बिरसा मुंडा आज भी प्रासंगिक हैं 

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ललित गर्ग  भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे क आदिवासी नेता और लोकनायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती ही… Read more »

हिन्दी गजल और दुष्यंत कुमार

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हिन्दी गजल और दुष्यंत कुमार डॉ.सौरभ मालवीय हिन्दी गजल हिन्दी साहित्य की एक नई विधा है. नई विधा इसलिए है, क्योंकि गजल मूलत फारसी की काव्य विधा है. फारसी से यह उर्दू में आई. गजल उर्दू भाषा की आत्मा है. गजल का अर्थ है प्रेमी-प्रेमिका का वार्तालाप. आरंभ में गजल प्रेम की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त… Read more »

बालकवि बैरागी: बुझ गया ‘दीवट का दीप’ 

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ललित गर्ग दीये की बाती जलती है तब सबको उजाले बांटती है। बीज उगता है तब बरगद बन विश्राम लेता है। समन्दर का पानी भाप बन ऊंचा उठता है तब बादल बन जमीं को तृप्त करने बरसता है। ऐसे ही लाखों-लाखों रचनाकारों की भीड़ में कोई-कोई रचनाकार जीवन-विकास की प्रयोगशाला मेें विभिन्न प्रशिक्षणों से गुजरकर… Read more »

बिन पंची और सरपंची केला देवी की महिला उत्थान सेवा

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मुफीद खान हरियाणा के सबसे पिछड़े जिलों में से एक जिला नूह मेवात है, जहाँ पर 80 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय से है। नूह मेवात के पुन्हाना ब्लाक की ग्राम पंचायत रायपुर में केला देवी रहती हैं। आयु के 42 वसंत देख चुकी केला देवी पंचायत के किसी अधिकारिक पद से नहीं जुड़ी हैं पर… Read more »

डॉ. अंबेडकर और उनका संविधान बनाने में योगदान

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देवेंद्रराज सुथार सूबेदार रामजी मालोजी सकपाल तथा भीमा बाई की चौदहवीं संतान, भारतीय संविधान के निर्माण के प्रमुख स्तंभ, वंचित समाज के मूकनायक, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विपरीत परिस्थितियों में समाज का असहयोग तथा तिरस्कार झेलते हुए तत्कालीन भारत के सबसे अधिक शैक्षणिक योग्यता (अर्थशास्त्र के दो विषयों से पी०एच०डी०) धारित करने वाले, दलितों के… Read more »

डॉ आंबेडकर और उनका वैज्ञानिक चिंतन

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आंबेडकर जयंती पर विशेष संजीव खुदशाह अक्सर डॉ आंबेडकर को केवल दलितों का नेता कहकर संबोधित किया जाता है। ऐसा संबोधित किया जाना दरअसल उनके साथ ज्यादती किया जाने जैसा है। ऐसा कहते समय हम भूल जाते हैं कि उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की थी। हम भूल जाते हैं कि उन्होंने हीराकुंड जैसा विशाल बांध का निर्माण समेत दामोदर घाटी परियोजना और सोन नदी परियोजना जैसे… Read more »

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत : बाबासाहब आंबेडकर

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-डॉ. सौरभ मालवीय सामाजिक समता, सामाजिक न्याय, सामाजिक अभिसरण जैसे समाज परिवर्तन के मुद्दों को प्रमुखता से स्वर देने और परिणाम तक लाने वाले प्रमुख लोगों में डॊ. भीमराव आंबेडकर का नाम अग्रणीय है. उन्हें बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है. एकात्म समाज निर्माण, सामाजिक समस्याओं, अस्पृश्यता जैसे सामजिक मसले पर उनका मन… Read more »

सरल नहीं है उपासने हो जाना

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मनोज कुमार एक पत्रकार से एक सम्पादक हो जाना बहुत कठिन नहीं है लेकिन एक सम्पादक से किसी महनीय विश्वविद्यालय का कुलपति हो जाना मुश्किल सा था. और इस मुश्किल को बड़ी ही सहजता से जिसने पाया उसका नाम है जगदीश उपासने. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के  कुलपति बनाये जाने पर… Read more »

एक विलक्षण संपादकः जगदीश उपासने

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 माखनलाल विश्वविद्यालय के नए कुलपति का है हिंदी पत्रकारिता में खास योगदान -संजय द्विवेदी    मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल के कुलपति के रूप में जब ख्यातिनाम पत्रकार श्री जगदीश उपासने का चयन हो चुका है, तब यह जानना जरूरी… Read more »

स्टीफन हाॅकिंग-ब्रह्माण्ड के खोजी, ब्रह्माण्ड में विलीन

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प्रमोद भार्गव आजीवन जिद और जिवटता के साथ ब्रह्माण्ड के रहस्यों को खंगालने में लगे रहे महान भौतिकी के वैज्ञानिक स्टीफन हाॅकिंग आखिरकार पंच-तत्वों से बने ब्रह्माण्ड में ही विलीन हो गए। 22 साल की उम्र में असाध्य बीमारी से ग्रस्त और बोलने से लाचार होने के बावजूद स्टीफन 55 साल तक मौलिक अनुसंधानों से… Read more »