डॉ. हरीशकुमार सिंह
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आव्हान पर पिछली बीस जुलाई को हुए छात्रों के आन्दोलन में तथाकथित लाठीचार्ज ,आंसू गोले चलने पर अंततः शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद आन्दोलन समाप्त घोषित कर किया गया था | इस आन्दोलन ने केंद्र सरकार की छबि को जो धक्का पहुँचाया उस धक्के का असर देश के प्रधानमंत्री ने एक झटके में शून्य कर दिया जब प्रधानमंत्री ने अपने इकतीस जुलाई की रात इन्स्टाग्राम पर जारी किये एक सन्देश में जंतर मंतर पर गंदी गालियाँ देने वाले सभी आन्दोलनकारी युवा छात्र – छात्रों को माफ़ कर अपने सन्देश से युवाओं का फिर से दिल जीत लिया | यह सही है कि युवाओं ने और खासकर देश की बच्चियों ने जो भद्दा प्रदर्शन किया उसके बाद यही धारणा बन रही थी कि इन सभी पर कड़ी कार्यवाही जरुर की जायेगी क्योंकि सभी का यही मत था कि प्रधानमंत्री किसी को बक्शते नहीं हैं और छोड़ना भी नहीं चाहिए था |
खबर थी कि दिल्ली पुलिस ने भी इन अन्दोलनकारियों में सैकड़ों तथाकथित पूर्व अपराधियों की पहचान की है जो आन्दोलन में जबरन घुस आए थे | कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के प्रतिनिधियों में भी एक सहमती यह बनी थी कि आन्दोलन करने वाले छात्रों पर जंतर मंतर ही नहीं ,पूरे देश में कहीं भी कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी मगर जो अशोभनीय गालियाँ प्रधानमंत्री को दी गयीं उससे सभ्य समाज आहत हुआ और अपेक्षा कर रहा था कि इन गालीबाज छात्रों को अगर सजा दी भी गई तो कुछ गलत नहीं होगा | मगर प्रधानमंत्री जी ने वही उदहारण पेश किया जो हमारी सनातन परम्परा में सहिष्णु देवता भगवान विष्णु ने कभी किया था |
रहीम का प्रसिद्ध दोहा है – क्षमा बडन को चाहिए ,छोटन को उत्पात | का रहिमन हरि को घट्यो जो भृगु मारी लात | बड़ों और महान व्यक्तियों को छोटों की गलतियों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए | पौराणिक कथा है कि एक बार ऋषियों में इस बात पर विवाद हुआ कि त्रिदेवों ,ब्रह्मा ,विष्णु और महेश में कौन सबसे शांत , सहनशील और सर्वेश्रेष्ठ है | इस बात का परीक्षण करने के लिए महर्षि भृगु को जिम्मेदारी सौंपी गई | भृगु सबसे पहले ब्रह्मा जी के पास गये और वहां जाकर भृगु ने ब्रह्मा जी को न तो प्रणाम किया और न ही उनका आदर सत्कार किया | इससे ब्रह्मा जी अत्यंत क्रोधित हुए | फिर महर्षि भृगु कैलाश पर्वत पर भगवन शिव से मिलने गये | शिव जी ने प्रेमवश भृगु को गले लगाना चाहा मगर भृगु ने शिव जी का अपमान करते हुए शिव जी को पीछे हटने को कहा | शिव जी क्रोधित हो गये और अपना त्रिशूल उठा लिया परन्तु माता पार्वती ने उन्हें शांत किया | अंत में महर्षि भृगु बैकुंठ पहुचे | वहां भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की गोद में सर रखकर विश्राम कर रहे थे और योगनिद्रा में थे | महर्षि भृगु को लगा कि भगवान विष्णु उन्हें आया देखकर भी जानबूझकर सोने का नाटक कर रहे हैं और उनका स्वागत नहीं कर रहे हैं | क्रोध में आकर महर्षि भृगु ने सीधे जाकर भगवान विष्णु की छाती पर एक जोरदार लात मार दी | भगवान विष्णु तुरंत उठे और क्रोधित होने के बजाय शांत रहे और भगवान विष्णु ने भृगु ऋषि के चरण पकड लिए और उन्हें सहलाते हुए कहा ऋषिवर आपके पैरों को चोट तो नहीं आई | भगवान विष्णु की इस असीम सहनशीलता और विनम्रता देखकर भृगु ऋषि की आँखों में आंसू आ गए और भृगु ने भगवान विष्णु को त्रिदेवों में सबसे श्रेष्ठ और पूजनीय घोषित किया | रहीम यही कह रहे हैं कि हरि का क्या घट गया अगर भृगु ने लात मार दी | और उलटे विष्णु को त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ स्थान का अधिकारी बना दिया |
देश के प्रधानमन्त्री जी ने सचमच में दिल बड़ा रखते हुए वही किया जो एक जिम्मेदार , महान व्यक्तित्व से अपेक्षा की जाती है | इन असभ्य और तथाकथित भटके युवाओं का कैरियर न खराब हो और देश का एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें इसके लिए प्रधानमंत्री जी की जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है | ऐसा करके प्रधानमंत्री जी ने देश के उन करोड़ों युवाओं के दिल में फिर से जगह बना ली है जो वर्षों से परीक्षाओं के पेपर लीक से आक्रोशित थे | युवा भी यह ध्यान में रखें कि भविष्य में अपने वाजिब आंदोलनों में पर्याप्त संयम रखें अन्यथा द्वापर का भी उद्धरण हमारे सामने है जब भगवान श्रीकृष्ण ने ,शिशुपाल की सौ गालियों को क्षमा कर दिया था मगर एकसौएक वीं गाली मिलने पर अधर्म को और न सहते हुए शिशुपाल का सुदर्शन चक्र से तुरंत भरी सभा में वध भी कर दिया था |