सुनो सुजाता : एक
सुनो सुजाता : एक सुनो सुजाता मैं नहीं जानता तुम्हारा समाज-सत्य। शब्दार्थ की रपटीली पगडंडियाँ यदि हैं,आपका सचेत चुनाव तो...
सुनो सुजाता : एक सुनो सुजाता मैं नहीं जानता तुम्हारा समाज-सत्य। शब्दार्थ की रपटीली पगडंडियाँ यदि हैं,आपका सचेत चुनाव तो...
सुनहरे परों वाले दो पक्षी संसार-विटप पर बैठे खैनी मल रहे हैं साक्षीभाव की पतोहू ताज़े गोबर से चौका लीप...
हिमालय, देवदारु और चन्द्रमा गगनमण्डल, तारागण भवखंडना की दिव्य आरती। मुझमें संन्यस्त काशी का झिलमिल गंगातट भावक इस पूरे उपक्रम...
आशुतोष माधव भीग-भीग कर सड़ता एक पीला उदास स्टेशन. जर्जर सराय सा, हाँफ-हाँफकर पहुँचते जाने कितने कलावंत गर्जन तर्जन लोहित...
आशुतोष माधव इसका कोई टुकड़ा बिकाऊ नहीं संतानवल्लभा धरती का स्तन है यह पूरे का पूरा हिमालय जहाँ है...