लेखक परिचय

राम कृष्ण

राम कृष्ण

टेलि. 4060097 सम्पादन प्रमुख : न्यूज़ फ़ीचर्स ऑ़फ़ इण्डिया संस्थापक अध्यक्ष : उत्तर प्रदेश फ़िल्म पत्रकार संघ श्रेष्ठतम लेखन के लिये स्वर्णकमल के राष्ट्रीय पुरस्कार से अलंकृत 14 मारवाड़ी स्ट्रीट . अमीनाबाद . लखनऊ 226 018 .

कहानी राजेश खन्ना की

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  रामकृश्ण राजेश खन्ना से मेरी पहली मुलाकात चेतन आनन्द की फि़ल्म आखरी ख़त के सेट पर हुर्इ थी. उसका नाम तब जतिन था. यूनाइटेड प्रोडयूसर्र टेलेन्ट कान्टेस्ट में उसे यधपि सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ था लेकिन महीनों तक उस संस्था से सम्बद्ध निर्माताओ को उसकी ओर  एक नज़र देखने तक की फुरसत नहीं मिल… Read more »

मोतीलाल की जूता पालिश

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मोतीलाल – आपने नाम सुना है न मोतीलाल का ? किसी ज़माने में वह हिन्दी फि़ल्मों के सर्वाधिक लोकप्रिय कलाकार थे, और वैसे भी लोगों का ख़याल है कि अभिनय-कला के जिस सर्वोच्च शिखर को अनजाने ही उन्होंने छू लिया था वहां तक पहुंच पाना आज भी किसी के लिये सहज-संभव नहीं. मिस्टर सम्पत …… Read more »



स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित हमारे चलचित्र (Movies based on Independence Movement)

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 भारत में राष्ट्रीय फ़िल्मों का निर्माण बहुत कम हुआ है, यद्यपि स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद इस बात की ज़ोरों से आशा की जाती थी कि हमारे फिल्म निर्माता मुखर होकर उस दिशा में अग्रसर होंगे। पिछले साठ बरसों की अवधि में जितने चित्रों का निर्माण हुआ है उनमें कुल सात-आठ ऐसे चित्र थे जो सचमुच राष्ट्रीय… Read more »

हास्य अभिनेता ओमप्रकाश को जब गूंगा बनना पड़ा

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रामकृष्ण हास्य-रस के अनादि सम्राट अभिनेता ओमप्रकाश अभी कुछ ही बरसों पहले भगवान को प्यारे हुए हैं. जैसा कि लोगों को मालूम होगा, स्वभावत: वह बेहद बातूनी किस्म के इंसान थे. अगर आप उनकी अभिनीत किसी फि़ल्म के सेट पर पहुंच जाते तो आपको इस बात का आभास भी नहीं हो पाता कि कब रात… Read more »

मधुबाला के घर में भूतों का डेरा

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रामकृष्ण ’महल‘, ’मुग़ल-ए-आज़म‘ और ’कालापानी‘ ख्यातिप्राप्त भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री स्वर्गता मधुबाला का मुम्बई-स्थित पूर्व वासस्थान भूतों का डेरा बन गया है और उस स्थल पर कोई भी व्यक्ति रहने को तैयार नहीं, यह बात शुरू में भले ही आपको सर्वथा आश्चर्यजनक लगे लेकिन उसके तथ्य से इंकार कर पाना किसी के लिये भी संभव नहीं… Read more »

जॉनी वॉकर,शकील और मुकरी(comedy artists of hindi movies)

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रामकृष्ण जॉनी वॉकर की याद है न आपको ? किसी ज़माने में हिन्दी फ़िल्मों की हास्य विधा का वह एकछत्र सम्राट रह चुका है। तो मद्रास जा रहा था वह उस दिन, किसी शूटिंग के सिलसिले में। रास्ते में पता चला कि उसी गाड़ी से किसी मुशायरे में शिरकत करने सुप्रसिद्ध गीतकार शकील बदायूनी भी… Read more »

कैसे हुई थी हेमा के पिता की मौत

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 रामकृष्ण सन् 1978 के मध्य में सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी के पिता और भारतीय दर्शन के सुपरिचित अध्येता श्री वी.आर. चक्रवर्त्ती का जिस आकस्मिक और आश्चर्यपूर्ण तौर-तरीके से अवसान हुआ था उसकी तुलना भारतीय फ़िल्मों की किसी भी रहस्य और रोमांचपूर्ण पटकथा के साथ आसानी से की जा सकती है. उस वर्ष 20 जुलाई… Read more »

किसकी जीत किसकी हार?

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रामकृष्ण प्रदेश लोक संगठन (ज़ेड) के उपाध्यक्ष सुदामा पांडे के संबंध में यह जगज़ाहिर था कि उनका सम्पूर्ण परिवार ही नेताओं का है. प्रदेश के आधे से अधिक नेता या तो उनके संबंधी थे, या चेले. स्वयं घर में बड़ा लड़का रमेश देश के एक बहुत बड़े नेता का राजनीतिक सचिव था, छोटा पुत्र अविनाश… Read more »

चश्म-ए-बद्दूर बनाम बेलगाम घोड़े

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रामकृष्ण फ़ुरसतनामा वह ज़माना फ़िल्मी दुनिया में राज कपूर के चरमोत्कर्ष का था, और के साथ ही शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी भी अपनी लोकप्रियता तब आसमान छू रहे थे. उन दिनों निर्मित होने वाली कम से कम पचास प्रतिशत फ़िल्में ऐसी ही होती थीं जिनमें शंकर-जयकिशन का सगीत हुआ करता था और हसरत-शैलेन्द्र के गीत…. Read more »

खलनायकत्व के आवरण में लिपटा एक प्यारा इंसान

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रामकृष्ण ख़त-किताबत के ज़रिए तो मैंको एक लम्बे अरसे से जानता रहा हूं, लेकिन रू-बरू उनसे मेरी मुलाक़ात कुल दो बार हो पायी – और वह भी बम्बई में नहीं बल्कि लखनऊ में. यह एक अजीब आश्चर्य है कि अपने बरसों लम्बे बम्बई प्रवास में, जिसमें मैं वहां के लगभग सभी फ़िल्मकारों के निकटतम सम्पर्क… Read more »