राजनीति भगवंत मान के लिए जी का जंजाल बनता किसान आंदोलन March 11, 2025 / March 11, 2025 | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान एक साल से धरने पर हैं और अब पंजाब के सीएम भगवंत मान की टेंशन बढ़ रही है। हालात अब किसान और पंजाब सरकार के बीच टकराव के स्तर पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी ने किसान आंदोलन को केंद्र की मोदी सरकार के […] Read more » Farmer's movement becomes a headache for Bhagwant Mann किसान आंदोलन
महिला-जगत लेख समाज सोशल मीडिया और महिलाओं की प्रतिष्ठा : डीपफेक और मॉर्फिंग के ख़िलाफ़ जंग March 6, 2025 / March 6, 2025 | Leave a Comment उमेश कुमार साहू हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है जो महिलाओं के अधिकारों, उनकी उपलब्धियों और उनके समक्ष मौजूद चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। वर्तमान डिजिटल युग में, सोशल मीडिया महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का मंच तो बना है, लेकिन इसके साथ ही […] Read more » Social media and women's dignity The fight against deepfakes and morphing डीपफेक और मॉर्फिंग के ख़िलाफ़ जंग सोशल मीडिया और महिलाओं की प्रतिष्ठा
राजनीति बदले-बदले से ‘सरदार’ नजर आते हैं March 6, 2025 / March 6, 2025 | Leave a Comment राकेश सैन हिन्दी का एक बहुत मशहूर शेयर है …बदले-बदले से सरकार नजर आते हैं,अपने ही संगी के साथी नहीं अब,अपनों से अब बेजार नजर आते हैं। इस शेयर में अगर ‘सरकार’ की जगह ‘सरदार’ लिख दिया जाए तो यह पंक्तियां पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। कुछ दिन […] Read more » मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह
राजनीति यूपी की अर्थव्यवस्था में भी आई चमक, देश मे योगी-मोदी ब्रांड हुआ मजबूत March 5, 2025 / March 5, 2025 | Leave a Comment प्रदीप कुमार वर्मा भगवान भोलेनाथ की आराधना के पर्व महाशिवरात्रि पर अंतिम शाही स्नान के साथ ही करीब डेढ़ महीने तक चले महाकुंभ का भी समापन हो गया। करीब 144 साल बाद प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित महाकुंभ से इस बार हिंदू एकता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का “अमृत” निकला है। पौराणिक काल में देवताओं […] Read more » देश मे योगी-मोदी ब्रांड हुआ मजबूत यूपी की अर्थव्यवस्था में भी आई चमक
प्रवक्ता न्यूज़ इस प्रकार होती है भीड़ की भीड़ की गिनती February 28, 2025 / February 28, 2025 | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव कुंभ के आयोजन में करोड़ों लोग पहुंचे । उनकी संख्या को लेकर बहस हो रही है। जन सामान्य जानना चाहते हैं कि आखि़र यह आंकड़ा निकाला कैसे जाता है। वैज्ञानिक उपकरणों, संसाधनों , आर एफ तकनीक, लेजर आदि से वहां पर वास्तविक गणना सरल होती है जहां सीमित बंद क्षेत्र या सभागार […] Read more »
राजनीति गिरते सेल्स से जूझती बीवाईडी इंडिया #BYD को एक यूजर ने गाड़ी वापसी का भेजा नोटिस February 27, 2025 / February 27, 2025 | Leave a Comment चीनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माता बीवाईडी इंडिया की भारत में मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। जहां यह कंपनी भारत में अपने संचालन का विस्तार करने की जोरदार कोशिश करते हुए महत्वपूर्ण नियामक बाधाओं और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है वहीं एक BYD E-6 के यूजर ने X पर पोस्ट […] Read more »
बच्चों का पन्ना लेख 2050 तक दुनिया की आधी आबादी को हो सकता है निकट दृष्टि दोष February 27, 2025 / February 27, 2025 | Leave a Comment पुनीत उपाध्याय आधुनिक जीवन शैली के नाम पर बदली लाइफ स्टाइल के चलते मधुमेह और ह्रदयघात के बढ़ती रोगियों की संख्या पहले से ही चिंता का सबब बनी हुई थी इधर डिजीटल युग के नाम पर ज्यादा देर तक ऑन स्क्रीन रहना मानव जाति को एक और महामारी को ओर धकेल रहा है। बच्चों और […] Read more »
पर्यावरण लेख बजट 2025: एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त को मजबूत करने की दिशा में कदम February 26, 2025 / February 26, 2025 | Leave a Comment लेखिका:नमिता विकास, संस्थापक और प्रबंध निदेशक, ऑक्टस ईएसजीस्वप्ना पाटिल, प्रबंधक, इंडिया, एसएमई क्लाइमेट हब एमएसएमई: अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जलवायु परिवर्तन की चुनौती छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होते हैं। भारत में इनका योगदान जीडीपी का 30% है। 2025-26 के केंद्रीय बजट में एमएसएमई को बढ़ावा […] Read more » Budget 2025: Steps towards strengthening climate finance for MSMEs एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त
आर्थिकी राजनीति बजट: भूटान को मिला सबसे ज्यादा, जानिए तनावपूर्ण संबंधों के बीच बांग्लादेश-मालदीव को क्या मिला February 6, 2025 / February 6, 2025 | Leave a Comment राजेश जैन भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देशों से अच्छे संबंधों का हामी रहा है। उनके सुख-दुःख में भागीदार रहता आया है। उनके लिए हमारे आम बजट में भी प्रावधान रखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह आर्थिक जुड़ाव लंबे समय के लिए किए जाने वाले निवेश जैसा है। किसी […] Read more »
शख्सियत समाज साक्षात्कार हमारा तो फील्ड ही चुनौतियों से भरा है – डिटेक्टिव गुरू राहुल राय गुप्ता February 6, 2025 / February 6, 2025 | Leave a Comment नीतू गुप्ता आपने एजेंट विनोद, जग्गा जासूस, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी, पोशम पा, डैशिंग डिटेक्टिव, बादशाह, हसीन दिलरूबा, बॉबी जासूस जैसी जासूसी पर आधारित फिल्मों में जासूसों को देखा होगा। आज हमने एक असली जासूस से बात की। ये जासूस हैं, सीक्रेट वॉच डिटेक्टिव्स प्रा. लि. के सीईओ राहुल राय गुप्ता, जो डिटेक्टिव गुरू के नाम […] Read more » Detective Guru Rahul Rai Gupta डिटेक्टिव गुरू राहुल राय गुप्ता
लेख समाज बढ़ता तनाव: हर शख्स परेशां सा क्यों है? February 6, 2025 / February 6, 2025 | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा रोजमर्रा की भागमभाग और आपाधापी में लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ता मानसिक तनाव एवं अवसाद लोगों के जीवन में ऐसा खलल डाल रहा है, जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। टेंशन एवं डिप्रेशन से जूझने वाले लोग ऐसे निराशाजनक दौर से गुजर रहे हैं जो न उन्हें दिन में चैन लेने दे रहा है और न रात को आराम। यह समस्या न केवल युवाओं बल्कि हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। अब तो बच्चे भी तनाव से अछूते नहीं रहे हैं। यह ऐसी विश्वव्यापी समस्या है, जिसके शिकार लोग रहते भले ही अलग-अलग देशों में हों पर उनका दर्द एक जैसा है। हमारे देश में तनाव ने लोगों की जीवनचर्या को अस्त व्यस्त कर दिया है। एक ओर जहां बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का दबाव तनाव की वजह है, वहीं परिस्थितियों के साथ सामंजस्य न बैठाने से भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता भी तनाव का कारण बन रही है। आर्थिक संकट का सामना करने वाले व्यक्तियों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में आ रही कठिनाई भी तनाव और अवसाद की वजह है। किसान, मजदूर, अधिकारी, कर्मचारी, इंजीनियर, अभिनेता, नेता, व्यापारी, दुकानदार, स्त्री, पुरुष सब इससे पीडि़त हैं। शायद ही कोई ऐसा वर्ग है जिसे तनाव ने छोड़ा हो। स्कूल-कॉलेज के बच्चों को शिक्षा और कॅरियर को लेकर बढ़ता दबाव परेशान किए हुए है। परीक्षा जनित तनाव, अच्छे अंक प्राप्त करने का प्रेशर और अच्छी नौकरी पाने का दबाव युवाओं को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर रहा है। समाज में कुछ बनकर दिखाने की चाहत भी तनाव का प्रमुख कारण बन गई है। जब महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो दिमाग में केमिकल लोचा पैदा होने लगता है। बढ़ती नशावृत्ति और बिखरते परिवार भी टेंशन का सबब बन रहे हैं। परिवारों में संघर्ष और रिश्तों में खटास मानसिक बीमारियों को बढ़ावा रहा है। हाल के सालों में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी मानसिक अवसाद की नई वजह बनकर उभरा है। वर्चुअल दुनिया में व्यस्त लोग हकीकत में अकेले पड़ते जा रहे हैं। देश में मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराता संकट गंभीर स्थिति बन चुका है। इसका खतरनाक परिणाम बढ़ती आत्महत्याओं के रूप में सामने आ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2021 में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की जबकि 2022 में 1.70 लाख से ज्यादा लोगों ने मौत को गले लगा लिया। यह भयावह आंकड़े समाज के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग अवसाद, चिंता, मानसिक विकारों और अकेलेपन की वजह से आत्महत्या करते हैं। रिश्तों में तनाव, विवाह संबंधी समस्याएं और फेमिली स्पोर्ट का अभाव भी बड़ी वजह है। कर्ज का बोझ और वित्तीय समस्याएं भी इसके प्रमुख कारणों में हैं। कई बार शारीरिक- मानसिक उत्पीडऩ, विशेष रूप से यौन उत्पीडऩ के कारण भी लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। देश में महिलाओं से ज्यादा शादीशुदा पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। छात्रों द्वारा सुसाइड की बढ़ती घटनाएं भी चिंता की वजह बन रही हैं।यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मानसिक स्वास्थ्य की हालत खराब है। 15 से 24 साल के प्रत्येक 7 लोगों में से एक व्यक्ति खराब मेंटल हेल्थ से गुजर रहा है। एक सर्वे से पता चलता है कि खराब मेंटल हेल्थ से पीडि़त लोगों में से 41 फीसदी ही किसी काउंसलर या मनोचिकित्सक के पास जाना उचित समझते हैं। गांवों में तो मानसिक बीमारी को कोई बीमारी ही नहीं समझा जाता है। गांवों में मनो चिकित्सकों का अभाव भी एक समस्या है। लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ानी जरूरी है। लोगों को बताया जाना चाहिए कि मानसिक समस्याएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी शारीरिक बीमारियां होती हैं। गांवों में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को ‘पागल’ करार देकर उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। जगह-जगह जंजीरों में बंधे मनोरोगी समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता का ज्वलंत उदारण हैं। मौजूदा दौर में यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कोई कमजोरी नहीं हैं बल्कि यह एक चुनौती है जिसका सामना परस्पर सहयोग, समझ और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए। अमरपाल सिंह वर्मा Read more » बढ़ता तनाव
कला-संस्कृति महा कुंभ से सामाजिक समरसता को मिलेगी “संजीवनी” February 3, 2025 / February 3, 2025 | Leave a Comment प्रदीप कुमार वर्मा नीले आसमान में भगवा रंगों की लहराती ध्वज पताकाएँ। लगातार बजते घड़ी-घंटाल और संत ओर महात्माओं द्वारा गूंजते मंत्रोच्चार। चौबीस घंटे पवित्र गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम में स्नान करते असंख्य लोग। यज्ञशालाओं से निकलती हवन कुंड की अग्नि। भजन-कीर्तन के साथ प्रवचनों और हेलीकॉप्टरों द्वारा की जा रही पुष्प वर्षा। गंगा,यमुना और सरस्वती […] Read more » Maha Kumbh Maha Kumbh will provide "sanjeevani" to social harmon