धर्म-अध्यात्म ईश्वर की उपासना का उद्देश्य कृतज्ञता ज्ञापन एवं ईश्वर साक्षात्कार January 15, 2021 / January 15, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यसंसार की जनसंख्या का बड़ा भाग ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करता है और अपने ज्ञान व परम्पराओं के अनुरूप ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना व उपासना करता है। ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना तथा उपासना करना क्यों आवश्यक है?, इसके लिये हमें ईश्वर के सत्यस्वरूप, उसके गुण, कर्म व स्वभाव तथा उस ईश्वर के […] Read more » Purpose of Worship of God Gratitude memorandum and God interview ईश्वर की उपासना
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा एक स्वतन्त्र एवं अन्य अनादि तत्वों से पृथक सत्ता व पदार्थ है January 13, 2021 / January 13, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार ईश्वर जीव तथा प्रकृति, इन तीन सत्ताओं व पदार्थों से युक्त है। अनन्त आकाश का भी अस्तित्व है परन्तु यह कभी किसी विकार को प्राप्त न होने वाला तथा किसी प्रकार की क्रिया न करने वाला व इसमें क्रिया होकर कोई नया पदार्थ बनने वाला पदार्थ है। ईश्वर, […] Read more » जीवात्मा
धर्म-अध्यात्म अविद्या से सर्वथा रहित तथा सत्य ज्ञान से पूर्ण ग्रन्थ है सत्यार्थप्रकाश January 12, 2021 / January 12, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य चेतन एवं अल्पज्ञ सत्ता है। इसका शरीर जड़ पंच–भौतिक पदार्थों से परमात्मा द्वारा बनाया व प्रदान किया हुआ है। परमात्मा को ही मनुष्य शरीर व उसके सभी अवयव बनाने का ज्ञान है। उसी के विधान व नियमों के अन्तर्गत मनुष्य का जन्म होता तथा मनुष्य के शरीर में वृद्धि व […] Read more » Satyartha Prakash सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म सृष्टि में नियम व व्यवस्था ईश्वर के होने का संकेत करते हैं January 12, 2021 / January 12, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार में स्थूल व सूक्ष्म दो प्रकार के पदार्थ होते हैं। स्थूल पदार्थों को सरलता से देखा जा सकता है। इसी से उनका प्रत्यक्ष भी हो जाता है। किसी पदार्थ का ज्ञान उसके गुणों को समग्रता से जानने पर होता है। सूक्ष्म पदार्थों नेत्रों से तो दिखाई नहीं देते परन्तु वह […] Read more » ईश्वर के होने का संकेत
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को सद्धर्म एवं देश हित का विचार कर सभी कार्य करने चाहियें January 12, 2021 / January 12, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य कहलाते हैं। हमारी पहचान दो पैर वाले पशु के रूप में होती है। परमात्मा ने पशुओं को चार पैर वाला बनाया है। उन पशुओं से हम भिन्न प्राणी हैं। हमारे पास दो पैरों पर आसानी से खड़ा होने की सामर्थ्य होती है। हम दो पैरों से चल सकते हैं। […] Read more » सद्धर्म एवं देश हित का विचार
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा का जन्म-मरण वा आवागमन अनादि काल से चल रहा है January 12, 2021 / January 12, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य जन्म व मरण भोग एवं अपवर्ग की प्राप्ति के लिए प्राप्त एक सुअवसर होता है। यह अवसर सनातन, शाश्वत, अनादि व नित्य आत्मा को परमात्मा प्रदान करते हैं। मनुष्य योनि में जन्म लेकर चेतन व अल्पज्ञ जीवात्मा को अपने माता, पिता, आचार्यों सहित परमात्मा के अपौरुषेय ज्ञान चार वेदों की सहायता तथा […] Read more » जीवात्मा का जन्म-मरण
धर्म-अध्यात्म स्वाध्याय से जीवन की उन्नति सहित अनेक रहस्यों का ज्ञान होता है January 8, 2021 / January 8, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जीवन में सबसे अधिक महत्व ज्ञान का बताया जाता है और यह बात है भी सत्य। हम चेतन आत्मा हैं। हमारा शरीर जड़ है। जड़ वस्तु में ज्ञान प्राप्ति व उसकी वृद्धि की सम्भावना नहीं होती। जड़ वा निर्जीव वस्तुयें सभी ज्ञानशून्य होती हैं। इनको किसी भी प्रकार की सुख […] Read more » Aryasamaj स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म वेद एवं वैदिक धर्म हमें क्यों प्रिय हैं? January 7, 2021 / January 7, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य को जिन मनुष्यों, पदार्थों व वस्तुओं से लाभ होता है वह उसको प्रिय होती हैं? मनुष्य भौतिक वस्तुओं में नाना प्रकार के भोजनों, अपने घर, सुविधा की वस्तुओं सहित अपने परिवार जनों को प्रेम किया करते हैं व वह उन्हें प्रिय होते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक व उचित ही है। इनके अतिरिक्त […] Read more » वेद एवं वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म वेदर्षि दयानन्द द्वारा स्थापित आर्यसमाज हमें प्रिय क्यों हैं? January 6, 2021 / January 6, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक संस्थायें एवं संगठन हैं। सब संस्थाओं एवं संगठनों के अपने अपने उद्देश्य एवं उसकी पूर्ति की कार्य-पद्धतियां है। सभी संगठन अपने अपने उद्देश्यों को पूरा करने के किये कार्य करते हैं। आर्यसमाज भी विश्व का अपनी ही तरह का एकमात्र अनूठा संगठन है। हमें लगता है कि आर्यसमाज […] Read more » love Arya Samaj established by Vedarshi Dayanand Why do we love Arya Samaj established by Vedarshi Dayanand आर्यसमाज वेदर्षि दयानन्द वेदर्षि दयानन्द द्वारा स्थापित आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ : जीवंत धर्म के प्रेरक January 5, 2021 / January 5, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती 8 जनवरी 2021 पर विशेषः-ः ललित गर्ग:- भाग्योदय में प्रयत्न और पुरुषार्थ से भी ज्यादा जरूरी होता है समय की सच्चाई के साथ जी सकने और स्वयं के अंदर छुपी अनंत संभावनाओं को उद्घाटित कर सकने का विश्वास। जिसे अपनी क्षमताओं पर विश्वास होता है वही धर्म का वास्तविक पात्र होता […] Read more » Bhagwan Parshvanath Tirthankara Bhagwan Parshvanath Twenty-third Tirthankara Bhagwan Parshvanath: Motivational of vibrant religion तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती 8 जनवरी 2021
धर्म-अध्यात्म लेख गुरु गोविन्द सिंह: सिख इतिहास का एक अमिट आलेख January 5, 2021 / January 6, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु गोविन्द सिंह के 354वें प्रकाश उत्सव- 20 जनवरी 2021ललित गर्ग भारत की रत्नगर्भा माटी में संतपुरुषों, गुरुओें एवं महामनीषियों की श्रृंखला में एक महापुरुष हैं गुरु गोविन्द सिंह। जिनकी दुनिया के महान् तपस्वी, महान् कवि, महान् योद्धा, महान् संत सिपाही साहिब आदि स्वरूपों में पहचान होती है। जिन्होंने कर्तृत्ववाद का संदेश देकर औरों के […] Read more » Guru Gobind Singh गुरु गोविन्द सिंह गुरु गोविन्द सिंह के 354वें प्रकाश उत्सव- 5 जनवरी
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को अपने लाभ के लिए ईश्वर की उपासना करनी चाहिये January 5, 2021 / January 5, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य मननशील प्राणी है। वह अपनी रक्षा एवं हित के कार्यों में संलग्न रहता है। अपनी रक्षा के लिए वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देता है तथा सज्जन पुरुषों से मित्रता करता है जिससे असुरक्षा एवं विपरीत परिस्थितियों में वह उसके सहायक हो सकें। मनुष्य अपनी सुख सुविधाओं का भी ध्यान रखता है। […] Read more » Man should worship God for his benefit ईश्वर की उपासना लाभ के लिए ईश्वर की उपासना