धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाले अन्य मतों के अनुयायी February 29, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द पौराणिक माता-पिता की सन्तान थे जिन्होंने सत्य की खोज की और जो सत्य उन्हें प्राप्त हुआ उसे अपनाकर उन्होंने अपनी पूर्व मिथ्या आस्थाओं व सिद्धान्तों का त्याग किया। सत्य ही एकमात्र मनुष्य जाति की उन्नति का कारण होता है, अतः उन्होंने सत्य को न केवल अपने जीवन में स्थान दिया […] Read more » वैदिक धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाले अन्य मतों के अनुयायी
धर्म-अध्यात्म मनुष्य व उसके कुछ प्रमुख कर्तव्य February 27, 2016 / February 29, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य किसे कहते हैं? इसका उत्तर है कि मननशील व्यक्ति को मनुष्य कहते हैं। मननशाल क्यों होना है, इसलिये कि हम सत्य को जान सके। सत्य को जानकर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि हमें जो दुःख प्राप्त होता है वह दूसरों के हमारे प्रति अनुचित व्यवहार के कारण ही प्रायः […] Read more » मनुष्य व उसके कुछ प्रमुख कर्तव्य
धर्म-अध्यात्म सृष्टि विज्ञान, वैदिक साहित्य और स्वामी दयानन्द February 26, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़े अनेक रहस्य हैं जिन्हें विज्ञान आज भी खोज नहीं पाया अथवा जिसका विज्ञान जगत व हमारे धार्मिक व सामाजिक लोगों का यथोचित ज्ञान नहीं है। महर्षि दयानंद सत्य-ज्ञान के जिसाज्ञु थे। उन्होंने धर्म-समाज-ज्ञान-विज्ञान किसी भी पक्ष की उपेक्षा न कर सभी विषयों का यथोचित ज्ञान प्राप्त […] Read more » वैदिक साहित्य और स्वामी दयानन्द सृष्टि विज्ञान
धर्म-अध्यात्म पाखण्ड खण्डिनी पताका, सद्धर्म प्रचार और महर्षि दयानन्द February 25, 2016 / February 25, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य किसी भी विषय में सत्य का निर्धारण करने पर सत्य वह होता है जो तर्क व युक्ति के आधार पर सिद्ध हो। दो संख्याओं 2 व 3 का योग 5 होता है। तर्क व युक्ति से यही उत्तर सत्य सिद्ध होता है। अतः 2 व 3 का योग 4 या 6 अथवा […] Read more » पाखण्ड खण्डिनी पताका सद्धर्म प्रचार और महर्षि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म सृष्टिकर्त्ता ईश्वर प्रदत्त वैदिक धर्म सभी मनुष्यों का परमधर्म February 24, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य अग्नि आदि किसी पदार्थ के जलना, प्रकाश व गर्मी देना आदि गुणों को उसका धर्म कहा जाता है। मनुष्यों में जिन श्रेष्ठ गुणों को होना चाहिये उनका मनुष्यों में संस्कार व उन गुणों की उन्नति सहित तदनुसार आचरण को ही मनुष्यों का धर्म कह सकते हैं। किसी आचार्य व विद्वान द्वारा सत्यासत्य […] Read more » सृष्टिकर्त्ता ईश्वर प्रदत्त वैदिक धर्म सभी मनुष्यों का परमधर्म
धर्म-अध्यात्म अग्निहोत्र यज्ञ से अनेक लाभ व इसके कुछ पक्षों पर विचार February 24, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य प्रतिदिन प्रातः व सायं अग्निहोत्र करने का विधान वेदों में है। वेद के इन मन्त्रों को महर्षि दयानन्द ने अपनी पंचमहायज्ञ विधि में प्रस्तुत किया है। यहीं से यज्ञ व अग्निहोत्र परम्परा का आरम्भ हुआ। वेद के मन्त्र ‘ओ३म् समिधाग्निं दुवस्यत घृतैर्बोधयतातिथिम्। आस्मिन् हव्या जुहोतन स्वाहा।। इदमग्नयेे-इदन्न मम।।’ में कहा गया है […] Read more » अग्निहोत्र यज्ञ से अनेक लाभ
धर्म-अध्यात्म सूक्ष्म ईश्वर स्थूल न होने के कारण आंखों से दिखाई नहीं देता February 21, 2016 by मनमोहन आर्य | 5 Comments on सूक्ष्म ईश्वर स्थूल न होने के कारण आंखों से दिखाई नहीं देता मनमोहन कुमार आर्य संसार के अधिकांश लोग ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखते हैं और बहुत से ऐसे भी है जो ईश्ष्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखते। आंखों से दिखाई न देने के कारण वह ईश्वर की सत्ता से इनकार कर देते हैं। इन भाइयों को यह नहीं पता की सूक्ष्म पदार्थ आंखों से […] Read more » सूक्ष्म ईश्वर स्थूल न होने के कारण आंखों से दिखाई नहीं देता
धर्म-अध्यात्म शख्सियत आर्यसमाज के गगन मण्डल में चमकते नक्षत्र पं. चमूपति February 20, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द आर्यसमाज के संस्थापक व निर्माता हैं जिन्होंने ईश्वरीय ज्ञान वेदों की सत्य मान्यताओं, सिद्धान्तों व शिक्षाओं का जनसामान्य में प्रचार करने के लिए 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की थी। वस्तुतः आर्यसमाज संसार से अविद्या का नाश करने तथा विद्या की वृद्धि करने का […] Read more » Acharya Pandit Chamupati Featured आर्यसमाज के गगन मण्डल में चमकते नक्षत्र पं. चमूपति
धर्म-अध्यात्म ‘अनादि अविनाशी जीवात्मा कर्मानुसार जन्म-मरण-जन्म के चक्र अर्थात् पुनर्जन्म में आबद्ध’ February 20, 2016 / February 20, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य संसार में जन्म लेता है, अधिकतर 100 वर्ष जीवित रहता है और मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। जिस संसार व पृथिवी पर हम रहते हैं उसे हमने व हमारे पूर्वजों ने बनाया नहीं है अपितु उन्हें यह सृष्टि बनी बनाई मिली थी। इस संसार को किसने बनाया, इसका शास्त्र व […] Read more » अनादि अविनाशी जन्म-मरण-जन्म के चक्र जीवात्मा पुनर्जन्म में आबद्ध’
धर्म-अध्यात्म ‘वेद में पशु हत्या निषेध, पशु रक्षा का विधान और मांसाहार’ February 20, 2016 / February 20, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य अनेक अज्ञानी व स्वार्थी लोग बिना प्रमाणों के प्राचीन आर्यों पर मांसाहार का मिथ्या आरोप लगाते हैं। वह स्वयं मांसाहार करते हैं अतः समझते हैं कि इस आरोप को लगाकार उनका मांसाहार करना उचित ठहरा दिया जायेगा और कम से कम वेदों के मानने वाले आर्य तो उनका विरोध नहीं कर सकेंगे। […] Read more » पशु रक्षा का विधान पशु हत्या मांसाहार वेद में पशु हत्या निषेध
धर्म-अध्यात्म आत्मा को भुला देने से विश्व में अशान्ति आदि समस्त समस्यायें February 18, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्यों द्वारा अपनी आत्मा व शरीर में भेद न करने व आत्मा व शरीर को एक मान लेने के कारण ही विश्व में अशान्ति व नाना प्रकार की समस्यायें हैं। इन सबका हल यही है कि संसार के सभी मनुष्य आत्मा के यथार्थ स्वरूप को जानें। इसके लिए यह आवश्यक है कि […] Read more » आत्मा को भुला देने से विश्व में अशान्ति आदि समस्त समस्यायें
धर्म-अध्यात्म गृहस्थ आश्रम पर महर्षि दयानन्द के कुछ ग्राह्य विचार February 18, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द सिद्ध योगी और बाल ब्रह्मचारी थे। उन्होंने समस्त वेदों एवं वैदिक साहित्य का तलस्पर्शी अध्ययन किया था और अपनी ऊहापोह व तर्कणा शक्ति से उसका मन्थन कर सत्य व असत्य विचारों व मान्यताओं को पृथक-पृथक किया था। देश हित में उन्होंने वेदों का उद्धार व समाज सुधार के अनेकानेक कार्य […] Read more » गृहस्थ आश्रम पर महर्षि दयानन्द के कुछ ग्राह्य विचार