कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार विविधा श्री जगन्नथ रथयात्रा का भारतीय परम्परा में महत्व July 16, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment १७ जुलाई पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया को ओडिशा व गुजरात सहित देश के अनेकानेक हिस्सों में निकाली जाने वाली इस यात्रा का विशेष महत्व है। यह रथयात्रा मुख्यरूप से ओडिशा का सबसे बड़ा ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का पर्व है। इस दिन ओडिशा की सड़को पर तिल रखने की भी जगह […] Read more » श्री जगन्नथ रथयात्रा
धर्म-अध्यात्म आओ, सोम-सरोवर के भक्ति रस-जल में स्नान कर आनन्दित हों July 16, 2015 / July 16, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सामवेद उपासना तथा ईश्वर की स्तुति-गान का वेद है। उपासना ईश्वर के पास बैठकर आनन्द में सराबोर होना है। इसे सोम सरोवर का स्नान भी कह सकते हैं। पं. चमूपति महर्षि दयानन्द के आदर्श अनुयायी थे। वह उर्दू, अरबी, फारसी व अंग्रेजी के विद्वान होने के साथ संस्कृत व हिन्दी के भी विद्वान थे। आपने […] Read more » भक्ति रस
धर्म-अध्यात्म सबके लिये जीने का सुख? July 15, 2015 / July 15, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग खुशी एवं मुस्कान जीवन की एक सार्थक दिशा है। हर मनुष्य चाहता है कि वह सदा मुस्कुराता रहे और मुस्कुराहट ही उसकी पहचान हो। क्योंकि एक खूबसूरत चेहरे से मुस्कुराता चेहरा अधिक मायने रखता है, लेकिन इसके लिए आंतरिक खुशी जरूरी है। जीवन में जितनी खुशी का महत्व है, उतना ही यह महत्वपूर्ण […] Read more » सबके लिये जीने का सुख?
धर्म-अध्यात्म समाज दलित स्त्रियों के उत्थान में महर्षि दयानन्द का योगदान July 11, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द ने अपने जीवनकाल में देश में सर्वांगीण क्रान्ति की थी। वर्णाश्रम व्यवस्था में आये प्रदुषण को उन्होंने दूर किया। उन्होंने समाज में व्यवहृत जन्मना वर्णाश्रम वा जाति-व्यवस्था के दोषों को वेदों एवं वैदिक साहित्य के आधार पर युक्ति व तर्क के आधार पर व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया जो महाभारतकाल से पूर्व वैदिक […] Read more » दलित स्त्रियों के उत्थान महर्षि दयानन्द का योगदान
धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख दक्षिण भारत के संत (11) सन्त रामानुजाचार्य July 11, 2015 by बी एन गोयल | 1 Comment on दक्षिण भारत के संत (11) सन्त रामानुजाचार्य बी एन गोयल भक्ति, आस्था और अध्यात्म भारतीय मनीषा के स्थायी भाव हैं। भक्ति का समारंभ कब तथा कैसे हुआ, इस बारे में विद्वानों में काफी मतभेद है। साधु समाज में एक दोहा प्रचलित है। भक्ति द्रविड़ ऊपजी, लाये रामानन्दा । परगट कियो कबीर ने, सात द्वीप नौ खंडा ।। भागवत पुराण में […] Read more » दक्षिण भारत के संत सन्त रामानुजाचार्य
धर्म-अध्यात्म श्रीकृष्ण परमात्मा के अवतार नहीं वरन महान योगी थे July 8, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on श्रीकृष्ण परमात्मा के अवतार नहीं वरन महान योगी थे अशोक “प्रवृद्ध” यह सर्वमान्य तथ्य है कि श्रीमद्भगवद्गीता का पूर्ण कथन उपनिषदादि ग्रंथों पर आधारित है। स्वयं श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के तेरहवें अध्याय के चौथे श्लोक में यह स्वीकार किया है कि जो कुछ भी इस प्रवचन में कहा गया है, वही वेदों में, ऋषियों ने बहुत प्रकार से गान किया है और ब्रह्मसूत्रों में […] Read more » महान योगी श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण परमात्मा के अवतार
धर्म-अध्यात्म ईश्वर से प्रार्थना क्या, क्यों व कैसे?’ July 8, 2015 by मनमोहन आर्य | 7 Comments on ईश्वर से प्रार्थना क्या, क्यों व कैसे?’ प्रार्थना एक प्रकार की विनती है जो हम किसी वस्तु को किन्हीं दूसरों से मांगने के लिए करते हैं। ईश्वर संसार में सबसे बड़ी, शक्तिशाली, समग्र ऐश्वर्ययुक्त, सर्वज्ञ व सर्वव्यापक गुणों वाली सत्ता है। हम उससे बुद्धि, ज्ञान, शक्ति व बल, धन व ऐश्वर्य आदि की प्रार्थना कर सकते हैं और वह हमें प्राप्त भी […] Read more » ‘ईश्वर से प्रार्थना क्या how to pray god? why to pray god?
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द, वेद प्रचार और देश को स्वतन्त्रता की प्राप्ति July 6, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त का दिन देश का स्वतन्त्रता दिवस है। सन् 1947 में इसी दिन भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति व स्वतन्त्रता मिली थी। यद्यपि यह स्वतन्त्रता है परन्तु हमें यह भी याद रखना चाहिये कि इस दिन से एक दिन पहले 14 अगस्त, 1947 को भारत […] Read more »
धर्म-अध्यात्म योगेश्वर श्रीकृष्ण का चरित्र, भागवतादि पुराण और महर्षि दयानन्द’ July 4, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on योगेश्वर श्रीकृष्ण का चरित्र, भागवतादि पुराण और महर्षि दयानन्द’ श्रीकृष्ण योगेश्वर थे, महात्मा थे, महावीर और धर्मात्मा थे। महाभारत में उनके इसी स्वरूप के दर्शन होते हैं। यद्यपि मध्यकाल में महाभारत में भारी प्रक्षेप हुए हैं परन्तु फिर भी उसमें श्रीकृष्ण जी पर ऐसे घिनौने आरोप नहीं लगाये जैसे भागवत व अन्य पुराणों में लगाये गये हैं। इससे हमारा सनातन वैदिक धर्म बदनाम हुआ […] Read more » भागवतादि पुराण महर्षि दयानन्द योगेश्वर श्रीकृष्ण का चरित्र
धर्म-अध्यात्म भारत के लिए मानव संस्कृति का विकास बहुत जरुरी है-विवेकानंद July 3, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment स्वामी विवेकानंद(जन्म: 12 जनवरी,1863 – मृत्यु: 4 जुलाई,1902) शैलेन्द्र चौहान “जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो। उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो।’ जो बातों का बादशाह नही, बल्कि उसे करके दिखाता है। वही प्रेरक इतिहास रचता है।“ विवेकानन्द […] Read more » मानव संस्कृति का विकास विवेकानंद
धर्म-अध्यात्म ईश्वर हमें तीन सौ वर्ष की आयु प्रदान करें June 29, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार का प्रत्येक मनुष्य चाहता है कि वह स्वस्थ हो, बलवान हो, सुखी हो व सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं व आनन्द की सामग्री से सम्पन्न हो। इसके साथ ही वह दीघार्यु भी होना चाहता है। दीघार्यु हमारे पूर्व जन्म व इस जन्म में किये गए शुभ व पुण्य कर्मो का परिणाम होती है। मनुष्य को […] Read more » ईश्वर तीन सौ वर्ष की आयु
धर्म-अध्यात्म विविधा सृष्टि के रहस्यों के ज्ञान का सरलतम उपाय सत्यार्थ-प्रकाश का अध्ययन June 27, 2015 / June 27, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को ईश्वर ने जो मानव शरीर दिया है वह पांच ज्ञान इन्द्रिय, पांच कर्म इन्द्रिय, मन व बुद्धि सहित अनेक अंगों व उपांगों से युक्त है। बुद्धि व मन दो ऐसे अवयव हैं जो अपना-अपना कार्य करते हैं, अन्य सभी भी स्वतः करते हैं। मन आत्मा के संस्कारों, प्रवृत्तियों व ज्ञान […] Read more » Featured सत्यार्थ-प्रकाश सत्यार्थ-प्रकाश का अध्ययन सृष्टि के रहस्यों के ज्ञान का सरलतम उपाय