बच्चों का पन्ना जलेबी April 14, 2013 / April 14, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment करना नहीं बहाना बापू| आज जलेबी लाना बापू|| रोज सुबह कह कर जाते हैं, आज जलेबी ले आयेंगे| दादा दादी अम्मा के संग, सभी बैठ मिलकर खायेंगे| किंतु आपकी बातों में अब, दिखता नहीं ठिकाना बापू| आज जलेबी लाना बापू|| इसी जलेबी में अम्मा की, बीमारी का राज छुपा है| जब तक खाई गरम जलेबी, […] Read more » जलेबी
बच्चों का पन्ना माल खाऒ April 9, 2013 / April 9, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment चुहिया रानी रोज बनाती, लौकी की तरकारी| कहती है इसके खाने से, दूर हटे बीमारी| पर चूहे को बीमारों का, भोजन नहीं सुहाता| कुतर कुतर कर आलू गोभी, बड़े प्रेम से खाता| उल्टी सीधी सीख जमाने, की न उसको भाती| झूठ कभी न बोला करता, सच्ची बात सुहाती| बजा बजा डुगडुगी रोज वह, लोगों को […] Read more »
बच्चों का पन्ना इतिहासों में लिख जाती है April 2, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 2 Comments on इतिहासों में लिख जाती है यदि डरे पानी से तो फिर, कैसे नदी पार जाओगे| खड़े रहे नदिया के तट पर, सब कुछ यहीं हार जाओगे| पार यदि करना है सरिता, पानी में पग रखना होगा| किसी तरह के संशय भय से, मुक्त हर तरह रहना […] Read more »
बच्चों का पन्ना सूरज भैया March 24, 2013 / March 23, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment अम्मा बोली सूरज भैया जल्दी से उठ जाओ| धरती के सब लोग सो रहे जाकर उन्हें उठाओ|| मुर्गे थककर हार गये हैं कब से चिल्ला चिल्ला| निकल घोंसलों से गौरैयां मचा रहीं हैं हल्ला|| तारों ने मुँह फेर लिया है तुम मुंह धोकर जाओ|| धरती के सब लोग सो रहे जाकर उन्हें उठाओ|| पूरब के […] Read more » सूरज भैया
बच्चों का पन्ना भालू की हज़ामत March 23, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बाल हुये जब बड़े बड़े,बूढ़े भालू चाचा के| गुस्से के मारे चाची ,उनको बोलीं चिल्लाके|| बाल कटाने सियारनाई के ,घर क्यों न जाते हो? बागड़ बिल्ला बने घूमते, ,फिरते इतराते हो|| भालू बोला सियार नाई ने, भाव कर दिये दूने| साठ रुपये देने में बेगम,जाते छूट पसीने|| इतनी ज्यादा मंहगाई है ,रुपये कहां से लाऊं? […] Read more » भालू की हज़ामत
बच्चों का पन्ना बाबू गधाराम March 23, 2013 / March 23, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment एक गधे को मिली नौकरी, दफ्तर के बाबू की| सबसे अधिक कमाऊ थी जो, वह कुर्सी काबू की| काम कराने के बद्ले वे, जमकर रिश्वत लेते| जितना खाते उसमें से, आधा अफसर को देते| अफसर भालूराम मजे से, सभी काम कर देता| बाबू गधाराम था उसका, सबसे बड़ा चहेता| रोज मजे से […] Read more » बाबू गधाराम
बच्चों का पन्ना भालू का रसगुल्ला March 23, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment भालू चाचा मचा रहे थे, सुबह सुबह से हल्ला| शेर चुराकर भाग गया था, उनका एक रसगुल्ला| सभी जानवर भाग दौड़कर, पकड़ शेर को लाये| मुश्किल से रसगुल्ला, भालूजी को दिलवा पाये| हाथ जोड़कर तभी शेर ने, सबसे मांगी माफी| ” कभी न अब आगे से होगी, हमसे ये गुस्ताखी|” […] Read more »
बच्चों का पन्ना थाने में शेरू भाई March 18, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 2 Comments on थाने में शेरू भाई शेर चचा की नियुक्ति हो गई, वाहन चालक के पद पर। तेज तेज’ बस ‘लगे चलाने, दिल्ली कलकत्ता पथ पर। तीन बार सिगनल को तोड़ा, चार हाथियों को रौंधा। डर के मारे बीच सड़क पर, भालू गिरा, हुआ औंधा। विसिल बजाकर किसी तरह से, चूहे ने ‘बस’ रुकवाई। उसी समय पर दौड़े आये, […] Read more » थाने में शेरू भाई
बच्चों का पन्ना दूध गरम March 11, 2013 / March 11, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बैठा लाला भारी भरकम, चिल्लाता पीलो दूध गरम| एक सड़क किनारे पट्टी में, है रखा कड़ाहा भट्टी में| भर भर गिलास पिलवाता है, वह केवल पाँच रुपट्टी में| देता समान आदर सबको, थोड़ा ज्यादा न थोड़ा कम| चिल्लाता पीलो दूध गरम| कई युवक युवतियाँ आते हैं, वे लंबी लाइन लगाते हैं| दादा दादी नाना नानी, […] Read more » दूध गरम
बच्चों का पन्ना समाज प्रतिभा या प्रदर्शन March 8, 2013 / March 8, 2013 by बीनू भटनागर | 4 Comments on प्रतिभा या प्रदर्शन प्रतिभा हो तो उसका प्रदर्शन भी होना चाहिये ‘’आपहि नाचे आपहि देखे’’ का क्या फायदा ? परन्तु प्रतिभा का प्रदर्शन कब हो, कहाँ हो, किस स्तर पर हो यह जानना और समझना बहुत ज़रूरी है। किसी बच्चे मे बचपन मे कोई प्रतिभा दिखते ही कुछ अति उत्साहित माता पिता उसे प्रदर्शन के लियें तैयार करने […] Read more »
बच्चों का पन्ना सजा March 2, 2013 / March 2, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 3 Comments on सजा एक दिन अप्पू की कापी को, गधेपुत्र ने फाड़ दिया| क्रोधित हाथी के बच्चे ने, जंगल पूर्ण उजाड़ दिया| बड़े गुरूजी भालूजी ने, गधेपुत्र को बुलवाया| उसको दंड स्वरूप वहीं पर, झटपट मुरगा बनवाया| बोला अगर किसी बच्चे ने, फाड़ी या गूदी कापी| कड़ा दंड हम देंगे उसको, नहीं मिलेगी फिर माफी| तब से लेकर […] Read more »
बच्चों का पन्ना पता नहीं क्यों February 26, 2013 / February 26, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 4 Comments on पता नहीं क्यों हाथी घोड़े बंदर भालू, की कवितायें मुझे सुहातीं। पता नहीं क्यों अम्मा मुझको , परियों वाली कथा सुनाती। मुझको यह मालूम पड़ा है, परियां कहीं नहीं होतीं हैं। जब सपने आते हैं तो वे, पलकों की महमां होती हैं। पर हाथी भालू बंदर तो, सच में ही कविता पड़ते हैं। कविता में मिल […] Read more »