अशोक “प्रवृद्ध”

बाल्यकाल से ही अवकाश के समय अपने पितामह और उनके विद्वान मित्रों को वाल्मीकिय रामायण , महाभारत, पुराण, इतिहासादि ग्रन्थों को पढ़ कर सुनाने के क्रम में पुरातन धार्मिक-आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक विषयों के अध्ययन- मनन के प्रति मन में लगी लगन वैदिक ग्रन्थों के अध्ययन-मनन-चिन्तन तक ले गई और इस लगन और ईच्छा की पूर्ति हेतु आज भी पुरातन ग्रन्थों, पुरातात्विक स्थलों का अध्ययन , अनुसन्धान व लेखन शौक और कार्य दोनों । शाश्वत्त सत्य अर्थात चिरन्तन सनातन सत्य के अध्ययन व अनुसंधान हेतु निरन्तर रत्त रहकर कई पत्र-पत्रिकाओं , इलेक्ट्रोनिक व अन्तर्जाल संचार माध्यमों के लिए संस्कृत, हिन्दी, नागपुरी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओँ में स्वतंत्र लेखन ।

मानसून की बेरुखी से खरीफ की बुआई में विलम्ब होने से कृषक चिंतित

-अशोक “प्रवृद्ध” कृषि कार्य ही नहीं वरन देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानी जाने वाली मानसूनी बारिश के...

वैदिक मंत्रों में ही निहित होते हैं मंत्र देवता का नाम अर्थात विषय

-अशोक “प्रवृद्ध”वैदिक मतानुसार जिसे शब्दों में वर्णन किया जा सके, उसे पदार्थ कहा जाता है, और दिव्य गुण युक्त पदार्थ...

चरमराने लगी है कोरोना काल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था

-अशोक “प्रवृद्ध” भारत के शहरी क्षेत्रों को प्रभावित करने के बाद वैश्विक कोरोना महामारी ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में भयंकर...

श्रीराम भक्त हनुमान के जन्म स्थान पर विवाद चरम पर

-अशोक “प्रवृद्ध” शक्ति, भक्ति, आस्था, बल, बुद्धि, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों और अपना सम्पूर्ण जीवन...

कुतुबमीनार है चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य कालीन खगोलविद वराहमिहिर का विष्णु स्तंभ

-अशोक “प्रवृद्ध” अयोध्या में श्रीराम लला को न्याय मिलने और मथुरा में श्री कृष्ण को न्याय दिलाने की लड़ाई न्यायालय...

पलायन व बेरोजगारी कमेगा ग्रामीण व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने से

-अशोक “प्रवृद्ध” झारखण्ड सहित देश के अधिकांश राज्यों में ग्रामीण व लघु उद्योगों के माध्यम से आजीविका संवर्द्धन के अनेकानेक...

व्यापक बदलाव आया है हिन्दू धर्म में

-अशोक “प्रवृद्ध” वर्तमान में मांसाहारी होना, राम, कृष्ण, साईं जैसे मनुष्यों को भगवान मानकर पूजन करना, जाति, घूंघट व पर्दा...

समान नागरिक संहिता से ही संभव है सबका साथ सबका विकास

-अशोक “प्रवृद्ध” संसार के किसी भी देश में पन्थ, मजहब के आधार पर पृथक- पृथक कानून नहीं होते, बल्कि सभी...

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