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    Homeसाहित्‍यकविताक्योंकि तुम मेरे गुरुवर हो...

    क्योंकि तुम मेरे गुरुवर हो…

    ज्ञान की गंगा

    विचार प्रवाह

    जिज्ञासापूरक

    उत्साहवर्धक।

    अप्राप्य के प्राप्य

    जीवन प्रकाश स्तम्भ

    अज्ञान संहारक

    सत्य-असत्य शोधक।

    अद्भुत प्रकाशपुंज 

    अज्ञान तमनाशक

    विधि ज्ञानदाता

    सर्वग्राही

    सर्वज्ञ।

    हे जगतश्रेष्ठ

    तुम वंदनीय हो

    पूजनीय हो

    आराध्य हो

    क्योंकि तुम मेरे

    गुरुवर हो।

    सुशील कुमार ‘नवीन’

    सुशील कुमार नवीन
    सुशील कुमार नवीन
    लेखक दैनिक भास्कर के पूर्व मुख्य उप सम्पादक हैं। पत्रकारिता में 20वर्ष का अनुभव है। वर्तमान में स्वतन्त्र लेखन और शिक्षण कार्य में जुटे हुए हैं।

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