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आर्थिकी लेख

भारत में निर्मित होने लगे हैं रोजगार के करोड़ों अवसर

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भारतीय सनातन संस्कृति के बारे में विवेचन करते हुए, भारत में रचित वेद, पुराण एवं परम्पराओं के अनुसार, राजा का यह कर्तव्य माना गया है कि उसके राज्य में निवास कर रही प्रजा में प्रत्येक नागरिक को रोजगार उपलब्ध हो, राजा ऐसी व्यवस्था करे। जब तक भारतीय सनातन संस्कृति का भारत में पालन होता रहा, तब तक लगभग समस्त नागरिकों को रोजगार उपलब्ध होता रहा। प्राचीन भारत में  विशेष रूप से गावों में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध रहते थे एवं शहरों की ओर पलायन भी बहुत कम होता था। बेरोजगारी की समस्या के बारे में तो भारत के प्राचीन शास्त्रों में वर्णन ही नहीं मिलता है। समस्त नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं वे अपने परिवार के समस्त सदस्यों का भरण पोषण करने में सक्षम रहते थे एवं परिवार के समस्त सदस्यों के साथ प्रसन्नत्ता एवं उत्साह के साथ रहते थे। जब कि आज की परिस्थितियों के बीच, वैश्विक स्तर पर, बेरोजगारी की समस्या एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर रही है। भारतीय सनातन संस्कृति का पालन करते हुए भारत आज आर्थिक प्रगति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज भारतीय अर्थव्यवस्था पूरे विश्व की लगभग सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। वर्ष 2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में 10वें स्थान पर थी जो आज 5वें स्थान पर पहुंच गई है एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति को देखते हुए अब उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2027-28 के पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी एवं यह अमेरिका एवं चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन जाएगी। भारत में केंद्र सरकार द्वारा लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि न केवल देश की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़े बल्कि भारत में युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के नए अवसर निर्मित हों। इस दृष्टि से भारत में अब अच्छी खबर आई है। भारत में अगस्त 2023 माह में 46.21 करोड़ नागरिकों को रोजगार मिला हुआ था जबकि अगस्त 2022 में 43.02 करोड़ नागरिकों को ही रोजगार प्राप्त था, इस प्रकार एक वर्ष के दौरान 3.19 करोड़ नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा वर्ष 2017 के बाद से प्रतिवर्ष देश में (जुलाई-जून वार्षिक अवधि के बीच) श्रम शक्ति सर्वेक्षण, यह जानने के लिए किया जाता है कि भारत के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एवं रोजगार की कैसी स्थिति है। हाल ही में जुलाई 2022 से जून 2023 की अवधि के बीच यह सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न हुआ है। इस सम्बंध में जारी किए गए प्रतिवेदन में भारत में रोजगार की स्थिति के बारे में कई अच्छे तथ्य उभरकर सामने आए हैं।  भारत में 15 वर्ष एवं इससे अधिक की आयु वाले नागरिकों के बीच श्रम शक्ति भागीदारी की दर (Labour Force Participation Rate) में लगातार अतुलनीय रूप से सुधार हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम शक्ति भागीदारी की दर वर्ष 2017-18 में 50.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 60.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वर्ष 2017-18 में 47.6 प्रतिशत से बढ़कर 50.4 प्रतिशत हो गई है। इसी प्रकार, पुरुषों में यह दर वर्ष 2017-18 में 75.8 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 78.5 प्रतिशत एवं महिलाओं में यह दर वर्ष 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 37 प्रतिशत हो गई है। इसी प्रकार, भारत में 15 वर्ष एवं अधिक की आयु के नागरिकों के बीच कर्मचारी जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio) में भी अतुलनीय सुधार दृष्टिगोचर है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कर्मचारी जनसंख्या अनुपात वर्ष 2017-18 के 48.1 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 59.4 प्रतिशत हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 43.9 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 47.7 प्रतिशत हो गया है। पुरुषों के बीच यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 71.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 76 प्रतिशत हो गया है और महिलाओं में यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 22 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 35.9 प्रतिशत हो गया है।  जब देश में श्रम शक्ति भागीदारी की दर एवं कर्मचारी जनसंख्या अनुपात में लगातार सुधार दिखाई दे रहा है तो स्वाभाविक रूप से भारत में बेरोजगारी की दर में भी कमी दृष्टिगोचर हो रही है। उक्त सर्वेक्षण के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 में 5.3 प्रतिशत थी जो वर्ष 2022-23 में घटकर 2.4 प्रतिशत रह गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 7.7 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 5.4 प्रतिशत पर आ गई है। पुरुषों के बीच बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 6.1 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 3.3 प्रतिशत हो गई है तो वहीं महिलाओं के बीच बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 5.6 प्रतिशत से वर्ष 2022-23 में घटकर 2.9 प्रतिशत हो गई है।  भारत में आज भी 60 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों में यदि रोजगार के नए अवसर अधिक मात्रा में निर्मित हो रहे हैं तो यह एक बहुत अच्छा सुधार है। इसी प्रकार, भारत में पुरुषों के बीच यदि बेरोजगारी की दर काफी कम हो रही है तो भारतीय महिलाओं को श्रम बाजार में उतरना ही होगा, और ऐसा होता दिखाई भी दे रहा है, अतः यह भी एक उत्तम सुधार है। भारत में महिला शक्ति यदि श्रम बाजार में उतरती है तो भारत में मजदूरी की दरों को भी संतुलित रखा जा सकता है जिससे उत्पादों की लागत में तेज वृद्धि को रोका जा सकेगा और भारत में निर्मित उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लम्बे समत तक प्रतिस्पर्धी बने रह सकेंगे।  प्रहलाद सबनानी

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आर्थिकी लेख

वैश्विक वित्तीय संस्थान भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ा रहे हैं

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वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश आर्थिक समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। साथ ही, रूस यूक्रेन के बीच युद्ध अभी थमा भी नहीं था कि आतंकवादी संगठन हमास ने इजराईल पर हमला कर दिया, जिससे अब इजराईल एवं हमास के बीच युद्ध छिड़ गया है और अब तो एक तरह से लेबनान भी इस युद्ध में कूद गया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत में अप्रैल-जून 2023 तिमाही में उम्मीद से अधिक खपत का हवाला देते हुए वित्त-वर्ष 2023-24 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ की ओर से किया गया यह बदलाव भारत के आंकड़ों में किए गए कई बदलावों में सबसे नया है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्वानुमानों के अनुसार वित्त-वर्ष 2023-24 के लिए भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। आईएमएफ के अनुसार आने वाले समय में भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आईएमएफ के पूर्व विश्व बैंक द्वारा भी एक ताजा प्रतिवेदन में यह अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2023-24 में 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करेगी। विकास की वजह देश में लगातार बढ़ रहा निवेश और घरेलू मांग का बढ़ना बताया गया है। विश्व बैंक की इंडिया डेवलपमेंट अपडेट (आईडीयू) प्रतिवेदन में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन कायम है। इस कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में रफ्तार बनी रहेगी।  इसी प्रकार, आर्थिक विकास एवं सहयोग संगठन (ओईसीडी) द्वारा जारी किए गए एक अन्य प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2023 में भारत की विकास दर 6.3 प्रतिशत एवं वर्ष 2024 में 6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक वृद्धि दर रहने वाली है। जबकि इसी अवधि के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर क्रमश: 3 प्रतिशत एवं 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। जी-20 समूह में शामिल विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर वर्ष 2023 में 1.5 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। एक अन्य वैश्विक निवेश बैंक मार्गन स्टेनली द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में तेज वृद्धि दर के बाद पूरे वित्तीय वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ाया गया है। मार्गन स्टेनली ने अब पूरे वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले मार्गन स्टेनली ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर को 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। निवेश बैंक ने कहा है कि मजबूत घरेलू मांग के चलते भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में संशोधन किया गया है। अप्रैल-जून 2023 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो मार्गन स्टेनली के पूर्व अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। चीन की विस्तारवादी नीतियों के चलते अब विश्व के कई देशों का चीन पर विश्वास लगातार कम हो रहा है, जिसके कारण विकसित देशों की कई कम्पनियां चीन से अपनी विनिर्माण इकाईयों को अन्य देशों में स्थानांतरित कर रही हैं। इससे चीन में कई आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो रही है। इस बीच भारत ने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भारत में अपनी विनिर्माण इकाईयां स्थापित करने हेतु आकर्षित करने उद्देश्य से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपनी विनिर्माण इकाईयों को अब भारत में स्थापित कर रही हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, स्मार्ट फोन उत्पादन, फार्मा, टेक्सटाइल, सुरक्षा उपकरणों के निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण इकाईयों की स्थापना की जा रही है।  भारत की लगातार बढ़ती आर्थिक विकास दर के चलते अब भारत में बेरोजगारी की दर भी कम हो रही है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण वार्षिक प्रतिवेदन 2022-2023 के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए भारत में बेरोजगारी की दर जुलाई 2022 से जून 2023 के खंडकाल के दौरान छह वर्ष के निचले स्तर अर्थात 3.2 प्रतिशत पर आ गई है। एनएसएसओ के अनुसार, एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह 7.6 प्रतिशत थी। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए वर्तमान साप्ताहिक स्थिति में श्रमबल भागीदारी भी बढ़ी है। अप्रैल-जून 2023 में साप्ताहिक स्थिति में श्रमबल भागीदारी बढ़कर 48.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो एक वर्ष पहले 47.5 प्रतिशत थी। हर्ष का विषय यह भी है कि अब भारत में औपचारिक रोजगार की संख्या तुलनात्मक रूप से अधिक तेज गति से बढ़ रही है। औपचारिक रोजगार में कर्मचारियों को सरकारी नियमों के अंतर्गत समस्त प्रकार की सुविधाएं (प्रॉविडेंट फंड, पेंशन, मेडिकल सुविधा, आदि) नियोक्ताओं द्वारा प्रदान की जाती हैं। जबकि अनौपचारिक रोजगार की श्रेणी के कर्मचारियों को केवल मजदूरी अथवा वेतन ही प्रदान किया जाता है। इस प्रकार भारत में अब कर्मचारियों एवं मजदूरों की औसत आय में वृद्धि भी दृष्टिगोचर है।  भारत में अब तो त्यौहारी मौसम भी प्रारम्भ होने जा रहा है। नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, क्रिसमस दिवस, नव वर्ष, महाशिवरात्रि, होली, आदि  जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं, जिन्हें भारत के नागरिक बड़े ही उत्साह के साथ मानते हैं एवं इन त्यौहारों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी योगदान रहता है। साथ ही, भारत में अब धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन भी बहुत तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे निश्चित ही भारत के आर्थिक विकास को बल मिलेगा। अतः वैश्विक स्तर पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा भारत के आर्थिक विकास के अनुमान के संदर्भ में जारी किये जा रहे संशोधित अनुमान निश्चित ही सही साबित होंगे। 

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आर्थिकी राजनीति

भारत में बेरोजगारी की समस्या का हल निकालने में मिल रही है सफलता

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भारतीय सनातनी वेदों एवं ग्रंथो में इस बात के कई प्रमाण मिलते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि भारत सदैव ही आर्थिक रूप से सम्पन्न देश रहा है एवं भारत के समस्त नागरिकों के लिए रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध रहे हैं। मुद्रा स्फीति, आय की असमानता, बेरोजगारी एवं ऋण के भारी बोझ के तले दबे रहना जैसे शब्दों का तो प्राचीन भारत के आर्थिक इतिहास में वर्णन नहीं के बराबर मिलता है। भारत के समस्त नागरिकों की पर्याप्त मात्रा में आय होती थी जिससे वह अपने परिवार का आसानी से गुजर बसर कर पाते थे एवं समाज में समस्त नागरिक प्रसन्नता पूर्वक रहते थे। दरअसल प्राचीन भारत के उस खंडकाल में नागरिकों में उद्यमशीलता अपने चरम पर थी। परिवार के जमे जमाए व्यवसाय पीढ़ी दर पीढ़ी सफलतापूर्वक आगे चलते रहते थे एवं परिवार के सदस्यों के आय अर्जन का मुख स्त्रोत बने रहते थे। इस दृष्टि से नागरिकों को सामान्यतः नौकरी के लिए परिवार के पारम्परिक व्यवसाय के बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। इस प्रकार उस खंडकाल में बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न ही नहीं होती थी।  भारत पर आक्रांताओं के आक्रमण एवं इसके तुरंत बाद अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय नागरिकों की उद्यमशीलता को समाप्त कर उनमें नौकरी करने की भावना को विकसित किया गया क्योंकि अंग्रेजों को अपने शासन को सुचारू रूप से संचालन के लिए नौकरों की आवश्यकता थी। अंग्रेजों के शासनकाल में भारत की शिक्षा पद्धति को भी कुछ इस प्रकार से परिवर्तित किया गया कि  भारतीय नागरिक अपनी पढ़ाई समाप्त करने के पश्चात अंग्रेजों के संस्थानों में केवल नौकरी कर सके। दीर्घकाल में इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय नागरिक केवल नौकरी को ही रोजगार का साधन मानने लगे और उन्हें यदि नौकरी नहीं मिल पाती तो वे अपने आप को बेरोजगार मानने लगे। भारतीय नागरिकों में उद्यमशीलता तो जैसे समाप्त ही हो गई थी। परंतु, पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान भारतीय नागरिकों में उद्यमशीलता को पुनः पैदा करने के अथक प्रयास किये गए हैं, जिनमे सफलता भी मिलती दिखाई दे रही है और भारत में अब पुनः बहुत बड़ी मात्रा में उद्यमों को स्थापित किया जा रहा है, जिससे भारतीय नागरिक अब धीरे धीरे नौकर नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनते जा रहे हैं।  पिछले एक दशक के दौरान केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों ने भारतीय नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई नई योजनाएं प्रारम्भ की हैं। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) प्रारम्भ की गई थी। इस योजना को प्रारम्भ करने का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को सुरक्षित बेहतर आजीविका प्राप्त करने के लिए उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण लेने में सक्षम बनाना था। वर्ष 2016 में स्टार्ट-अप इंडिया योजना देश में लागू की गई थी। इस योजना को लागू करने का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा तंत्र विकसित करना था, जो पूरे देश में उद्यमिता का पोषण और प्रचार करता हो। वर्ष 2016 में ही स्टैंड अप इंडिया योजना प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और एससी/एसटी उधारकर्ताओं को 10 लाख रुपये तक के बैंक ऋण की सुविधा तथा ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने के लिए 1 करोड़ रु. तक का ऋण प्रदान करना था। इसके पूर्व, वर्ष 2014 में राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन की स्थापना ‘कौशल भारत’ एजेंडे को ‘मिशन मोड’ में चलाने के लिए की गई थी ताकि मौजूदा कौशल प्रशिक्षण पहलों को एकजुट किया जा सके और कौशल प्रयासों के पैमाने और गुणवत्ता को गति के साथ जोड़ा जा सके। इन योजनाओं के साथ ही भारतीय नागरिकों और राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक कल्याण को सम्बोधित करने के लिए भारत सरकार द्वारा कई अन्य योजनाएं (पीएमगरीब कल्याण योजना, आयुषमान भारत, प्रसाद योजना, आदि) भी प्रारम्भ की गई हैं। विभिन्न सरकारों के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे कुछ सांस्कृतिक संगठनों ने भी भारत में रोजगार के अवसर निर्मित करने के उद्देश्य से कई अन्य सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर भी कुछ प्रयास प्रारम्भ किया गए। संघ ने तो अपने कुछ अनुशांगिक संगठनों को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे इस क्षेत्र में विशेष प्रयास करें। इन सामाजिक, आर्थिक एंड सांस्कृतिक संगठनों ने मिलकर समाज में विशेष रूप से युवा नागरिकों के उद्यमशीलता को पुनः विकसित करने के सफल प्रयास किए हैं एवं अब एक बार पुनः भारत में उद्यमों को बढ़ावा मिलता दिखाई दे रहा है।  वित्तीय वर्ष 2022-23 में कर्मचारी भविष्यनिधि संस्थान में रजिस्टर हुए नए सदस्यों की संख्या वित्तीय वर्ष 2018-19 में 61 लाख थी जो वित्तीय वर्ष 1920-21 में 77 लाख, वित्तीय वर्ष 2021-22 में 122 लाख एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 में बढ़कर 139 लाख हो गई है। इस संख्या में लगातार सुधार से आश्य यह है कि देश में युवाओं को फोर्मल रोजगार बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। यहां इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि इस दौरान विश्व के अन्य देशों में कई कम्पनियों में कर्मचारियों की छटनी की गई है। इसी प्रकार पीरिओडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार जनवरी 2022 से भारत में बेरोजगारी की दर में लगातार कमी देखने को मिल रही है। जनवरी 2022 में देश में बेरोजगारी की दर 8.2 प्रतिशत थी जो अप्रेल-जून 2022 तिमाही में घटकर 7.6 प्रतिशत तो वहीं जुलाई-सितम्बर 2022 तिमाही में 7.2 प्रतिशत, अकटोबर-दिसम्बर 2022 तिमाही में 7.2 प्रतिशत से घटाकर जनवरी-मार्च 2023 तिमाही में 6.8 प्रतिशत पर आ गई है। सीएमआईई द्वारा जारी एक अन्य जानकारी के अनुसार, भारत में बेरोजगारी की दर मार्च 2023 में घटकर 7.6 प्रतिशत हो गई है जो मार्च 2022 में 8 प्रतिशत एवं मार्च 2021 में 10 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में महिलाओं (15 वर्ष और उससे अधिक) में बेरोजगारी की दर जनवरी-मार्च 2023 तिमाही में घटकर 9.2 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि एक वर्ष पहिले इसी तिमाही में 10.1 प्रतिशत थी। वहीं, पुरुषों में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर इस वर्ष पहली तिमाही में कम होकर 6 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पूर्व 2022 की जनवरी-मार्च तिमाही में 7.7 प्रतिशत थी। देश में राज्यवार बेरोजगारी का विश्लेषण करने पर ध्यान में आता है कि 10 प्रतिशत से अधिक बेरोजगारी की दर वाले राज्य हैं, हरियाणा में 37.4 प्रतिशत, राजस्थान में 28.5 प्रतिशत, दिल्ली में 20.8 प्रतिशत, बिहार में 19.1 प्रतिशत, झारखंड में 18 प्रतिशत, जम्मू कश्मीर में 14.8 प्रतिशत, त्रिपुरा में 14.3 प्रतिशत एवं सिक्किम में 13.6 प्रतिशत है। जबकि 5 प्रतिशत के कम बेरोजगारी की दर वाले राज्य हैं ओड़िसा में 0.9 प्रतिशत, गुजरात में 2.3 प्रतिशत, कर्नाटक में 2.5 प्रतिशत, मेघालय में 2.7 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 3.1 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 3.2 प्रतिशत, छतीसगढ़ में 3.4 प्रतिशत,  तेलंगाना में 4.1 प्रतिशत, उत्तराखंड में 4.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 4.3 प्रतिशत,  तमिलनाडु में 4.7 प्रतिशत, आसाम में 4.7 प्रतिशत एवं पुडुचेरी में 4.7 प्रतिशत। विशेष रूप से मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश राज्य, जो कुछ वर्ष पूर्व तक बीमारु राज्य की श्रेणी में शामिल थे, में बेरोजगारी की दर में अतुलनीय रूप से कमी दृष्टिगोचर हुई है। जनवरी-मार्च 2023 अवधि में देश में 45.2 फीसदी नागरिकों को रोजगार मिला हुआ है जो इससे पहले की तिमाही में 44.7 फीसदी पर था। उल्लेखनीय है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी छलांग लगाई है। स्पष्ट है कि सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसे भी संबल प्रदान करने की तमाम कोशिशें की हैं। जिसके परिणामस्वरूप, भारत में अगस्त 2023 माह में 46.21 करोड़ नागरिकों को रोजगार मिला हुआ था जबकि अगस्त 2022 में 43.02 करोड़ नागरिकों को ही रोजगार प्राप्त था, इस प्रकार एक वर्ष के दौरान 3.19 करोड़ नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रहलाद सबनानी 

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