धर्म-अध्यात्म मांसाहार और मनुस्मृति June 16, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य प्राचीन काल में भारत में मांसाहार नहीं होता था। महाभारतकाल तक भारत की व्यवस्था ऋषि मुनियों की सम्मति से वेद निर्दिष्ट नियमों से राजा की नियुक्ति होकर चली जिसमें मांसाहार सर्वथा वर्जित था। महाभारतकाल के बाद स्थिति में परिवर्तन आया। ऋषि तुल्य ज्ञानी मनुष्य होना समाप्त हो गये। ऋषि जैमिनी पर आकर […] Read more » मनुस्मृति मांसाहार
धर्म-अध्यात्म सार्वभौम मानव धर्म का स्वरूप June 16, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में कुछ सहस्र वर्ष पूर्व कई महापुरुषों द्वारा चलाये गये अनेक मत, पन्थ व सम्प्रदाय अस्तित्व में हैं जो अपने आपको धर्म की संज्ञा देते हैं। क्या कोई मनुष्य व महापुरुष बिना किसी पूर्व धर्म व मत की सहायता के कोई नया मत व पन्थ चला सकता है? इसका उत्तर न […] Read more » मानव धर्म सार्वभौम
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज के यशस्वी विद्वान एवं उपदेशक पण्डित धर्मपाल शास्त्री June 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य देहरादून के एक गुरुकुल श्रीमद् दयानन्द आर्ष ज्योतिमठ गुरुकुल के वार्षिकोत्सव के अवसर पर 31 मई, 2015 को अपने पुराने परिचित आर्य विद्वान श्री धर्मपाल शास्त्री जी से हमारी भेंट हुई। 84 वर्षीय श्री धर्मपाल जी वर्षों पूर्व देहरादून में आर्यसमाज के पुरोहित रहे हैं। यद्यपि सन् 1970 में इन पंक्तियों क […] Read more » आर्यसमाज उपदेशक पण्डित धर्मपाल शास्त्री यशस्वी
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म प्राचीन कालीन शैव अर्थात पाशुपत सम्प्रदाय May 29, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment (जीव पशु एवं शिव हैं पति) -अशोक “प्रवृद्ध” प्राचीन काल में मूल शैव सम्प्रदाय पाशुपत सम्प्रदाय कहलाता था। वे शिव को ही कर्ता- धर्ता समझते थे। इस मत के मानने वाले शिव को पति मानते थे और जीव को पशु। शिवजी पशुओं के पति हैं ऐसा उनको विश्वास है। शिवजी ही उन्हें इस संसार के […] Read more » पाशुपत सम्प्रदाय शैव
धर्म-अध्यात्म विष्णुलाल शर्मा द्वारा ऋषि दयानन्द के दर्शन का वृतान्त May 28, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment . पं. विष्णुलाल शर्मा उत्तर प्रदेश में अवकाश प्राप्त सब जज रहे। स्वामी दयानन्द जब बरेली आये तब वहां 11 वर्ष की अवस्था में पं. विष्णुलाल शर्मा जी ने उनके दर्शन किए थे। उन्होंने इसका जो प्रमाणित विवरण स्वस्मृति से लेखबद्ध किया उसका वर्णन कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि श्री स्वामी दयानन्द जी […] Read more » ऋषि दयानन्द विष्णुलाल शर्मा
धर्म-अध्यात्म शहीद भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुन सिंह और ऋषि दयानन्द May 28, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment देश की गुलामी को दूर कर उसे स्वतन्त्र कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद भगत सिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह और दादा का नाम सरदार अर्जुन सिंह था। सरदार अर्जुन सिंह जी ने महर्षि दयानन्द के साक्षात दर्शन किये थे और उनके श्रीमुख से अनेक उपदेशों को भी […] Read more » ऋषि दयानन्द सरदार अर्जुन सिंह
धर्म-अध्यात्म ईश्वर ने मुझे मनुष्य क्यों बनाया? May 28, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मैं मनुष्य हूं और मुझे मनुष्य व पुरुष जाति में यह जन्म मेरे माता-पिता से प्राप्त हुआ है। मेरे जन्म को लगभग 64 वर्ष हो गये परन्तु आज पहली बार मेरे मन में यह प्रश्न उठा कि इस बात पर भी विचार करूं कि ईश्वर ने मुझे मनुष्य और वह भी पुरुष […] Read more » ईश्वर ने मुझे मनुष्य क्यों बनाया
धर्म-अध्यात्म शख्सियत सद्धर्म प्रचारक वैदिक विद्वान महाशय चिरंजीलाल ‘प्रेम’ May 27, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द की जीवन ज्योति ने देश में अनेक नये जीवन दीपों को प्रज्जवलित किया था जिसका परिणाम धार्मिक और सामाजिक क्रान्ति सहित देश की परतन्त्रता के निवारण के रूप में सामने आया। अन्य अनेक कार्य भी महर्षि दयानन्द द्वारा वेदों के ज्ञान के प्रचार से देश में सम्पन्न हुए जिससे वैदिक […] Read more » महाशय चिरंजीलाल ‘प्रेम’ वैदिक विद्वान सद्धर्म प्रचारक
धर्म-अध्यात्म क्या इस सृष्टि को बनाने वाला कोई ईश्वर है? May 27, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य क्या वस्तुतः ईश्वर है? यह प्रश्न वेद और वैदिक साहित्य से अपरिचित प्रायः सभी मनुष्यों के मन व मस्तिष्क में यदा कदा अवश्य उत्पन्न हुआ होगा। संसार में अपौरुषेय कार्यों, सूर्य सहित समस्त ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, उसके संचालन, मनुष्य आदि प्राणियों की उत्पत्ति सहित कर्मफल व्यवस्था व सुख-दुःख आदि को देखकर ईश्वर […] Read more » ईश्वर क्या इस सृष्टि को बनाने वाला कोई ईश्वर है?
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म जानिए पुष्यामृत योग, पुष्य नक्षत्र का महत्त्व, लाभ और प्रभाव :– May 27, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | 1 Comment on जानिए पुष्यामृत योग, पुष्य नक्षत्र का महत्त्व, लाभ और प्रभाव :– भारतीय ज्योतिष और संस्कृति में संतुष्टि एवम् पुष्टिप्रदायक पुष्य नक्षत्र का वारों में श्रेष्ट बृहस्पतिवार (गुरुवार ) से योग होने पर यह अति दुर्लभ ” गुरुपुष्यामृत योग’ कहलाता है । ‘ सर्वसिद्धिकरः पुष्यः । ‘ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है ।। शुभ, मांगलिक कर्मों के संपादनार्थ गुरुपुष्यामृत योग वरदान सिद्ध होता है […] Read more » पुष्य नक्षत्र का महत्त्व पुष्यामृत योग
धर्म-अध्यात्म गीता सार और वैदिक धर्म May 24, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य गीता का सार प्रस्तुत करते हुए एक बात यह भी कही जाती है कि गीता के अनुसार मनुष्यों को ‘सभी प्रकार की आसक्ति को छोड़कर और सफलता-असफलता को समान समझकर अपना कर्तव्य करना चाहिए। यही कर्मयोग है। अपने धर्म में भले ही कुछ कमियां हों, फिर भी वह दूसरों के धर्म से […] Read more » गीता सार वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म आर्य कवि श्री वीरेन्द्र राजपूत और उनकी साहित्य साधना May 24, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, श्री वीरेन्द्र कुमार राजपूत हिन्दी भाषा के कवि हैं जिन्होंने वैदिक साहित्य व कुछ आर्य वीर महापुरुषों पर अपनी काव्यमयी रचनायें की हैं। एक व्यक्ति ईश्वर प्रदत्त अपनी प्रतिभा को जानकर कितना कार्य कर सकता है, इसका ज्ञान उनकी कृतियों से होता है। यदि वह कविता के क्षेत्र मे न आते तो […] Read more » आर्य कवि आर्य कवि श्री वीरेन्द्र राजपूत श्री वीरेन्द्र राजपूत साहित्य साधना