतांत्रिक विनम्रता से स्वीकार करने के बजाय प्रतिशोध का माध्यम बना लेना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। यही कारण है कि चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देशों और विजय जुलूसों पर प्रतिबंध के बावजूद हिंसक घटनाएं हुईं। Read more » The violence in Bengal is a blot on democracy The violence in Bengal is a blot on democracy and a major challenge. बंगाल की हिंसा