धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज ईश्वरीय ज्ञान वेद का प्रचारक संसार का अनोखा संगठन है September 5, 2020 / September 5, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक संगठन है जिनके अपने-अपने उद्देश्य व लक्ष्य हैं तथा जिसे पूरा करने के लिये वह कार्य व प्रचार करते हैं। सभी संगठन या तो धार्मिक होते हैं या सामाजिक। इनसे इतर भी अनेक विषयों को लेकर अनेक संगठन बनाये जाते हैं। देश की रक्षा करने के लिये भी […] Read more » आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श, प्रेरक एवं अनुकरणीय जीवन September 2, 2020 / September 2, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वैदिक धर्म एवं संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन आदर्श, अनुकरणीय एवं प्रेरक उदाहरणों से युक्त जीवन है। वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श शत्रु, आदर्श मित्र, ईश्वर, वेद एवं ऋषि परम्पराओं को समर्पित, उच्च आदर्शों एवं चरित्र से युक्त महापुरुष व महामानव थे। त्रेता युग […] Read more » inspirational and exemplary life of Maryada Purushottam Ram मर्यादा पुरुषोत्तम राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श
धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की मात्रा व आचरण से ही उनके व्यक्तित्व व जीवन का निर्माण होता है। ज्ञान का आदि स्रोत चार वेद ही हैं। वेद न होते तो ज्ञान भी न होता। वेदों […] Read more » Promotion of true principles will only lead to welfare of the country and society
धर्म-अध्यात्म परमात्मा सब जीवात्माओं के जन्मदाता व माता-पिता होने से उपासनीय हैं September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा और आत्मा का सम्बन्ध व्याप्य-व्यापक, उपास्य-उपासक, स्वामी-सेवक, मित्र बन्धु व सखा आदि का है। परमात्मा और आत्मा दोनों इस जगत की अनादि चेतन सत्तायें हैं। ईश्वर के अनेक कार्यों में जीवों के पाप-पुण्यों का साक्षी होना तथा उन्हें उनके कर्मानुसार सुख व दुःख रूपी भोग प्रदान करना है। हमारा जो […] Read more » God is worshiped by being the creator and parent of all beings. परमात्मा
धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा August 31, 2020 / August 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की मात्रा व आचरण से ही उनके व्यक्तित्व व जीवन का निर्माण होता है। ज्ञान का आदि स्रोत चार वेद ही हैं। वेद न होते तो ज्ञान भी न होता। वेदों […] Read more » Promotion of true principles will only lead to welfare of the country and society सत्य सिद्धान्तों के प्रचार
धर्म-अध्यात्म वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है August 31, 2020 / August 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका अधिकांश ज्ञान नैमित्तिक होता है जिसे वह अपने शैशव काल से माता, पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों व अपने चिन्तन, मनन, ध्यान आदि सहित अभ्यास व अनुभव के आधार पर […] Read more » Vedhyayana and Veda preaching leads to the removal of ignorance and increases learning. वेदाध्ययन व वेद प्रचार
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज एक अद्वितीय धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय संगठन है August 28, 2020 / August 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार में किसी विषय पर सत्य मान्यता एक व परस्पर पूरक हुआ करती हैं जबकि एक ही विषय में असत्य मान्यतायें अनेक होती व हो सकती हैं। संसार में ईश्वर व धर्म विषयक मान्यतायें भी एक समान व परस्पर एक दूसरे की पूर्वक होती हैं। इसी कारण से संसार में ईश्वर […] Read more » Aryasamaj is a social and national organization Aryasamaj is a unique religious आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय से मनुष्य अन्धविश्वासों व दुष्कर्मों से बचता है August 27, 2020 / August 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वेद अपौरुषेय रचना है। सृष्टि क आरम्भ में परमात्मा ने ही अपने अन्तर्यामीस्वरूप से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा को उनकी आत्माओं में वेदों का ज्ञान कराया वा दिया था। प्राचीन काल से अद्यावधि–पर्यन्त सभी ऋषि वेदों की परीक्षा कर इस तथ्य को स्वीकार करते आये हैं कि वेद […] Read more » वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म संसार की श्रेष्ठतम रचना यह सृष्टि ईश्वर से ही प्रकाशित हुई है August 26, 2020 / August 26, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य प्रत्येक रचना एक रचयिता की बनाई हुई कृति होती है। हमारी यह विशाल सृष्टि किस रचयिता की कृति है, इस पर विचार करना आवश्यक एवं उचित है। सृष्टि की रचना व उत्पत्ति आदि विषयों का अध्ययन करने पर यह अपौरुषेय रचना सिद्ध होती है। अपौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिनको मनुष्य […] Read more » the best creation of the world This creation has been published by God संसार की श्रेष्ठतम रचना
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के उपकारों का स्मरण करना चाहिये August 25, 2020 / August 25, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमें यह ज्ञात होना चाहिये कि ईश्वर क्या व कैसा है? उसके गुण, कर्म व स्वभाव क्या व कैसे हैं? इसका ज्ञान करने का सरलतम तरीका सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ का अध्ययन है। हमारी दृष्टि में संसार में सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ के समान दूसरा महत्वपूर्ण ग्रन्थ नहीं है। इसके अध्ययन से मनुष्य की सभी […] Read more » ईश्वर ईश्वर के उपकारों का स्मरण
धर्म-अध्यात्म जीवन में संयम, सीमित आवकश्तायें एवं शक्ति संचय आवश्यक है August 23, 2020 / August 23, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार में सभी जीवन पद्धतियों में वैदिक धर्म एवं तदनुकूल जीवन पद्धति श्रेष्ठ व महत्वूपर्ण है। इसे जानकर और इसके अनुसार जीवन व्यतीत करने पर मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं से बच जाता है। मनुष्य को अपनी शारीरिक शक्तियों के विकास वा उन्नति पर ध्यान देना चाहिये। इसके लिये उसे […] Read more » Restraint जीवन में संयम
धर्म-अध्यात्म ब्रह्मचर्य ईश्वर में विचरण, संयम और कर्तव्यों का पालन करना है August 20, 2020 / August 20, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य वेद एवं वैदिक साहित्य में ब्रह्मचर्य की चर्चा मिलती है। प्राचीन काल में मनुष्य जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया था। प्रथम आश्रम ब्रह्मचर्य आश्रम कहलाता था। इसके बाद गृहस्थ आश्रम का स्थान था। ब्रह्मचर्य आश्रम जन्म से 25 वर्ष की आयु तक मुख्य रूप से माना जाता है परन्तु […] Read more » Brahmacharya is to perform variance restraint and duties in God ब्रह्मचर्य