अशोक “प्रवृद्ध”

बाल्यकाल से ही अवकाश के समय अपने पितामह और उनके विद्वान मित्रों को वाल्मीकिय रामायण , महाभारत, पुराण, इतिहासादि ग्रन्थों को पढ़ कर सुनाने के क्रम में पुरातन धार्मिक-आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक विषयों के अध्ययन- मनन के प्रति मन में लगी लगन वैदिक ग्रन्थों के अध्ययन-मनन-चिन्तन तक ले गई और इस लगन और ईच्छा की पूर्ति हेतु आज भी पुरातन ग्रन्थों, पुरातात्विक स्थलों का अध्ययन , अनुसन्धान व लेखन शौक और कार्य दोनों । शाश्वत्त सत्य अर्थात चिरन्तन सनातन सत्य के अध्ययन व अनुसंधान हेतु निरन्तर रत्त रहकर कई पत्र-पत्रिकाओं , इलेक्ट्रोनिक व अन्तर्जाल संचार माध्यमों के लिए संस्कृत, हिन्दी, नागपुरी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओँ में स्वतंत्र लेखन ।

मथुरा में कृष्ण जन्मस्थली से मस्जिद हटाने के लिए याचिका दायर

–अशोक “प्रवृद्ध” राम लला को सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने और अयोध्या में श्रीराम मन्दिर…

एकात्म मानववाद के प्रवर्त्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय

–अशोक “प्रवृद्ध” एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा जीवनपर्यंन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा को…

नित्य नहीं, नैमित्तिक कर्म निन्द्य हैं अधिकमास में

–अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय पंचांग अर्थात कैलेंडर में सूर्यमास और चंद्रमास (चांद्रमास) दोनों पद्धति से गणना…

स्वामी अग्निवेश के निधन से देश के एक क्रांतिकारी पक्ष का अंत

–अशोक “प्रवृद्ध” सामाजिक कार्यकर्ता इकासी वर्षीय स्वामी अग्निवेश का शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित इंस्टिट्यूट…