अटल से मिली विरासत को सहेजकर रखे भाजपा

विवेक कुमार पाठक
6 दशक के मान मर्यादा भरे संसदीय जीवन वाले अटल बिहारी वाजपेयी अब भारत का इतिहास हो चुके हैं। वे भारत के महान लोकतंत्र की प्रतिष्ठा दुनिया भर में अर्जित करने वाले सपूत हैं। राजधानी दिल्ली में अटल की अंतिम यात्रा में जिस कदर जनसैलाब उमड़ा वो दुनिया भर को बताता है कि कोई जननायक क्या होता है। कभी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी से अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान रही होगी मगर अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम विदाई पर जिस तरह पूरे विश्व के अरबों लोगों ने शोक व्यक्त किया है वो भारतीय राजनीति के अभूतपूर्व क्षणों में से एक है।

अटल दुनिया से विदाई लेते वक्त भारतीय जनता पार्टी को दुनिया भर में बेइंतहा सम्मान दिला गए हैं। अटल के कारण भाजपा को 16 से 17 अगस्त के हर क्षण हर पल दुनिया भर में उस गरिमापूर्ण ढंग से जाना पहचाना गया जो गरिमापूर्ण परिचय किसी दल को लंबी राजनैतिक यात्रा के बाद मिल जाए ऐसा पक्का नहीं कहा जा सकता।

अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में 5 किलोमीटर सड़क पर पैदल चलकर भाजपा के वर्तमान नायक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी सदर अमित शाह ने अटलजी के प्रति अपना सम्मान और श्रद्धा सार्वजनिक की है। देश के 18 मुख्यमंत्री, पूरी केन्द्रीय कैबीनेट से लेकर अटल की भाजपा के हजारों कार्यकर्ता और सड़क पर अंतिम दर्शन को उमड़े दिखे अनगिनत भारतवासी।
दुनिया से विदाई का ये नजारा भारत के न भूलने वाले दृश्यों में शुमार होकर पूरे देश और दुनिया भर के लोगों की स्मृति का हिस्सा बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटल के निधन पर अपने भावुक संदेश में कहा है कि वे उनके पिता तुल्य थे और उन्होंने अटल के जाने से अपना संरक्षक और मार्गदर्शक खो दिया है।
मोदी की इस अंर्तपीड़ा में भाजपा ही नहीं देश की करोड़ों जनता का शोक छिपा है। जनसंघ से लेकर भाजपा के दिल्ली में ताकतवर बनने तक अटल के संरक्षण में राष्ट्रवादी भाजपा के अनेक कार्यकर्ता आज प्रदेश और देश की राजनीति में पहुंचे हैं। अटल से गुजरात दंगों के समय राजधर्म की नसीहत पाने वाले नरेन्द्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं। नरेन्द्र मोदी ने सच ही कहा कि अटल उनके पिता जैसे थे। अटल ने भी पिता की तरह जहां लगा मोदी को नरेन्द्र भाई कहते हुए भी जवान बेटे की तरह राजधर्म का पाठ पढ़ा डाला।
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र भाई मोदी अब भाजपा शीर्षस्थ नरेन्द्र मोदी बन चुके हैं। मोदी के अनुचर अमित शाह आज भाजपा की दिशा धारा तय करते हैं।
ऐसे में अटल की विदाई में सड़क पर उतरने वाले नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को अटल बिहारी वाजपेयी के मूल्य सिद्धातों के लिए हमेशा सड़क पर उतरकर की जाने वाली कल्याणकारी राजनीति पर उतरना होगा।
भाजपा के ये दोनों शीर्षस्थ आज भाजपा को भले ही अटल बिहारी वाजपेयी के कालखंड से भी बहुत ज्यादा बहुमत दिला ले गए हों मगर राजनैतिक शुचिता, नैतिक मूल्य, समावेशी चिंतन और गरिमामय राजनीति के अटल दौर से वे मीलों पीछे हैं। सफलताएं ही सब कुछ नहीं हुआ करतीं। अटल सत्ता में राजनैतिक तपस्या करके स्वयं पहुंच गए। अटल ने सत्ता को लक्ष्य नहीं बनाया और ये सीख वे मौजूदा भारतीय जनता पार्टी को स्वत देकर गए हैं।
अटल की राजनीति भारतीय जनता पार्टी की धरोहर है वे चार दशक से भी कम उम्र के युवा दल के लिए अनगिनत राजनैतिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों की थाती छोड़ गए हैं।
अटल होना क्या होता हैए 16 अगस्त को उनके जाने से पहले और जाने के बाद पूरा देश और पूरी दुनिया देख रही है। वो किशोर पीढ़ी जिसने अटल को नहीं देखा, वो दुनिया भर के विदेशी नागरिक, विदेशी राजनायिक जिनका अटल से कोई नाता नहीं था वे दो दिन से लोकतंत्र के अजर अमर सिपाही अटल बिहारी वाजपेयी के लिए दुखी हैं। अखबार, टीवी, सोशल साइट्स, देशी विदेशी चैनल, दूतावास, हवाई  अड्डे  , रेलवे स्टेशन, दफतर,स्कूल, कॉलेज, क्या घर क्या बाजार हर तरफ हर दिल , दिमाग और शब्दों में अटल छाए हुए हैं।
देश दुनिया से जाते जाते मिला अमिट प्यारए मोहब्बत, सम्मान अटल बिहारी वाजपेयी का विहंगम व्यक्तित्व भारतीय जनता पार्टी की अपराजेय राजनैतिक हैसीयत को भी पा कर जाता है। अटल जनसंघ, भाजपा की पहचान को पार करते हुए वैश्विक जननायक की विरासत अपने छोटों के लिए छोड़ गए हैं।
मोदी और अमित शाह ने भारतीय संसदीय परंपरा की शान अटल बिहारी वाजपेयी को पूरे देश दुनिया के साथ विदाई दे दी है। कल अटलजी को मिला सम्मान भाजपा का मुकुट बन गया है। अब अटल का 93 साल का जीवन भाजपा की धरोहर है। उसको राजपथ पर चलने के उसूल बताने वाली विरासत है।
एक दल के रुप में भारतीय जनता पार्टी को अपनी राजनैतिक यात्रा के लिए बहुत कुछ पराक्रम करते हुए आगे बड़ना होगा। इसमें तमाम राजनैतिक मूल्य अब तक उपर नीचे हुए होंगे मगर विदाई के वक्त अटल से मिले राजनैतिक मूल्य भाजपा को नैतिक रुप से हमेशा याद रखने होंगे। सम्मान मिलने से दायित्व और कर्तव्य बड़ जाते हैं। भाजपा को अटल विदाई बेला में बहुत सम्मान दिलाकर गए हैं अब अटल की दी विरासत की हिफाजत करते रहे भाजपा।

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