मनोरंजन डिजिटल डिटॉक्स क्यों जरूरी है ? September 11, 2025 / September 11, 2025 | Leave a Comment डा वीरेन्द्र भाटी मंगल वर्तमान समय डिजिटल युग का है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने हमारी दुनिया को छोटा कर दिया है। सूचना, शिक्षा और मनोरंजन हमारी उंगलियों पर हैं लेकिन यही सुविधा धीरे-धीरे हमारी सबसे बड़ी समस्या भी बनती जा रही है। लोग घंटों-घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने लगे हैं जिसके कारण […] Read more » Why is digital detox necessary डिजिटल डिटॉक्स
खान-पान सार्थक पहल केला : खाएं भी और फैशन भी चमकाएं September 10, 2025 / September 10, 2025 | Leave a Comment चंद्र मोहन केले का कई तरह से इस्तेमाल होते देखा या सुना है. केले या केले के तने का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि केले के रेशों का इस्तेमाल अब फैशन इंडस्ट्री में भी होने लगा है, वो भी अलग-अलग तरह के कपड़े तैयार करने में. जो केला […] Read more » केले के रेशों का इस्तेमाल
लेख आत्महत्या किसी भी सामान्य जीव की नैसर्गिक प्रवृत्ति है ही नहीं September 9, 2025 / September 9, 2025 | Leave a Comment डॉ. एच.एस. राठौर पृथ्वी पर जीवन विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी एवं सूक्ष्म जीवों के रूपों में प्रकट होता है और एक समय पर इनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है जिसे मृत्यु कहते है। मनुष्य जीवों में सर्वश्रेष्ठ है एवं विकासवाद के क्रम में सर्वोच्च स्थान पर है। सबसे परिष्कृत मस्तिष्क एवं किसी भी ऋतु […] Read more » आत्महत्या आत्महत्या किसी भी सामान्य जीव की नैसर्गिक प्रवृत्ति है ही नहीं
लेख हिंदी दिवस हिंदी हैं, हम वतन है, हिन्दुस्तां हमारा! September 9, 2025 / September 9, 2025 | Leave a Comment (14 सितंबर हिंदी राजभाषा दिवस पर विशेष लेख) वेदव्यास इस बार भी 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाएगा और हिंदी भाषी राज्यों में परम्परा के अनुसार सरकारी खर्च पर सरकारी संस्थानों में खूब तालियां और थालियां बजेगी और बधाइयां भी बंटेगी। मुझे इस बात की खुशी भी है कि साल में एक दिन […] Read more »
लेख स्वास्थ्य-योग प्लास्टिक किसी को न भाये – उसका कचरा सबका दर्द भगाये September 8, 2025 / September 8, 2025 | Leave a Comment चंद्र मोहन बाजार से खरीदारी करके घर लौटते सभी के हाथों मे छोटे बड़े प्लास्टिक के थैलों को हर कोई आसानी से देखता है. प्यास लगी हो तो पानी की बोतल भी प्लास्टिक की ही बाजार मे उपलब्ध है. रेलगाड़ी मे सफर करो तो स्टेशन पर भी पानी की प्लास्टिक बोतल भी सभी पहचानते हैँ. […] Read more » प्लास्टिक से पैरासिटामोल
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म श्रद्धा से जुड़ती है आत्मा – पितृ पक्ष का संदेश ! September 8, 2025 / September 8, 2025 | Leave a Comment हमारी भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसमें धर्म, दर्शन, जीवन मूल्य, सामाजिक संरचना, पारिवारिक संबंध और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का विशेष स्थान है। भारतीय समाज में परिवार और पूर्वजों के प्रति आदर और कृतज्ञता को बहुत महत्व दिया जाता है। इन्हीं मूल्यों का […] Read more » – पितृ पक्ष का संदेश श्रद्धा से जुड़ती है आत्मा
लेख समाज अतिथि शिक्षकों की यह कैसी मेहमाननवाजी September 3, 2025 / September 3, 2025 | Leave a Comment ओ पी सोनिक ऐसा माना जाता है कि भारतीय समाज के व्यवहार में अतिथि को देवता के समान मानने की भावना समाहित है। पिछले कई वर्षों से भारत की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के लिए प्रयुक्त अतिथि शब्द जितना ट्रेंड करता रहा है, उतना पहले कभी नहीं देखा गया। जब शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा विभिन्न माननीय न्यायालयों में सरकारों के गले की फांस बनने लगा तो सरकारों द्वारा शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए एक ऐसा अस्थाई जुगाड़ ईज़ाद कर लिया जिससे देश की डगमगाती शिक्षा व्यवस्था फिर से चलने लगी। सरकारी शिक्षण संस्थानों में नियमित शिक्षकों की अपेक्षा अतिथि शिक्षकों की बढ़ती संख्या को देखकर लगता है कि फिर से चलने वाली व्यवस्था अब लंगड़ी व्यवस्था का रूप ले रही है। विभिन्न राज्यों में ऐसे शिक्षकों को अतिथि शिक्षक, शिक्षा मित्र, संविदा शिक्षक, पारा शिक्षक, शिक्षक सेवक और विद्या वालंटियर्स जैसे भावनात्मक नामों से जाना जाता है। काम चाहें चुनाव का हो या मतदाता सूचियों का या किसी अन्य गैर शैक्षिणिक गतिविधि का, आमतौर पर नियमित शिक्षक उक्त गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ाने का ज्यादा दायित्व अतिथि शिक्षकों के कंधों पर टिका होता है। अधिकांश राज्यों में शिक्षकों के प्रति राजनीतिक उदासीनता ने उन्हें मजदूरों के स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। मजदूरों को भी कार्य दिवसों के हिसाब से पारिश्रमिक मिलता है और अतिथि शिक्षकों को भी। जिन राज्यों में मासिक आधार पर निर्धारित धनराशि देने का प्रावधान है भी तो वह अपर्यात है। मजदूरों और अतिथि शिक्षकों में बस फर्क सिर्फ इतना रह गया है कि अतिथि शिक्षकों को मजदूरों की तरह काम के लिए चौराहों पर खड़ा नहीं होना पड़ता। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में मजदूरों को वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की सरकारी गारंटी है, लेकिन सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले अतिथि शिक्षकों को वर्ष में कितने दिन का काम मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लाला जी की दुकान पर काम करने वालों और घरों में काम करने वाली महिलाओं को महीने की तय धनराशि के आधार पर काम पर रखा जाता है। आमतौर पर इन्हें सप्ताह में एक दिन छुट्टी मिलती है जिसके पैसे नहीं कटते। और इन कार्यो को करने के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित नहीं है, जो मानवीय पहलू के सकारात्मक पक्ष को दर्शाता है। शैक्षणिक योग्यता प्राप्त अतिथि शिक्षक विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। अधिकांश राज्यों में उन्हें कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता। रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों के पैसे काट लिए जाते हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने वाले देश में क्या राज्य सरकारें आर्थिक रूप से इतनी कमजोर हो गयी हैं कि अतिथि शिक्षकों को रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों के पैसे देने में असमर्थ हैं। अतिथि शिक्षकों पर कभी भी कार्यमुक्त होने का खतरा मंडराता रहता है। ऐसे शिक्षकों के रोजगार की अनिश्चितता शोले फिल्म के उस डायलाग की याद दिलाती है जिसमें गब्बर सिंह बसंती को डांस करने को मजबूर करता है और फिर कहता है, कि जब तक तेरे पैर चलेंगे, तब तक उसकी यानी वीरू की सांसे चलेंगी। अतिथि शिक्षकों की नौकरी भी तभी तक लगातार चल पाती है जब तक कि उस पोस्ट पर कोई नियमित शिक्षक नहीं आ जाता। नियमित शिक्षक के आने पर अतिथि शिक्षक स्वतः ही कार्यमुक्त हो जाते हैं। उन्हें शिक्षक के रूप में फिर से काम करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों एवं कस्बों की ओर आए बेरोजगार युवक निराश होकर वापस गांव लौट जाते हैं। अतिथि शिक्षकों को उनके निवास से इतनी दूर के स्कूलों में नियुक्त कर दिया जाता है कि उनका अधिकांश समय आने जाने में ही व्यतीत हो जाता है। जब भी कभी अतिथि शिक्षकों का कोई आंदोलन सक्रिय होता है तो गिद्ध की दृष्टि लगाए बैठी राजनीति आंदोलन का राजनीतिक अपहरण कर उसको निष्प्रभावी बनाने का काम करती है। देश की राजधानी दिल्ली में अतिथि शिक्षकों के ऐसे कई आंदोलन राजनीतिक अपहरण का शिकार हो चुके हैं। यही वजह है कि दिल्ली में अतिथि शिक्षकों को पक्का करने की खोखली घोषणाएं कच्ची साबित हुई हैं। ऐसी घोषणाओं के लगे पोस्टर कई स्कूलों में आज भी देखे जा सकते हैं। अतिथि शिक्षकों की कुंठा एक ऐसी असमंजसता में फंसी है जो उन्हें न तो रोजगार में होने की अनुभूति होने देती है और न ही बेरोजगार होने की। भारत में हर वर्ष परीक्षा पर चर्चा होती है पर नौकरियों के लिए आयोजित उन प्रतियोगी परीक्षाओं पर चर्चा नहीं होती जिनमें पेपर लीक होने के कारण नियुक्तियों की प्रक्रिया को लम्बे समय तक टाल दिया जाता है। समय समय पर देश के कई राज्यों में अतिथि शिक्षकों के मामले माननीय न्यायालयों में सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ जाते हैं। भारत में सरकारी क्षेत्र में बढ़ती ठेकेदारी प्रथा ने एक अलग तरह के सामन्तवाद को जन्म देने का काम किया है। शिक्षा से संबंधित संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार देश में शिक्षकों के करीब दस लाख पद खाली पड़े हैं। चौंकाने वाली यह भी है कि केन्द्रीय सरकार द्वारा संचालित केन्द्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों में रिक्त पद अपेक्षाकृत अधिक हैं। उक्त आंकड़ों के आधार पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूर दराज के क्षेत्रों में शिक्षकों के रिक्त पदों की हालत क्या होगी। उक्त संसदीय समिति ने जल्द ही खाली पदों को भरने को कहा है ताकि शिक्षा व्यवस्था की सुचारूता को सुनिश्चित किया जा सके। भारत जिस शिक्षा व्यवस्था के दम पर विश्व गुरू बनने के सपने देख रहा है, वह अभी कोसों दूर नजर आता है। जब शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को पढ़ाने वाले पर्याप्त संख्या में नियमित गुरू ही नहीं होंगे तो भारत विश्व गुरू कैसे बन पाएगा। अतिथि शिक्षकों की यह कैसी मेहमाननवाजी है जो उन्हें बेरोजगारी से जूझने को विवश कर रही है। चंद राज्यों ने अस्थाई शिक्षकों के हित के लिए सराहनीय प्रयास भी किए हैं पर यह समस्या राष्ट्रीय स्तर की है तो इसके समाधान भी राष्ट्रीय स्तर के होने चाहिए। बेहतर होगा कि अतिथि या अस्थाई शिक्षकों के लिए स्थाई रोजगार की व्यवस्था पर अधिक ध्यान दिया जाए। ओ पी सोनिक Read more » What kind of hospitality is this from guest teachers अतिथि शिक्षक
खेल जगत हॉकी और हनुमानगढ़… बल्ले बल्ले! August 28, 2025 | Leave a Comment राष्ट्रीय खेल दिवस ( 29 अगस्त) हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद को समर्पित ~साधना सोलंकी स्वतंत्र पत्रकार सचमुच…हॉकी और हनुमानगढ़ की सरजमीं का कुछ ऐसा ही नाता है कि जिसने भी इसे जाना- समझा… इसके नशे को घूंट घूंट पिया तो मुंह से उल्लास की बोली पंजाबियत की महक लिए फूट पड़ी…बल्ले बल्ले! दरअसल यह शहर […] Read more » राष्ट्रीय खेल दिवस
कला-संस्कृति गणेश वंदना August 27, 2025 / August 28, 2025 | Leave a Comment वक्रतुण्ड महाकाय,तेज तुम्हारा अनुपम छाय।सूर्यकोटि सम प्रभु दाता,विघ्न हरन जग के त्राता॥ गणपति बाप्पा मोरया,विघ्न विनाशक मोरया।सर्वकार्य सिद्धि कराओ,करुणा धारा बरसाओ॥ जहाँ तुम्हारा नाम लिया जाए,वहाँ न संकट पास आए।भक्ति-दीप हम जलाएँ,मन मंदिर में तुम्हें समाएँ॥ ज्ञान-विवेक का दीप जलाओ,भक्तों को सुख-शांति दिलाओ।मंगल-कथा सदा सुनाएँ,सिद्धि विनायक घर बसाएँ॥ गणपति बाप्पा मोरया,विघ्न विनाशक मोरया।सर्वकार्य सिद्धि कराओ,करुणा […] Read more »
लेख पंख और उड़ान – भारत की स्वतंत्रता और आत्मविकास August 25, 2025 / August 25, 2025 | Leave a Comment बोधार्थी रौनक़ भारत की आज़ादी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक चेतना है — वह चेतना जिसने सदियों की पराधीनता के अंधेरे को चीरकर इस राष्ट्र को अपने पैरों पर खड़ा होने का साहस दिया। 15 अगस्त 1947 का वह प्रभात केवल एक राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि स्वतंत्र आत्मा का जागरण था। यह दिन […] Read more »
लेख सफाई कर्मियों को भी चाहिए मौत के खतरों से आजादी August 8, 2025 / August 8, 2025 | Leave a Comment ओ पी सोनिक राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 120 से अधिक सीवर कर्मियों की मौतें हो चुकी हैं जो देश के विभिन्न शहरों की अपेक्षा सबसे ज्यादा हैं, यानी कि देश की राजधानी दिल्ली सीवर कर्मियों की मौतों के मामले में डैथ केपिटल बनती नजर आ रही है। दिल्ली उन […] Read more » Sanitation workers also need freedom from the dangers of death दिल्ली सीवर कर्मियों की मौतों के मामले में डैथ केपिटल
राजनीति कंबोडिया-थाईलैंड के बीच तनाव से चीन को होगा फायदा July 30, 2025 / July 30, 2025 | Leave a Comment राजेश जैन दक्षिण-पूर्व एशिया एक बार फिर अशांत है। कंबोडिया और थाईलैंड खतरनाक सीमा संघर्ष में उलझ गए हैं। अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।इस बार भी विवाद की जड़ वही पुरानी है—प्रीह विहेयर मंदिर। हजारों साल पुराना यह मंदिर खमेर साम्राज्य की धरोहर है लेकिन इस […] Read more » China will benefit from tension between Cambodia and Thailand कंबोडिया-थाईलैंड के बीच तनाव