श्री कल्याण सिंह जी का जीवन परिचय


श्री कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ जिले की अतरोली तहसील के मढरोली गांव में हुआ था। इनका तालुक लोधी समुदाय से था।इनके पिता का नाम तेजपाल सिंह लोधी एवं माँ का नाम सीता देवी था।इनकी शैक्षिक योग्यता बी ए एल एल बी है।
1952 में कल्याण सिंह जी ने रामवती देवी से शादी की। इस दंपति ने एक बेटे (राजवीर सिंह) और एक बेटी (प्रभा वर्मा) को जन्म दिया।।
ये राष्ट्रवादी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक स्वयंसेवक थे, स्कूल में रहते हुए ही ये हिंदू राष्ट्रवादी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य बन गए थे।
इनके बेटे,राजवीर सिंह और पोते,संदीप सिंह,भी राजनेता हैं और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं।
कल्याण सिंह जी के पिता का नाम स्वर्गीय तेजपाल सिंह लोधी व माता का नाम स्वर्गीय सीता देवी और पत्नी का नाम रामवती देवी है।
कल्याण सिंह जी का राजनैतिक करियर
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विधान सभा सदस्य के रूप में करियर
पहली बार साल 1967 में कल्याण सिंह को उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुना गया था और विधानसभा की गद्दी उन्होंने लगभग 13 साल तक संभाली। वे 1980 तक इस गद्दी पर रहे। जब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी तो उस दौरान कल्याण सिंह को 21 महीनो के लिए जेल में भेज दिया गया था।उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर करियर पहला कार्यकाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जून 1991 में, भाजपा के विधानसभा का चुनाव जीतते ही कल्याण सिंह को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया 6 दिसंबर 1992 को कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद को गिरवाते ही शाम के समय अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था ।
नवंबर 1993 में, उन्होंने अतरौली और कासगंज विधानसभा इलाको से चुनाव में भाग लिया और दोनों ही इलाको में अपनी जीत हासिल की । वे विपक्ष रूपी नेता के रूप में काम कर चुके थे।
दूसरा कार्यकाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में
सितंबर 1997 से नवंबर 1999 तक लगभग दो साल के लिए वे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पद पर बैठे , जब उनकी सरकार बनी तो उन्होंने हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए सभी प्राथमिक स्कूलों की कक्षाओं को भारत माता की आरती के बाद ही पढ़ाई की शुरुआत करने की बात कही।
उन्होंने हिंदी भाषा को भी बढ़ावा देने के लिए कक्षा में यश सर की जगह बंदे मातरम कहने को कहा था। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये 6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद 1993 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अतरोली और कासगंज से विधायक निर्वाचित हुये। चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी लेकिन मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी ने गठबन्धन सरकार बनायी। विधान सभा में कल्याण सिंह विपक्ष के नेता बने थे।वो सितम्बर 1997 से नवम्बर 1998 तक पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
21 अक्टूबर 1997 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के सम्पर्क में थे,जिसके बाद उन्होंने नयी पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन किया और २१ विधायकों का समर्थन दिलाया। इसके लिए उन्होंने नरेश अग्रवाल को ऊर्जा विभाग का कार्यभार सौंपा। दिसम्बर 1999 में कल्याण सिंह ने पार्टी छोड़ दी और जनवरी 2004 में पुनः भाजपा से जुड़े। 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलन्दशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 में उन्होंने पुनः भाजपा को छोड़ दिया और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये।कल्याण सिंह ने चार सितम्बर 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी। उन्हें जनवरी 2015 में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था।
इनका देहान्त 21अगस्त सन 2021 को लखनऊ के एक अस्तपताल में हुआ जहां वे 4 जुलाई सन 2021से भर्ती थे और अंतिम संस्कार गंगा के किनारे नरोरा में 23 अगस्त सन 2021 को पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ।
आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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