लेखक परिचय

ब्रजेश कुमार झा

ब्रजेश कुमार झा

गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।

Posted On by &filed under राजनीति.


मनोहर आटे की पुकार पर बामसेफ-बसपा से जुड़े पुराने साथी सक्रिय हो गए हैं। वे मायावती को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अध्यक्ष पद से हटाने या वैकल्पिक पार्टी बनाने जैसे तमाम सुझावों पर विचार कर रहे हैं। इस बाबत बामसेफ व कांशीराम से जुड़े पुराने लोगों के बीच बैठकों का दौर जारी है।

 गत 15 दिसंबर को दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में एक बैठक हुई। अगली बैठक कुछ ही दिनों में बंगलौर में होनी है। बैठकों का यह सिलसिला `मायावती हटाओ, मिशन बचाओ´ अभियान का हिस्सा है। फिलहाल इसकी कमान मनोहर आटे के हाथों में है। दिल्ली की बैठक उन्हीं की अध्यक्षता में हुई थी। जानने वाले जानते हैं कि बामसेफ इनके दिमाग की ही उपज था।

हालांकि, अब वे आगे निकल चुके हैं। अपने पुराने साथियों के साथ मिलकर बसपा से अलग विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन, इस अभियान में उत्तर प्रदेश का कोई पुराना साथी उनके साथ नहीं दिख रहा है। यह अभियान का वह पक्ष है, जिसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। खैर, जो भी हो, उन्होंने मायावती के खिलाफ एक मोर्चा तो खोल ही दिया है। यहां बैठक में हिस्सा लेने आए बसपा के पूर्व सांसद हरभजन सिंह लाखा ने कहा कि हमारा विरोध मायावती के खिलाफ नहीं है। लेकिन बहुजन समाज बनाने के लिए जिस आंदोलन की शुरुआत `बामसेफ´ से हुई थी, उसका मायावती ने सत्यानाश कर दिया। सर्वजन समाज के नाम पर ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद को हवा दे रही है। बहुजन समाज अब उनके लिए महत्व की चीज नहीं है। ऐसी स्थिति में विकल्प की तलाश जरूरी है। उन्होंने अपने पुराने साथियों को संबोधित करते हुए कहा,  “हमारा मिशन यह नहीं था कि हम राज करें। हमारा मिशन तो यह था कि लोगों को बता दें कि यह समाज जाग गया है।”

देश के अन्य राज्यों से बैठक में हिस्सा लेने आए लोगों ने भी मायावती के सर्वजन समाज के फार्मूले से अपनी असहमति जाहिर की। साथ ही बहुजन समाज यानी अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए नए राजनीतिक विकल्प की बात दोहराई।

दक्षिण भारत यानी कर्नाटक से आए करीब 70 वर्षीय ए.एस. राजन ने कहा,  पूरे देश में बहुजन मुवमेंट स्थिर हो गया है। इस समाज का बड़ा तबका खाना, कपड़ा, आवास व शिक्षा के अभाव में कष्टदायक स्थिति में है। दूसरी तरफ देखने में आ रहा है कि उनके नाम पर करोड़ों रुपए की लूट मची है। इसलिए एक बहुउद्देशीय आंदोलन की जरूरत है।  उन्होंने मायावती की बसपा पर नकली बसपा होने का आरोप लगाया और कहा,  हम असली लोग हैं। अब हमें ही मोर्चा संभालना होगा।

आटे ने कहा, हम लोग तो बनाने वाले लोगों में हैं। बामसेफ बनाया। डीएस-4 और बसपा बनाया। क्या हुआ, यदि कुछ लोगों ने गलत मंशा से इस पर कब्जा कर लिया। लेकिन, अब समय आ गया है कि कुछ नया किया जाए ताकि हम बाबा साहेब आंबेडकर के मिशन को पूरा कर सकें।  अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की जमीन से दूर रहकर वे पुराने अनुभवी लोग मायावती से निपटने का कौन-सा नुस्खा अपनाते हैं।

ब्रजेश झा

2 Responses to “बसपाइयों की लड़ाई – ब्रजेश झा”

  1. ashutosh ashak

    मोका परस्त नेता को सबक सिखाना जरुरी है मायावती मोकपरस्त नेता है सत्ता के लिए कभी तिलक तराजू और तलवार इनको मरो जूता चार और कभी ब्रम्हा विष्णु महेश है हटी नहीं गणेश है नारा देने में कोई संकोच नहीं करती है

    Reply
  2. ashutosh ashak

    ekSdk ijLr usrkvksa dks lcd fl[kkuk t:jh gA ek;korh ekSdk ijLr usrk gSa vkSj lÙkk ikus ds fy;s dHkh fryd rjktww vkSj ryokj budk stwrs ekjks pkj rks czEgk fo”.kq egs’k gSa gkFkh ugha x.ks’k dk ukj nsus esa tjk Hkh ‘keZ eglwl ugha djrh gSaA
    फॉण्ट कृतिदेव 10

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *