प्रमोद रंजन

आपकी दिलचस्पी सबाल्टर्न अध्ययन और आधुनिकता के विकास में रही है। ‘साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’, ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’, ‘पेरियार के प्रतिनिधि विचार’ और ‘शिमला-डायरी’ उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। रंजन इन दिनों असम विश्वविद्यालय के रवींद्रनाथ टैगोर स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चरल स्टडीज में प्राध्यापक हैं। संपर्क : +919811884495

व्हाट्सएप विवाद : कितनी हक़ीक़त, कितना फ़साना

दुनिया की सबसे बड़ी संदेशवाहक कंपनी 'व्हाट्सएप' विवाद में है। इस विवाद की तह में जाने से पहले इसके संबंध...

विज्ञान की मुक्ति के लिए संघर्ष की जरूरत

-प्रमोद रंजन  काेविड-19 से संबंधित तथ्यों को लेकर, जिस प्रकार के असमंजस की स्थिति है, उससे हममें से कई किम्कर्तव्यविमूढ...

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