धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज वैदिक धर्म प्रचारक एवं समाज सुधारक संस्था है March 10, 2021 / March 10, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आर्यसमाज स्थापना दिवस पर--मनमोहन कुमार आर्य Read more » Aryasamaj आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने अविद्या दूर करने सहित संसार का महान उपकार किया March 8, 2021 / March 8, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि के आरम्भ से संसार में मनुष्य आदि प्राणियों का जन्म होता आ रहा है। मनुष्य बुद्धि से युक्त प्राणी है जो सोच विचार कर सत्य और असत्य का निर्णय कर अपने सभी कार्य करता व कर सकता है। सामान्य मनुष्य दूसरे शिक्षित मनुष्यों को देखकर अपने जीवन को भी अच्छा […] Read more » Rishi Dayanand did great work of the world including removing ignorance ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म पं. लेखराम की ऋषि दयानन्द से भेंट का देश व समाज पर प्रभाव March 8, 2021 / March 8, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment पं. लेखराम जी के 124 वे बलिदान दिवस 6 मार्च पर--मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।पंडित लेखराम जी स्वामी दयानन्द जी के प्रारम्भ के प्रमुख शिष्यों में से एक रहे जो वैदिक धर्म की रक्षा और प्रचार के अपने कार्यों के कारण इतिहास में अमर हैं। उन्होंने 17 मई, सन् 1881 को अजमेर में ऋषि दयानन्द से […] Read more » Impact of Pt Lekharam's meeting with sage Dayanand on the country and society पं. लेखराम
धर्म-अध्यात्म ईश्वर हमारे कर्मानुसार ही हमें मनुष्यादि जन्म तथा सुख दुख देते हैं March 5, 2021 / March 5, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम लोगों का जन्म मनुष्य के रूप में स्त्री या पुरुष किसी एक जाति में हुआ है। यह जन्म हमें किसने, क्यों तथा किस आधार पर दिया है, इसका ज्ञान हमें माता, पिता, देश व समाज द्वारा नहीं कराया जाता। हमारे ऋषियों ने ईश्वरीय ज्ञान वेद तथा वेदों के व्याख्या ग्रन्थों में उपलब्ध […] Read more » God gives us human birth and happiness as per our norms ईश्वर
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को सृष्टिकर्ता ईश्वर के उपकारों को जानकर कृतज्ञ होना चाहिये March 5, 2021 / March 5, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य मननशील प्राणी है। इसका शरीर उसने स्वयं उत्पन्न किया नहीं है। माता पिता से इसे जन्म मिलता है। माता पिता भी अल्पज्ञ एवं अल्प शक्ति वाले मनुष्य होते हैं। सभी मनुष्य व महापुरुष अल्पज्ञ ही होते हैं। कोई भी मनुष्य व इतर प्राणियों के शरीर को बनाना नहीं जानता। मनुष्य से भिन्न […] Read more » Man should be grateful to know the benevolence of the creator God. ईश्वर के उपकार
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा के पुनर्जन्म का सिद्धान्त सत्य, नित्य होने सहित विश्वसनीय है March 2, 2021 / March 2, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य में भूलने की प्रवृत्ति व स्वभाव होता है। वह अपने जीवन में अनेक बातों को कुछ ही समय में भूल जाता है। हमने कल, परसों व उससे पहले किस दिन क्या क्या व कब कब भोजन किया, किस रंग व कौन से वस्त्र पहने थे, किससे कब कब मिले थे, कहां कहां […] Read more » पुनर्जन्म का सिद्धान्त
धर्म-अध्यात्म साधना से पायी परम अवस्था : संत रविदास March 2, 2021 / March 2, 2021 by इ. राजेश पाठक | Leave a Comment जिस नवधा-भक्ति का रामचरितमानस में प्रतिपादन हुआ है, उसमें नौ प्रकार की भगवान की भक्ति के मार्ग बताये गए हैं. परन्तु चौदहवीं सदी के समाप्त होते-होते रामानंद स्वामी के प्रताप से एक और प्रकार की भक्ति इसमें आ जुड़ी. माधुर्य-भक्ति के नाम से विख्यात इस दसवीं भक्ति में कुछ और की कामना न करते हुए […] Read more » संत रविदास जयंती
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्मियों के लिये राष्ट्र वन्दनीय है तथा सत्यार्थप्रकाश इसका पोषक है March 2, 2021 / March 2, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यसंसार में मत-मतान्तर तो अनेक हैं परन्तु धर्म एक ही है। वेद ही एकमात्र सर्वाधिक व पूर्ण मानवतावादी धर्म है। वेद में निर्दोष प्राणियों, मनुष्य व पशु-पक्षी आदि किसी के प्रति भी, हिंसा करने का कहीं उल्लेख नहीं है। वेद की विचारधारा मांसाहार को सबसे बुरा मानती है। वेद मनुष्य को सभी प्राणियों […] Read more » For Vedic religious people सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं March 1, 2021 / March 1, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यधर्म के विषय में तरह तरह की बातें की जाती हैं परन्तु धर्म सत्याचरण वा सत्य कर्तव्यों के धारण व पालन का नाम है। यह विचार व सिद्धान्त हमें वेदाध्ययन करने पर प्राप्त होते हैं। महाराज मनु ने कहा है कि धर्म की जिज्ञासा होने पर उनका वेदों से जो उत्तर व समाधान […] Read more » असत् कर्मों के त्याग
धर्म-अध्यात्म वेदों की प्रमुख देन ईश्वर, जीव तथा प्रकृति विषयक त्रैतवाद का सिद्धान्त February 26, 2021 / February 26, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवेद संसार के सबसे पुराने ज्ञान व विज्ञान के ग्रन्थ है। वेदों का आविर्भाव सृष्टि के आरम्भ में इस सृष्टि रचयिता व पालक ईश्वर से हुआ है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अनादि तथा नित्य सत्ता है। वह निर्विकार, अविनाशी तथा अनन्त है। सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होने से वह पूर्ण ज्ञानवान […] Read more » त्रैतवाद का सिद्धान्त
धर्म-अध्यात्म ईश्वर अनादि, जगत का कर्ता एवं जड़-चेतन जगत का स्वामी है February 25, 2021 / February 25, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यऋषि दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश के सप्तम समुल्लास के आरम्भ में ऋग्वेद के 4 और यजुर्वेद के एक मन्त्र को प्रस्तुत कर उनके अर्थों सहित ईश्वर के सत्यस्वरूप तथा गुण, कर्म व स्वभाव का प्रकाश किया है। इन मन्त्रों में तीसरा मन्त्र ऋग्वेद के दशवे मण्डल के सूक्त 48 का प्रथम मन्त्र है। […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द को शिवरात्रि को हुए बोध से विश्व से अविद्या दूर हुई February 24, 2021 / February 24, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवर्तमान समय से लगभग 5,200 वर्ष पूर्व महाभारत का विनाशकारी युद्ध हुआ था। महाभारत काल तक वेद अपने सत्यस्वरूप में विद्यमान थे जिसके कारण संसार में विद्या व सत्य ज्ञान का प्रचार व प्रसार था। महाभारत के बाद वेदों के अध्ययन अध्यापन तथा प्रचार में बाधा उत्पन्न हुई जिसके कारण विद्या धीरे धीरे […] Read more » Avidya got away from the world due to the realization of Sage Dayanand on Shivaratri ऋषि दयानन्द को शिवरात्रि को हुए बोध से विश्व से अविद्या दूर हुई शिवरात्रि