डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

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लेखक - डा. राधेश्याम द्विवेदी - के पोस्ट :

राजनीति

सामाजिक सांस्कृतिक संगठन के विरोध में बननेवाले दो राजनीतिक पुच्छल तारे

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डीएसएस के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तेजप्रताप को पहले आरएसएस का प्रशिक्षण लेने की सलाह दे दी. उन्होंने कहा कि तेजप्रताप को पहले आरएसएस की ट्रेनिंग लेनी चाहिए, उसके बाद कोई संगठन बनाने की बात करनी चाहिए. प्रशिक्षण लेने के बाद संगठन की असफलता का शक कम हो जाएगा, बिना प्रशिक्षण के असफलता का भय बना रहेगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आरएसएस की विचारधारा को महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार मानते हैं.

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विविधा

यमुना मां पर प्राणघातक प्रहार एवं उससे बचाव

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गंगा यमुना नदी समस्त जगत की जीवन दायिनी हैं। आज आने अनजाने लोग प्रकारान्तर से मां की हत्या रोज का रोज करने का प्रयास कर रहे हैं जो बहुत बड़े पाप के भागी बनते जा रहे हैं। मां यमुना का अविरल प्रवाह जारी रहना चाहिए। यमुना की गन्दगी की असली वजह तो ये है कि उसका पानी हरियाणा के यमुना नगर में हथिनीकुंड बराज में रोक लिया गया है। वहाँ से यूपी और हरियाणा के लिए दायें-बायें नहर निकाल ली गयी और यमुना का पानी खेतों में बाँट लिया गया। ऐसे में यमुना सदानीरा नहीं रह पाई। उत्तराखण्ड में यमुना कल कल करती हुई बहती हैं परन्तु मैदानों पर आकर मानव के प्रहारों से वह बहुत आहत होती गयी हैं

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विविधा

राम जन्मभूमि का सच

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माननीय उच्चतम न्यायालय ने मन्दिर मस्जिद विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने का नवीनतम निर्देश जारी किया है। जहां हिन्दू संगठनों ने इस सकारात्मक पहल का स्वागत किया है। कुछ मुस्लिम संगठन भी इसे आपसी रजा मन्दी से हल किये जाने के पक्ष में हैं, परन्तु कुछ कट्टर पंथी लोग इसका समाधान चाहते ही नहीं हैं और न्यायालय के निर्णय को ही प्रमुखता दे रहें हैं। इतना ही नहीं वामपंथी इतिहासकारों ने अयोध्या के मन्दिर मस्जिद मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट को गुमराह करने की पहले भी कोशिश की थी। अदालत द्वारा निर्णय दिए जाने के बाद भी इरफान हबीब और उनकी टीम सच मानने को तैयार नहीं रहे। अयोध्या मुद्दे पर राजनेताओं से कृतकत्य होने के चक्कर में इतिहासकारों ने इस स्पष्ट विषय को और विवादित बना दिया है। 6 दिसंबर को ढांचा गिरने के उपरांत जब न्यायालय के संरक्षण में खुदाई हुई, उसमें मंदिरों का मलवा, खंडित मूर्तियां एवं फर्श के अवशेष निकले थे। लेकिन तथाकथित इतिहासकारों ने तब भी विवाद को सुलझने नहीं दिया था।

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