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    Homeसाहित्‍यकवितागंगा मैया की पुकार

    गंगा मैया की पुकार


    अस्थियां प्रवाहित होती थी मुझमें,
    अब लाशे निरंतर बहती है मुझमें।
    और अब कितने पाप धोऊ सबके,
    ये गंगा मैया कह रही है हम सबको।

    जिस देश में पवित्र गंगा बहती है,
    अब पवित्र गंगा में लाशे बहती है।
    कैसा बुरा समय अब आ गया है,
    जब मुर्दों की बुरी गति होती है।।

    थक गई हूं मै पापियों के पाप धोते धोते,
    बचा लो तुम मुझको कह रही रोते रोते।
    करा अपवित्र जल शवों को तुमने बहाकर,
    क्या करोगे मेरे,अपवित्र जल में नहाकर।।

    आई थी मै शिव की जटाओं से निकलकर,
    कर दिया भागीरथ के प्रयासों को निष्फल।
    होगा नहीं भला भी तुम्हारा ऐसे कुकर्म करके
    बन्द करो डालना शवो को मेरे जल में डालके।।

    कर रहे है मैली मुझको,गंदे नाले मुझमें डालकर,
    और क्यों मैली कर रहे हो मुझमें शव बहाकर।
    ले लूंगी मै भी बदला जब मुझमें बाढ़ आएगी,
    बह जाओगे जब तुम तब तुमको अक्ल आएगी।।

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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