आर्थिकी राजनीति जल शक्ति के महत्व को समझने का समय अब आ गया है February 23, 2021 / February 23, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत के नियंत्रक और लेखा महानिरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी योजनाएं प्रतिदिन प्रति व्यक्ति चार बालटी स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के निर्धारित लक्ष्य का आधा भी आपूर्ति करने में सफल नहीं हो पायी हैं। आज़ादी के 70 वर्षों के पश्चात, देश की आबादी के एक बड़े भाग के घरों में पीने के लिए स्वच्छ […] Read more » जल शक्ति के महत्व जल शक्ति मंत्रालय
आर्थिकी राजनीति विदेशी निवेशकों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार स्थापित हो रहे विश्वास के चलते देश में तेज़ी से बढ़ रहा है विदेशी निवेश February 17, 2021 / February 17, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत सहित पूरे विश्व की अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत रूप से प्रभावित होने के बाद, आर्थिक विकास ही आज भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इसी क्रम में दिनांक 1 फ़रवरी 2021 को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए बजट में देश में बुनियादी […] Read more » भारतीय अर्थव्यवस्था
आर्थिकी लेख राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों में तालमेल से तेज़ होगी विकास की दर February 11, 2021 / February 11, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए संसद में दिनांक 1 फ़रवरी 2021 को प्रस्तुत किए गए बजट के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 5 फ़रवरी 2021 को मौद्रिक नीति की घोषणा की है। इस वर्ष राजकोषीय नीति को विस्तारवादी बनाया गया है ताकि आर्थिक विकास को गति दी जा सके। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष […] Read more » The pace of development will be faster due to coordination between fiscal and monetary policies तेज़ होगी विकास की दर
आर्थिकी राजनीति अर्थव्यवस्था के मज़बूत होते संकेतों के बीच भारतीय बैंकों के ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों (एनपीए) में आई कमी February 4, 2021 / February 4, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment देश के लिए, भारतीय बैंकों के सम्बंध में, अंततः एक अच्छी ख़बर आई है। 30 सितम्बर 2020 को समाप्त अवधि में भारतीय बैंकों के ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों में कमी दृष्टिगोचर हुई है। 31 मार्च 2018 को भारतीय बैंकों में ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियां 10.36 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर थीं, जो 30 सितम्बर 2020 को […] Read more » Decrease in non-performing assets (NPAs) of Indian banks amid strong signs of the economy भारतीय बैंकों के एनपीए में आई कमी
आर्थिकी राजनीति रोज़गार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगा वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट February 3, 2021 / February 3, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment कोरोना महामारी के समय पूरे विश्व में ही लाखों लोगों के रोज़गार पर विपरीत प्रभाव पड़ा था। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सका था एवं हमारे देश में भी कई लोगों के रोज़गार पर असर पड़ा। हालांकि, छोटी अवधि के लिए इस समस्या को हल करने के उद्देश्य से कोरोना महामारी के दौरान, लगभग 80 […] Read more » The financial year 2021-22 budget will be helpful in creating new employment opportunities.
आर्थिकी राजनीति देश की अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन देने वाला बजट February 3, 2021 / February 3, 2021 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment आम बजट: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम– योगेश कुमार गोयल केन्द्र सरकार के मौजूदा कार्यकाल का तीसरा बजट कोरोना महामारी के बीच देश का पहला आम बजट था, जो बतौर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का तीसरा बजट था। कुल 3483236 करोड़ रुपये के खर्चे का यह बजट ऐसे समय में पेश किया गया, जब देश की […] Read more » आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम आम बजट देश की अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन देने वाला बजट बजट २०२१ वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
आर्थिकी राजनीति भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने वाला बजट February 2, 2021 / February 2, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग- भारत भविष्य की आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देख रहा है और कोरोना महामारी से ध्वस्त हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटा है, इन संकटकालीन एवं चुनौतीभरी परिस्थितियों में लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में आम बजट को पेश किया जो लोककल्याणकारी एवं आत्मनिर्भर भारत के […] Read more » Budget to make India an economic superpower आर्थिक महाशक्ति बनाने वाला बजट
आर्थिकी राजनीति भारत में पनप रहे स्टार्ट-अप अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बनने की ओर अग्रसर February 1, 2021 / February 1, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत के लिए यह दशक भारतीय स्टार्ट-अप कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (एमएनसी) में परिवर्तित करने का है। भारत में पिछले केलेंडर वर्ष 2020 में 11 स्टार्ट-अप कम्पनियां, यूनीकॉर्न कम्पनियों में परिवर्तित हुई हैं। यूनिकॉर्न कम्पनी उस स्टार्ट-अप कम्पनी को कहा जाता है जिसका बाज़ार मूल्यांकन 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का हो गया हो। […] Read more » Start-ups flourishing in India
आर्थिकी राजनीति विकास की रफ़्तार तेज़ करने हेतु राजस्व में कमी के बावजूद पूंजीगत ख़र्चे बढ़ा रही है केंद्र सरकार January 29, 2021 / January 29, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment पूरे विश्व में फैली कोरोना महामारी के चलते सभी देशों में तुलनात्मक रूप से राजस्व संग्रहण में बहुत कमी आई है। भारत में भी यही स्थिति देखने में आई है और करों की वसूली एवं अन्य स्त्रोतों से आय वित्तीय वर्ष 2020-21 में वर्ष 2019-20 की तुलना में बहुत कम रही है। हालांकि कोरोना महामारी […] Read more » विकास की रफ़्तार तेज़
आर्थिकी राजनीति भारत में निवेश को बढ़ावा देने हेतु केंद्र सरकार कर रही है अथक प्रयास January 26, 2021 / January 26, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment कोरोना महामारी के बाद देश की विकास दर में तेज़ी लाना अब केंद्र सरकार के सामने एक मुख्य चुनौती है। विकास दर में तेज़ी लाने के लिए उत्पादों को मांग बढ़ानी होगी जिसके लिए अंततः निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र में घरेलू एवं विदेशी निवेश को बढ़ाना होगा। देश में निवेश को आकर्षित करने के […] Read more » “ईज़ आफ डूइंग बिज़नेस The Central Government is making relentless efforts to promote investment in India. टैक्स सम्बंधी मुद्दे दिवालियापन के मुद्दों को सुलझाने नया व्यवसाय प्रारम्भ निर्माण कार्य हेतु मंज़ूरी पूंजी बाज़ार में निवेशकों के हित सुरक्षित रखने
आर्थिकी महिला-जगत क्या महिलाओं को घरेलू काम के लिए वेतन दिया जाना चाहिए? January 22, 2021 / January 22, 2021 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन द्वारा 2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चलता है कि, वैश्विक स्तर पर, महिलाएं घरेलू देखभाल के काम के कुल घंटों का 76.2% करती हैं, जो पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक है। एशिया और प्रशांत में, यह आंकड़ा 80% तक बढ़ जाता है। उत्तरी अमेरिका और यूरोप में महिलाओं […] Read more » Should women be paid salary for domestic work? महिलाओं को घरेलू काम के लिए वेतन
आर्थिकी राजनीति कृषि कानून, हठधर्मिता और आर्थिक नुकसान January 19, 2021 / January 19, 2021 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान कितना महत्वपूर्ण है यह किसी को आज बताने की आवश्यकता नहीं। वस्तुत: मौजूदा समय में कृषि, राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 14 प्रतिशत से अधिक का योगदान करती है और देश के श्रमिकों के 40 प्रतिशत से अधिक हिस्से को आजीविका […] Read more » Agricultural law dogma and economic losses economic losses due to farmer protest कृषि कानून हठधर्मिता और आर्थिक नुकसान