धर्म-अध्यात्म मनुष्य निर्माण में माता, पिता तथा आचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका February 1, 2021 / February 1, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा की व्यवस्था से संसार में मनुष्य का जन्म माता व पिता के द्वारा होता है। माता के विचारों व स्वभाव का सन्तान के निर्माण व जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि माता अशिक्षित व धर्म विषयक ज्ञान से हीन है, तो वह अपनी सन्तानों को सत्य धर्म वेद एवं […] Read more » father and masters in human creation Important role of mother मनुष्य निर्माण में माता
धर्म-अध्यात्म हमें जीवात्मा के आवागमन तथा इसकी दुःखों से मुक्ति का ज्ञान होना चाहिये January 31, 2021 / January 31, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का आत्मा अभौतिक पदार्थ है। आत्मा से इतर मनुष्य का शरीर भौतिक पदार्थों से बना होता है। मनुष्य शरीर को पांच भौतिक पदार्थों पृथिवी, अग्नि, वायु, जल एवं आकाश से बना होने के कारण पंचभौतिक शरीर कहते हैं। आत्मा पांच भूतों व पदार्थों से पृथक अनादि, नित्य तथा चेतन पदार्थ […] Read more » जीवात्मा के आवागमन
धर्म-अध्यात्म वेद सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वज्ञ एवं सर्वव्यापक ईश्वर से उत्पन्न हुए हैं January 29, 2021 / January 29, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यसूर्य, चन्द्र, पृथिवी तथा नक्षत्रों आदि से युक्त हमारी यह भौतिक सृष्टि मनुष्योत्पत्ति से बहुत पहले बन चुकी थी। अतः इसे मनुष्यों ने नहीं बनाया यह बात तो स्पष्ट है। मनुष्य एक, दो व करोड़ों मिलकर भी इस सृष्टि व इसके एक ग्रह को भी नहीं बना सकते। यदि ऐसा है तो फिर […] Read more » omniscient and omniscient God The Vedas are derived from Sachchidananda Swaroop वेद
धर्म-अध्यात्म कर्तव्य पालन व परोपकार सहित कामनाओं की पूर्ति यज्ञ से होती है January 28, 2021 / January 28, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसके द्वारा हर क्षण वायु को प्रदूषित किया जाता है। वायु ही नहीं अपितु मनुष्य जिस स्थान पर रहता वहां भी अस्वच्छता व अपवित्रता उत्पन्न होती रहती है जिसे अनेक प्रकार से स्वच्छ व पवित्र किया जाता है। वायु मुख्यतः मनुष्य के श्वास लेने से अपवित्र होती है। […] Read more » including duty and benevolence Yajna is fulfilled by the duties यज्ञ
धर्म-अध्यात्म सन्ध्या व देवयज्ञ कर मनुष्य जीवन को शुद्ध व पवित्र बनाना चाहिये January 25, 2021 / January 25, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य का जीवन शुद्ध व पवित्र होना चाहिये। शुद्ध एवं पवित्र जीवन के अनेक लाभ होते हैं। इससे आत्मा आस्तिक, बलवान तथा शुभ कर्मों को करने में प्रवृत्त होने के साथ अशुभ व पाप कर्मों को करने से दूर भी होता है। मनुष्य जीवन हमें परमात्मा से प्राप्त हुआ है जो स्वयं में […] Read more » People should make pure and pure life by making evening and devotion सन्ध्या व देवयज्ञ
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने ऋषि परम्परा का निर्वहन करते हुए वेद परम्पराओं को पुनर्जीवित किया January 23, 2021 / January 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यआदि काल से महाभारत काल तक देश देशान्तर में ईश्वरीय ज्ञान वेदों का प्रचार था। वेद सृष्टि की आदि में ईश्वर द्वारा मनुष्यों को प्रेरित व प्राप्त ज्ञान है। वेद सब सत्य विद्याओं से युक्त हैं जिससे मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति होती है। ईश्वर, जीवात्मा तथा सृष्टि की उत्पत्ति, सृष्टि उत्पत्ति के प्रयोजन, […] Read more » ऋषि दयानन्द ऋषि परम्परा का निर्वहन वेद परम्पराओं को पुनर्जीवित
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को परमात्मा से श्रेष्ठ बुद्धि तथा दुर्गुणों को दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिये January 22, 2021 / January 22, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहमें मनुष्य जीवन परमात्मा से मिला है। परमात्मा ने ही जीवात्माओं के लिए इस सृष्टि को उत्पन्न किया है। हम जो सूर्य, चन्द्र, पृथिवी तथा आकाश में में तेजस्वी नक्षत्रों को देखते हैं उन सबको सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान तथा सच्चिदानन्दस्वरूप परमात्मा ने ही सृष्टि के आदिकाल में उत्पन्न किया था। ईश्वर अनादि तथा […] Read more » परमात्मा परमात्मा से श्रेष्ठ बुद्धि तथा दुर्गुणों को दूर करने की प्रार्थना
धर्म-अध्यात्म सत्यार्थप्रकाश से वेदों के महत्व तथा मत-मतान्तरों की अविद्या का ज्ञान होता है January 22, 2021 / January 22, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को यह ज्ञान नहीं होता है कि उसके लिये क्या आवश्यक एवं उचित है जिसे करके वह अपने जीवन को सुखी व दुःखों से रहित बना सके। मनुष्य जीवन के सभी पक्षों का ज्ञान हमें केवल वैदिक साहित्य का अध्ययन करने से ही होता है। वेद विद्या से युक्त तथा अविद्या […] Read more » सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानना सरल बना दिया January 22, 2021 / January 22, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यसंसार में जानने योग्य यदि सबसे अधिक मूल्यवान कोई सत्ता व पदार्थ हैं तो वह ईश्वर व जीवात्मा हैं। ईश्वर के विषय में आज भी प्रायः समस्त धार्मिक जगत पूर्ण ज्ञान की स्थिति में नहीं है। सभी मतों में ईश्वर व जीवात्मा के सत्यस्वरूप को लेकर भ्रान्तियां हैं। कुछ मत ईश्वर को मनुष्यों […] Read more » Sage Dayanand made it easy to know the truth of God ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म दुःखों से रक्षार्थ सत्य को धारण करने की प्रेरणा करता है January 18, 2021 / January 18, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जो ज्ञान होता है वह सत्य व असत्य दो कोटि का होता है। मनुष्य के कर्म भी दो कोटि यथा सत्य व असत्य स्वरूप वाले हाते हैं। अनेक स्थितियों में मनुष्य को सत्य को अपनाने से क्षणिक व सामयिक हानि होती दीखती है और असत्य का आचरण करने से […] Read more » वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म स्वाध्याय से ईश्वर तथा जीवात्मा सहित अनेक विषयों का ज्ञान होता है January 18, 2021 / January 18, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य जीवन को उत्तम व श्रेष्ठ बनाने के लिये आत्मा को ज्ञान से युक्त करने सहित श्रेष्ठ कर्मों व आचरणों का धारण व पालन करना होता है। मनुष्य जब संसार में आता है तो वह एक अबोध शिशु होता है। माता, पिता तथा परिवार के लोगों की बातें सुनकर वह बोलना सीखता है। […] Read more » Swadhyaya gives knowledge of many subjects including God and Jeevatma. ईश्वर तथा जीवात्मा स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म ईश्वर सृष्टि उत्पत्ति सहित सभी अपौरुषेय कार्य जीवों के कल्याणार्थ करता है January 16, 2021 / January 16, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार में तीन मूल सत्तायें हैं जिन्हें हम ईश्वर, जीव तथा प्रकृति के नाम से जानते हैं। आकाश का भी अस्तित्व है परन्तु यह एक चेतन व जड़ सत्ता नहीं है। आकाश खाली स्थान को कहते हैं जिसमें अन्य सभी सत्तायें आश्रय पाये हुए हैं। इसी प्रकार से संसार में दस […] Read more » God does all the inauspicious works including the creation ईश्वर