मृदुल श्रीवास्तव

स्वतंत्र लेखक

देश निर्णय करे

वर्तमान में सेकुलरिज्म की परिभाषा को कुछ विकृत मानसिकता के लोगों द्वारा विकृति कर दिया गया है, अब #सेकुलरिस्म शब्द दिखते ही जेएनयू से पूछने वाली भारत विरोधी नारे,एक आतंकी के जनाजे में शरीक 18000 लोग, भगवान श्री कृष्ण के प्रति कुंठा व्यक्त करते हुए विकृत लोग, एक आतंकवादी का पक्ष लिए सुप्रीम कोर्ट में फरियाद के लिए पहुंचे लोगों की ही छवि उभरकर सामने आती है यह वही लोग हैं जो होली और दीपावली को पर्यावरण के लिए दोषी मानते हैं और जीव हत्या इन्हें इको फ्रेंडली लगती है