चिंतन खान-पान में शुचिता रखें, April 19, 2012 / April 19, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ.दीपक आचार्य खान-पान में शुचिता रखें,दृष्टिदोष से बचें पुराने जमाने से हमारे जीवन में मर्यादाओं की परिधियां चली आ रही हैं। आधुनिक लोग भले ही इन्हें कुछ भी कहें मगर सच तो यह है कि ये सारी मर्यादाएँ हमारे सम्पूर्ण जीवन के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करती हैं और जीवन में सुरक्षित एवं […] Read more » how to eat food where to eat food खान-पान में शुचिता रखें
धर्म-अध्यात्म निर्मल बाबा के बहाने हिन्दू धर्म पर निशाना क्यों? April 19, 2012 by अम्बा चरण वशिष्ठ | 8 Comments on निर्मल बाबा के बहाने हिन्दू धर्म पर निशाना क्यों? अपने गिरेबां में भी तो झांकिये — अम्बा चरण वशिष्ठ निर्मल बाबा महान् हैं या गिरे हुये इन्सान, यह तो वही बता सकता है जो उनके सम्पर्क में आया हो या जिसने उन्हें आज़माया हो। पर उनके बहाने हिन्दू धर्म या सारे साधू-सन्त समाज को ही निशाने पर रख कर सब को ही ढोंगी या […] Read more » अंधविश्वास निर्मल बाबा.
चिंतन कार्बन को ठिकाने लगाना एक बड़ी चुनौती April 17, 2012 / April 17, 2012 by अखिलेश आर्येन्दु | 1 Comment on कार्बन को ठिकाने लगाना एक बड़ी चुनौती अखिलेश आर्येन्दु कार्बन डार्इआक्साइड के उत्सर्जन का लगातार बढ़ना और इससे बढ़ता संकट आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। यह संकट इतना गहरा है कि इसे रोक पाना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर हो गया है। वैज्ञानिकों के सामने इसे ठिकाने लगाने की एक बड़ी चुनौती है। गौरतलब है दुनिया […] Read more » cardondioxide gas कार्बन डार्इआक्साइड
चिंतन भवन शिलान्यास के साथ ही करें पौधारोपण जीवन में हरियाली का सुकून पाएँ April 17, 2012 / April 17, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment – डॉ. दीपक आचार्य हरियाली भरा परिवेश तन-मन को सुकून देने के साथ ही जीवन के हर पहलू में सुख-समृद्धि लाता है। पानी और हरियाली का अपना अलग ही आकर्षण है। जो इन्हें देखता है उसे तत्क्षण सुकून व आत्मतोष मिलने लगता है। हरियाली भरे परिवेश में जीवन को आनंद देने वाले रंगों और रसों […] Read more » plants पौधारोपण भवन शिलान्यास हरियाली
चिंतन कृषि विकास और गांवों की खुशहाली April 17, 2012 / April 21, 2012 by अखिलेश आर्येन्दु | 2 Comments on कृषि विकास और गांवों की खुशहाली अखिलेश आर्येन्दु कृषि विकास और गांवों की खुशहाली के लिए पशुधन की बढ़ोत्तरी पर गम्भीर होना ही होगा आजादी के पहले एक विदेशी इतिहासकार और अर्थशास्त्री ने भारत की कृषि संस्कृति और कृषि सम्पदा की सराहना करते हुए लिखा था कि गांवों में गरीबी विकट होने और खेती घाटे में रहने के बावजूद भी लोग […] Read more » cultivation in Indian villages कृषि विकास गांवों की खुशहाली
चिंतन उद्विग्नता मानसिक बीमारी का लक्षण April 17, 2012 / April 17, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य धैर्य से करें काम-काज सांसारिक काम-धाम की आपाधापी में आज हर कोई कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा पा लेने को उतावला बना हुआ है। सभी को लगता है कि जैसे कामों का बोझ खूब ज्यादा है और समय कम। कइयों को लगता है कि जो मौका मिला है उसे […] Read more » Mental illness मानसिक बीमारी
चिंतन दिखावा छोडें, मौलिकता अपनाएँ April 17, 2012 / April 17, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 3 Comments on दिखावा छोडें, मौलिकता अपनाएँ डॉ दीपक आचार्य दिखावा छोडें, मौलिकता अपनाएँ जीवन का शाश्वत आनंद पाएं हम क्या हैं ? यह दिखाने की बजाय अब हम क्या और कैसे दिखते हैं? इस पर सभी तरफ जोर दिया जा रहा है। हम बहुत कुछ हैं और हममें वह दम है कि जमाने भर को दिखा सकते हैं लेकिन इस गर्व […] Read more » live the life जीवन का शाश्वत आनंद पाएं दिखावा छोडें मौलिकता अपनाएँ
धर्म-अध्यात्म कोई मेरा क्या कर लेगा April 17, 2012 by जगमोहन फुटेला | 6 Comments on कोई मेरा क्या कर लेगा जगमोहन फुटेला कवि ओमप्रकाश आदित्य की एक कविता सुनी थी कोई पैंतीस साल हुए रुद्रपुर के एक कवि-सम्मलेन में. शीर्षक था, “कोई मेरो का कल्लेगो” (कोई मेरा क्या कर लेगा). अब वो कविता शब्दश: याद नहीं. लेकिन उस कविता का पात्र दुनिया भर की हरामज़दगी करने की बात कहता है. इस चुनौती के साथ कि […] Read more » अंधविश्वास निर्मल बाबा.
टॉप स्टोरी धर्म-अध्यात्म क्या लोगों की धार्मिक आस्था एवं विश्वास पर कुठाराघात ‘देशद्रोह’ नहीं है? April 17, 2012 by राजेश कश्यप | 2 Comments on क्या लोगों की धार्मिक आस्था एवं विश्वास पर कुठाराघात ‘देशद्रोह’ नहीं है? राजेश कश्यप देश में पाखण्डी बाबाओं, गुरूओं, योगियों और धर्मोपदेशकों की बाढ़ आई हुई है। लगभग सभी धर्म के नाम पर गोरखधंधा कर रहे हैं। जो जितना बड़ा संत, बाबा, गुरू अथवा योगी के रूप में उभरता है, थोड़े दिन बाद उसकी काली कारतूतों का लंबा चौड़ा पिटारा खुलकर सामने आ जाता है। इस समय […] Read more » अंधविश्वास धर्म
चिंतन उत्सवों को यादगार बनाएँ April 16, 2012 / April 16, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment उत्सवों को यादगार बनाएँ नए वर्ष में नए संकल्प लें डॉ. दीपक आचार्य हर अमावस के बाद पूनम और इसके बाद अमावास्या। शुक्ल पक्ष के बाद कृष्ण पक्ष और फिर वही क्रम। दिन, महीने साल गुजरते जाते हैं। जो समय बीत गया वह कभी लौटकर वापस नहीं आता। कालचक्र की गति कभी थमती नहीं, युगों […] Read more » celebrate festivals New Year उत्सवों को यादगार बनाएँ
चिंतन अपने बाड़ों से बाहर निकलें, जमाने को देखें, अपने आप खुलने लगेगा अक्ल का ताला April 15, 2012 / April 15, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on अपने बाड़ों से बाहर निकलें, जमाने को देखें, अपने आप खुलने लगेगा अक्ल का ताला – डॉ. दीपक आचार्य समाज-जीवन में अजीब सी स्थिरता और जड़ता आ गई है, न कोई हलचल हो रही है न कोई उत्साह। ‘जैसा चल रहा है वैसा चलने दो’ का नारा हर कहीं प्रतिध्वनित हो रहा है। धक्कागाड़ी की तरह चल रहा है सब कुछ। इसमें पुरानी गाड़ी है, घिसे-पिटे-टूटे पुर्जे हैं, नए हैं […] Read more » social life समाज-जीवन
धर्म-अध्यात्म निर्मल बाबा : पहले महिमा मंडन, अब पोस्टमार्टम? April 14, 2012 by तेजवानी गिरधर | 13 Comments on निर्मल बाबा : पहले महिमा मंडन, अब पोस्टमार्टम? तेजवानी गिरधर समागम के नाम पर दरबार लगा कर अपने भक्तों की समस्याओं का चुटकी में कथित समाधान करने की वजह से लोकप्रिय हो रहे निर्मल बाबा स्वाभाविक रूप से संस्पैंस बढऩे के कारण यकायक इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के निशाने पर आ गए हैं। स्टार न्यूज ने अपने क्राइम के सीरियल सनसनी पर एक विशेष रिपोर्ट […] Read more » Nirmal baba निर्मल बाबा.