धर्म-अध्यात्म श्रद्धा की हो काँवड़ August 12, 2015 by विमलेश बंसल 'आर्या' | 1 Comment on श्रद्धा की हो काँवड़ विमलेश बंसल क्या आप जानते हो श्रावण मास में काँवड़ का क्या महत्व है? यह कांवड़ गंगोत्तरी से जल लाकर महादेव पर चढ़ाई जाती है आइये जानें – वर्षा ऋतु के 4 महीने चातुर्मास्य कहलाते हैं श्रावण मास मैं घनघोर बारिश के चलते आवाजाही ठप्प रहती है चारों और तालाब और गड्ढे पानी से […] Read more » काँवड़
धर्म-अध्यात्म मोक्ष मार्ग का प्रथम सोपान है स्वाध्याय August 7, 2015 / August 7, 2015 by कृष्ण कान्त वैदिक शास्त्री | 1 Comment on मोक्ष मार्ग का प्रथम सोपान है स्वाध्याय कृष्ण कान्त वैदिक शास्त्री सु$आङ् अधिपूर्वक इड्-अध्ययने धातु से स्वाध्याय शब्द बनता है। स्वाध्याय शब्द में सु, आ और अधि तीन उपसर्ग हैं। ‘सु’ का अर्थ है उत्तम रीति से ‘आ’ का अर्थ है आद्योपान्त और ‘अधि’ का अर्थ है अधिकृत रूप से। किसी ग्रन्थ का आरम्भ से अन्त तक अधिकारपूर्वक सर्वतः प्रवेश स्वाध्याय कहलाता […] Read more »
धर्म-अध्यात्म अविद्या दूर करने का एकमात्र उपाय वैदिक साहित्य का स्वाध्याय August 7, 2015 by मनमोहन आर्य | 3 Comments on अविद्या दूर करने का एकमात्र उपाय वैदिक साहित्य का स्वाध्याय मनुष्य की आत्मा के अल्पज्ञ होने के कारण इसके साथ अविद्या अनादि काल से जुड़ी हुई है। इसका एक कारण जीवात्मा का एकदेशी, ससीम, राग-द्वेष व जन्म-मरणधर्मा आदि होना भी है। ईश्वर सर्वव्यापक, निराकार, सर्वान्तर्यामी एवं सर्वज्ञ है। सर्वज्ञ का तात्पर्य है कि वह जानने योग्य सब कुछ जानता है। वह जीवों के कर्मों की […] Read more » अविद्या वैदिक साहित्य का स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म ‘महर्षि दयानंद एवं गुरुकुल शिक्षा प्रणाली’ August 6, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) ने प्रज्ञाचक्षु दण्डी गुरू स्वामी विरजानन्द सरस्वती, मथुरा से वैदिक आर्ष व्याकरण एवं वैदिक शास्त्रों का अध्ययन कर देश व संसार से अविद्या हटाने के लिए ईश्वरीय ज्ञान वेदों का प्रचार किया। उनके वेद प्रचार आन्दोलन का देश और समाज पर ही नहीं अपितु विश्व पर व्यापक प्रभाव पड़ा। वह […] Read more » ‘महर्षि दयानंद .गुरुकुल शिक्षा प्रणाली’
धर्म-अध्यात्म झारखण्ड के रामगढ़ का टूटी झरना शिवमंदिर August 6, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on झारखण्ड के रामगढ़ का टूटी झरना शिवमंदिर शिव की शक्ति और गंगा की भक्ति की अनूठी तस्वीर प्रस्तुत करता झारखण्ड के रामगढ़ का टूटी झरना शिवमंदिर -अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय पौराणिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण कथा गंगावतरण, जिसके द्वारा भारतवर्ष की धरती पवित्र हुई, में इक्ष्वाकु वंशीय दिलीप के पुत्र भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने गंगा की धारा […] Read more » झारखण्ड के रामगढ़ का टूटी झरना शिवमंदिर
धर्म-अध्यात्म विविधा दक्षिण भारत के संत (14) सन्त कुलशेखर अलवार August 6, 2015 by बी एन गोयल | Leave a Comment बी एन गोयल “हे भगवन मैं कब आप के दिव्य दर्शन कर सकूँगा। हे प्रभु राम, मैं अशांत हूँ । मुझे कब आप का अनुग्रह मिलेगा। मेरा मन भटकता रहता है। मैं कब इसे आप के चरण कमलों में लगा सकूँगा। मेरे मन में कब आप के प्रति निष्ठा जागेगी । मुझे कब आप […] Read more » दक्षिण भारत के संत सन्त कुलशेखर अलवार
धर्म-अध्यात्म जप व ध्यान से जीवात्मा के भीतर ही ईश्वर का प्रत्यक्ष होता है। August 5, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on जप व ध्यान से जीवात्मा के भीतर ही ईश्वर का प्रत्यक्ष होता है। ईश्वर को जानना व प्राप्त करना दो अलग-अलग बातें हैं। वेदों व वैदिक सहित्य में ईश्वर का ज्ञान व उसकी प्राप्ति के साधन बताये गये हैं। पहले ईश्वर के स्वरूप को जान लेते हैं और उसके बाद उपासना आदि साधनों पर चर्चा करेंगे। वेदों का स्वाध्याय साधारण अशिक्षित व अल्पशिक्षित मनुष्यों के लिए कुछ […] Read more » ईश्वर का प्रत्यक्ष होता है। जप व ध्यान से जीवात्मा के भीतर
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म व संस्कृति का उद्धारक, रक्षक व प्रचारक सत्यार्थ प्रकाश August 4, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार में समस्त धार्मिक ग्रन्थों में वेद के बाद सत्यार्थप्रकाश का प्रमुख स्थान है। इसका कारण इन दोनों ग्रन्थों का मनुष्य जीवन के लिए सर्वोपरि महत्व है। वेद ईश्वर प्रदत्त अध्यात्म व सांसारिक ज्ञान है। यह बताना आवश्यक है कि सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, निराकार, सर्वान्तर्यामी ईश्वर ने सृष्टि के आरम्भ में अमैथुनी सृष्टि कर […] Read more » रक्षक व प्रचारक सत्यार्थ प्रकाश वैदिक धर्म व संस्कृति का उद्धारक
धर्म-अध्यात्म सर्वव्यापक व सदा अवतरित होने से ईश्वर का अवतार नहीं होता August 3, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य भारत में मूर्तिपूजा का प्रचलन बौद्ध व जैन मत से आरम्भ हुआ है। बौद्ध मत के बढ़ते प्रभाव व वैदिक धर्म में ऋषियों व आप्त पुरूषों की कमी व अभाव के कारण अज्ञानता के कारण मूर्तिपूजा प्रचलन में आई है। रामायण एवं महाभारत काल में भारत में मूर्तिपूजा का प्रचलन नहीं था। […] Read more » ईश्वर का अवतार
धर्म-अध्यात्म ‘सब सत्य विद्याओं का दाता व अपौरूषेय पदार्थों का रचयिता परमेश्वर है’ August 3, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment जीवन में जानने योग्य कुछ प्रमुख सूत्रों की यदि चर्चा करें तो इनमें प्रथम ‘सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उनका सब का आदि मूल परमेश्वर है’ सिद्धान्त को सम्मलित किया जा सकता है। इस सिद्धान्त का संसार में जितना प्रचार अपेक्षित है, उतना नहीं हुआ। यह सूत्र महर्षि […] Read more » ‘सब सत्य विद्याओं का दाता अपौरूषेय पदार्थों का रचयिता परमेश्वर है’
धर्म-अध्यात्म त्रिकालदर्शी हमारा प्राण प्रिय ईश्वर August 1, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on त्रिकालदर्शी हमारा प्राण प्रिय ईश्वर हम अल्पज्ञ जीवात्मा हैं इस कारण हमारा ज्ञान अल्प होता है। ईश्वर जिसने इस सृष्टि को बनाया व इसका संचालन कर रहा है, वह हमारी तरह अल्पज्ञ नहीं अपितु सर्वज्ञ है। सर्वज्ञ का अर्थ होता है कि जिसे सब प्रकार का पूर्ण ज्ञान हो। जो अतीत के बारे में भी जानता हो, वर्तमान के बारे […] Read more »
धर्म-अध्यात्म शख्सियत समाज दक्षिण भारत के संत (13) सन्त माधवाचार्य (द्वैत सम्प्रदाय) July 31, 2015 by बी एन गोयल | 5 Comments on दक्षिण भारत के संत (13) सन्त माधवाचार्य (द्वैत सम्प्रदाय) बी एन गोयल राम मंत्र निज कर्ण सुनावा । परंपरा पुनि तत्व लखावा संप्रदाय विधि मूल प्रधाना । अधिकारी तहां महं हनुमाना । मध्य रूप सोई अवतरिया । मत अभेद जिन खंडन करिया॥ (नृत्य राघव मिलन – पृ0 45, रामसखे) ये पंक्तियाँ भक्त राम सखे की कृति ‘नृत्य राघव मिलन’ से हैं। भगवान […] Read more » दक्षिण भारत के संत द्वैत सम्प्रदाय सन्त माधवाचार्य