आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया

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आज हिन्दी दिवस पर- मनमोहन कुमार आर्य आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन्  1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान… Read more »

शैक्षिक परिदृष्य में विस्थापित होती हिन्दी

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प्रमोद भार्गव वर्तमान वैष्विक परिदृष्य में हिन्दी अनेक विरोधाभासी स्थितियों से जूझ रही है। एक तरफ उसने अपनी ग्राह्यता तथा तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध करके वैष्विक विस्तार पाया है और वह दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। इसीलिए यह जनसंपर्क और बाजार की उपयोगी भाषा बनी हुई है।… Read more »

हिंदी का राजनैतिक व मानसिक विरोध ?

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   मृत्युंजय दीक्षित हिंदी भारत की सबसे अधिक प्राचीन,सरल, लचीली ,लोकप्रिय व सीखने में आसान भाषा है। हिंदी का इतिहास भी बहुत ही प्राचीन है। हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। इसलिये यह भाषा देवनागरी लिपि भी कही जाती है। देवनागरी में 11 स्वर और 33 व्यंजन भी होते हंै।  हिंदी भाषा का अब… Read more »

हिन्दी दिवस आने को है

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सितम्बर का महीना शुरू हो चुका है,हिन्दी दिवस आने कोहै। हम ज़ोर शोर से हिन्दी दिवस मनायेंगे कुछ भाषण होंगे कुछ सैमिनार होंगे और हिन्दी जहाँ है वहीं खड़ी रह जायेगी। हम हिन्दी को आज तक वो स्थान नहीं दे पाये जो उसको मिलना चाहिये था। हम कारणो की खोज न करके एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे और कुछ नहीं।… Read more »

विश्व हिन्दी दिवस का हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा 10 जनवरी का दिन विश्व हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाना हर उस भारतवासी के लिए गौरव का विषय है, जो अपनी हिन्दी भाषा से सच्चा प्रेम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता, अपनी मातृभूमि और अपनी मातृभाषा से प्राकृतिक रुप से प्रेम होता है। इसे जताने की आवश्यकता नहीं… Read more »

हिंदी विलाप: हक़ीक़त या पाखंड ?

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तनवीर जाफ़री     प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी विगत 14 सितंबर को उत्तर भारत में कई सरकारी व ग़ैर सरकारी विभागों,संस्थानों व संगठनों द्वारा हिंदी दिवस मनाए जाने की औपचारिकताएं पूरी करने के समाचार सुनाई दिए। सोशल मीडिया पर हिंदी दिवस एक-दूसरे को बधाईयां देकर मनाया गया। तमाम हिंदी प्रेमियों ने अपने देश… Read more »

महज़ औपचारिकता मत निभाओ… रोज हिंदी दिवस मनाओ !!!

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इंदु सिंह “इन्दुश्री’ ●●●——————————– भाषा नहीं ‘माँ’ हैं हम सबकी ‘हिंदी’ तो पहचान हैं हम सबकी ‘देवनागरी’ से बनी शान हम सबकी वर्णमाला ऐसी कि रगों में बस जाये हमारी तभी तो वो आन हैं हम सबकी ॥ ————————————●●● ‘हिंदी’ हैं हम वतन हैं… हिंदुस्तान हमारा… सिर्फ़ शब्द नहीं हमारी मातृभूमि का जयघोष हैं… जो… Read more »

हे हिन्दी के जननी………..

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रंजना झा हे हिन्दी के जननी: हे हिन्दी के जननी तुमको शत् शत् प्रणाम । तुम दिव्य हो,शक्ति हो,प्रखर हो । नितान्त मार्ग प्रशस्त करना ही होगा । तुम शुद्ध हो,प्रबल हो ,मृदु हो तुम्हें अविरल आगे आना ही होगा । तुम मातृतव हो, यशस्वी हो ,भारती हो । तुम्हें गनन तक ले जाना ही… Read more »

हिंदी दुनिया की जरूरत है

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी भाषा के बारे में कहा जाता है कि वह स्व प्रवाहित होती है, आप चाहकर भी उसे रोक नहीं सकते । विश्व में कोई नहीं जिसका कार्य भाषा बिना चलता हो । मनुष्य की बात एक बार को छोड़ भी दीजिए तो पशु, पक्षी, कीट और पतंग भी अपने स्तर पर किसी… Read more »

स्वाधीन चेतना की भाषा हिन्दी की उपेक्षा क्यों?

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मनोज कुमार हिन्दी को लेकर भारतीय मन संवेदनशील है लेकिन उसका गुजारा अंग्रेजी के बिना नहीं होता है। सालों गुजर गए हिन्दी को राष्ट्रभाषा का मान दिलाने का प्रण ठाने लेकिन हिन्दी आज भी बिसूरती हुई अपनी हालत पर खड़ी है। हर साल सितम्बर का महीना हिन्दी के नाम होता है और बाकि के 11… Read more »