निगरानी प्रौद्योगिकी

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एक प्रसिद्ध उक्ति है, “ जिस व्यक्ति को एकान्तता (Privacy) के प्रति सम्मान नहीं हो वह बर्वर होता है तथा जो अपने आचरण में गोपनीयता(secrecy) बनाए रखे वह खतरनाक होता है।“ अभी के सन्दर्भ में यह उक्ति प्रासंगिक हो गई है क्योंकि संकेत स्पष्ट हैं कि हमारे लिए एकान्तता और गोपनीयता बनाए रखना शायद मुमकिन… Read more »

विज्ञान में आगे होते हम

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डॉ. निवेदिता शर्मा   विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज ऐसा कोई कार्य नहीं, जिसमें वैज्ञानिक गुणवत्‍ता की आवश्‍यकता महसूस न की गई हो। इसीलिए कहा गया है कि मानव जीवन विज्ञान के बिना आधा-अधूरा है। वैसे विज्ञान स्वयं में शक्ति नहीं है, अपितु यह मानव को विशिष्ट शक्ति प्रदान करता है। वर्तमान में हमारे आस-पास जो… Read more »

अंतरिक्ष में उड़ानों का शतक

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प्रमोद भार्गव नए साल 2018 की शुरूआत में ही भारत ने अंतरिक्ष में किर्ती पताका लहरा दी है। अंतरिक्ष में सफल उड़ान का शतक पूरा करने से पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करके विश्व इतिहास रच दिया था। दुनिया के किसी एक अंतरिक्ष अभियान में इससे… Read more »

अंतरिक्ष में मनुष्य भेजने का खुला रास्ता

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संदर्भः- इसरो ने छोड़ा भारी उपग्रह- ं प्रमोद भार्गव अंतरिक्ष असीम है और उसमें जिज्ञासा व खोज की अनंत संभावनाएं हैं। करीब 30 साल पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भविष्य की सुखद संभावनाओं को तलाशने की पहल की थी। आज हम एक-एक कर कई उपलब्धियां हासिल कर अंतरिक्ष के… Read more »

वैज्ञानिकों के चमत्कार को नमस्कार

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अब आज जब हम अपने आधुनिक विश्व के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की खोज करते हुए देखते हैं, हम यह भी देखते हैं कि आज के वैज्ञानिक कैसे नये-नये अंतरिक्षीय रहस्यों से पर्दा उठाते जा रहे हैं, तो हमें उन पर आश्चर्य होता है। वास्तव में यह आश्चर्य करने की बात नहीं होनी चाहिए, अपितु हमें अपने आप पर गर्व होना चाहिए कि आज का विज्ञान जितना ही अंतरिक्षीय रहस्यों को उद्घाटित करता जा रहा है-वह उतना ही अधिक हमारे साक्षात्धर्मा ऋषियों के उत्कृष्टतम चिंतन को नमन करता जा रहा है।

ये कैसा विकास है

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भारत में मोबाईल के उपयोगकर्त्ताआंे की संख्या में लगातार बढोतरी हो रही है । जून, 2017 तक भारत में 42 करोड से भी अधिक मोबाईल उपभोक्ता हो चुके हैं । प्राथमिक तौर पर देखने और सुनने में ऐसा लगता है कि हमारे वतन में एक संचार क्रांति जन्म ले चुकी है और उसका निरंतर विकास… Read more »

ख़तरे सोशल मीडिया के

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भारतवासियों को खासतौर पर बड़ी गंभीरता से सोशल मीडिया के विषय पर यह चिंतन करने की ज़रूरत है कि हम इस माध्यम पर कितना विश्वास करें और कितना न करें?

शारीरिक अक्षमताओं की चुनौतियों पर खरा उतरते कृत्रिम हाथ-पैर और रोबोटिक अंग

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त्वचा की तरह कवर से ढंके होने के कारण ये दिखने में भी वास्तविक लगते हैं। हाथ व पैर वाले अधिकांश कृत्रिम अंगों में अनुलग्नकों की आवश्यकता होती है। आजकल इसी पर आधारित ओसिओ-एकीकरण नामक अस्थि-संयोजन प्रक्रिया का काफी उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अस्थिमज्जा में कृत्रिम अंग को प्रत्यारोपित कर जैविक प्रतिक्रिया का संचालन कराया जाता है। इस तरह जैव संगत प्रत्यारोपण द्वारा बाहरी कृत्रिम अंग और भीतरी जीवित ऊतक के मध्य इंटरफेस जैव गतिविधि के माध्यम से एक सशक्त व दीर्घावधिक स्थायी संबंध जैव एकीकरण से स्थापित किया जाता है।

नासा के पृथ्वी लोक

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नासा के ये प्रमाणिक पृथ्वीलोक निःसंदेह हमारी भारतीय वैदिक संस्कृति में उल्लिखित अनेक लोकों यथा सत्यलोक या ब्रह्मलोक, तपो लोक, भृगु लोक, स्वर्ग लोक, इंद्र लोक, ध्रुव लोक, सप्तऋषि लोक, जन लोक या महर लोक, भूलोक, कर्मलोक, भुवर लोक, पाताल लोक आदि की पुष्टि करते हैं। नासा के पृथ्वीलोक इस उक्ति का कहीं न कहीं समर्थन सा करते प्रतीत होते हैं कि कल्पनाओं की उड़ानों में पंख यथार्थ के ही होते हैं।

जिज्ञासा है, वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतिफल

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संदर्भः- 28 फरवरी विज्ञान दिवस के अवसर पर विशेष प्रमोद भार्गव भारत में विज्ञान की परंपरा बेहद प्राचीन है। जिसे हम आज साइंस या विज्ञान कहते हैं, उसे प्राचीन परंपरा में पदार्थ विद्या कहा जाता था। देश के वैज्ञानिक नित नूतन उपलब्धियों से दुनिया को चैंका रहे है। विज्ञान के क्षेत्र में हमारी प्रगति अब… Read more »