लेखक परिचय

संजय द्विवेदी

संजय द्विवेदी

लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। संपर्कः अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, प्रेस काम्पलेक्स, एमपी नगर, भोपाल (मप्र) मोबाइलः 098935-98888

एक विलक्षण संपादकः जगदीश उपासने

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 माखनलाल विश्वविद्यालय के नए कुलपति का है हिंदी पत्रकारिता में खास योगदान -संजय द्विवेदी    मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल के कुलपति के रूप में जब ख्यातिनाम पत्रकार श्री जगदीश उपासने का चयन हो चुका है, तब यह जानना जरूरी… Read more »

जागृत ग्राहक, जागृत भारत

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विश्व  उपभोक्ता अधिकार दिवस (15 मार्च) पर विशेष -संजय द्विवेदी    यह सिर्फ संयोग मात्र नहीं है कि विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस(15 मार्च) को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देश के सबसे महत्वपूर्ण ग्राहक अधिकार संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का दो दिवसीय अधिवेशन प्रारंभ हो रहा है। आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसवाले की… Read more »



ध्येय पथ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नौ दशक

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पुस्तक-समीक्षा आरएसएस की अविराम एवं भाव यात्रा का ‘ध्येय पथ’ – लोकेन्द्र सिंह जनसंचार माध्यमों में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में भ्रामक जानकारी आती है, तब सामान्य व्यक्ति चकित हो उठते हैं, क्योंकि उनके जीवन में संघ किसी और रूप में उपस्थित रहता है, जबकि आरएसएस विरोधी ताकतों द्वारा मीडिया में संघ की… Read more »

मुज्जफर हुसैन : हम तुम्हें यूं भुला ना पाएंगें

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संजय द्विवेदी मुंबई की सुबह और शामें बस ऐसे ही गुजर रही थीं। एक अखबार की नौकरी,लोकल ट्रेन के घक्के,बड़ा पाव और ढेर सी चाय। जिंदगी में कुछ रोमांच नहीं था। इस शहर में बहुत कम लोग थे, जिन्हें अपना कह सकें। पैसे इतने कम कि मनोरंजन के बहुत उपलब्ध साधनों से दूर रहना जरूरत और… Read more »

‘हिंद स्वराज’ के बहाने गांधी की याद

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संजय द्विवेदी महात्मा गांधी की मूलतः गुजराती में लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज्य  हमारे समय के तमाम सवालों से जूझती है। महात्मा गांधी की यह बहुत छोटी सी पुस्तिका कई सवाल उठाती है और अपने समय के सवालों के वाजिब उत्तरों की तलाश भी करती है। सबसे महत्व की बात है कि पुस्तक की शैली। यह किताब प्रश्नोत्तर की… Read more »

आप चुनाव तो जीत जाएंगे पर …………………………

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संजय द्विवेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में परिवर्तन कर देश की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे राजनीतिक संस्कृति में परिवर्तन के अपने वायदे पर कायम हैं। वे यथास्थिति को बदलना और निराशा के बादलों को छांटना चाहते हैं। उन्हें परिणाम पसंद है और इसके लिए राजनीतिक नेतृत्व… Read more »

सावर्जनिक संवाद में गिरावटः सनक में बदलती उत्तेजना

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आप में एक समर्थ और ताकतवर नेता हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी सोशल मीडिया एक्टिविस्ट को उनकी मदद की दरकार है लेकिन लोग हैं कि मोदी जी की मदद के लिए मैदान में उतरकर उनकी भी छवि खराब करते हैं। हर बात पर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री न दोषी हो सकता है न ही उन्हें दोष दिया जाना चाहिए। किंतु अगर लोग किन्हीं कारणों से अपने नेता से सवाल पूछ रहे हैं तो उनसे यह हक नहीं छीना जाना चाहिए। लोग अपने चुने गए प्रधानमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों से सवाल कर सकते हैं, यह उनका जायज हक है। आप उन्हें ‘ट्रोलिंग’ करके खामोश करना चाहते हैं तो यह अलोकतांत्रिक आचरण है। एक लोकतंत्र में रहते हुए संवाद-विवाद की अनंत धाराएं बहनी ही चाहिए, भारत तो संवा

असहिष्णुता की बहस के बीच केरल की राजनीतिक हत्याएं

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संजय द्विवेदी केरल में आए दिन हो रही राजनीतिक हत्याओं से एक सवाल उठना लाजिमी है कि भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में क्या असहमति की आवाजें खामोश कर दी जाएगीं? एक तरफ वामपंथी बौद्धिक गिरोह देश में असहिष्णुता की बहस चलाकर मोदी सरकार को घेरने का असफल प्रयास कर रहा है। वहीं दूसरी ओर उनके समान… Read more »

भारत और इजराइल के रिश्तेः संस्कृति के दो पाट

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-संजय द्विवेदी इजराइल और भारत का मिलन दरअसल दो संस्कृतियों का मिलन है। वे संस्कृतियां जो पुरातन हैं, जड़ों से जुड़ी है और जिन्हें मिटाने के लिए सदियां भी कम पड़ गयी हैं। दरअसल यह दो विचारों का मिलन है, जिन्होंने इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सपने देखे। वे विचार जिनसे दुनिया सुंदर बनती… Read more »

मोदीः जनविश्वास पर खरा उतरने की चुनौती

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-संजय द्विवेदी जिस दौर में राजनीति और राजनेताओं के प्रति अनास्था अपने चरम पर हो, उसमें नरेंद्र मोदी का उदय हमें आश्वस्त करता है। नोटबंदी, कैसलेश जैसी तमाम नादानियों के बाद भी नरेंद्र मोदी लोगों के दुलारे बने हुए हैं, तो यह मामला गंभीर हो जाता है। आखिर वे क्या कारण हैं जिसके चलते नरेंद्र… Read more »