कार्टून मनोरंजन नक्सली हमला June 4, 2013 / June 4, 2013 by त्रियम्बक शर्मा | Leave a Comment Read more » नक्सली हमला
खेल जगत इससे तो यह खेल ही डूब जायेगा May 29, 2013 / May 29, 2013 by विकास कुमार गुप्ता | Leave a Comment 70 के दशक में क्रिकेट भारत के सुदूर गांवों में उतरने लगा, तब मैदान में एक ओर गिल्ली डंडे चलते थे तो दूसरी ओर कुछ बच्चे सामूहिक रूप से तीन डंडियों के आगे खड़े होकर क्रिकेट के चैके-छक्के लगाना सीख रहे थे। तब उनके पास न तो बाजार से लाये उन्नत किस्म के बल्ले थे […] Read more » स्पाॅट फिक्सिंग
खेल जगत चोरी और सीनाजोरी May 28, 2013 / May 28, 2013 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | Leave a Comment सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” कभी भद्र जनों के खेलों के नाम से विख्यात क्रिकेट आज अभद्रता के सारे कीर्तिमानों को ध्वस्त करता नजर आ रहा है । इसकी बानगी हमें हाल में समाप्त हुए इंडियन प्रीमीयर लीग में साफतौर पर दिखाई दी है । सट्टेबाजी के तमाम आरोप और इस रैकेट से जुड़े मानिंद लोगों के […] Read more » चोरी और सीनाजोरी
टेलिविज़न टीवी पर क्राइम नंबर 1 May 7, 2013 / May 7, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on टीवी पर क्राइम नंबर 1 हमारे घर में उपलब्ध छोटे पर्दे ने हमारी रोजमरा की ज़िन्दगी में एक नया भूचाल ला दिया हैं। जहाँ पहले हमे टीवी पर सास बहु और साजिश का एंटरटेनमेंट पैकेज मिलता था , वो कुछ वक़त बाद रियलिटी में तब्दील हो गया हैं। हर समय जहाँ कौन बनेगा करोडपति और बिग बॉस जैसे शो हमें फुल टु एंटरटेनमेंट का […] Read more » crime related real stories टीवी पर क्राइम नंबर 1
सिनेमा विषयविहीन हो चूका है आज का सिनेमा May 5, 2013 / May 5, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on विषयविहीन हो चूका है आज का सिनेमा ‘ये कहाँ आ गए है हम’ लता जी की मीठी आवाज़ में गया ये गाना आज भारतीय सिनेमा के १०० साल की यात्रा पर बिल्कुल फिट बैठता है क्योकि अपने उदगम से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा में इतने ज्यादा बदलाव आये हैं कि कोई भी अब ये नहीं कह सकता कि आज की दौर में बनने वाली […] Read more » विषयविहीन आज का सिनेमा
महिला-जगत सिनेमा चरित्रहीन आदर्शवाद May 4, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment (संदर्भःपूरब-पच्छिम फिल्म) आदित्य कुमार गिरि भारतीय हिन्दी फिल्मों का विश्लेषण करने पर जो एक बात सामने आती है वह यह है कि इसका पूरा चरित्र स्त्री विरोधी है।यह अपने फलक पर स्त्री विरोधी मानसिकता को स्थापित किये हुए है।स्त्री की जो छवि वह प्रस्तुत करता है वह कहीं से भी एक लोकतांत्रिक समाज के लिए […] Read more »
सिनेमा थम गई शमशाद बेगम की खनकती आवाज April 25, 2013 / April 25, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर ‘‘शादाब’’ ’’मेरे पिया गए रंगून’’, ’’कजरा मुहब्बत वाला’’ जैसे कई लोकप्रिय गीतों की आवाज़ अब नही रही। शमशाद बेगम का मुंबई में निधन हो गया है। भारतीय सिनेमा को ’’मेरे पिया गए रंगून’’ और ’’कजरा मुहब्बत वाला’’ जैसे अमर गीतो की बेगम खनकती आवाज की मलिका, ओपी नय्यर जैसे संगीतकार की पहली पसंद, […] Read more » शमशाद बेगम
सिनेमा अभिनय की दुनिया में जाना-पहचाना नाम है श्री सवाई बिस्सा April 24, 2013 / April 24, 2013 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment – डॉ. दीपक आचार्य किसी एक ही शख्स में खूब सारे किरदार देखने हाें तो वह हैं श्री सवाई कुमार बिस्सा। उम्र के नन्हें पड़ावों से ही अपनी बहुआयामी प्रतिभाओं का दिग्दर्शन कराने वाले बिस्सा कला संस्कृति और साहित्य के साथ ही मातृभूमि की सेवा के लिए वह समर्पित व्यक्तित्व हैं जिनकी प्रतिभा […] Read more » श्री सवाई बिस्सा
सिनेमा प्राण को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड April 14, 2013 / April 14, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायक प्राण को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड बॉलीवुड के फिल्मी सफर में अपनी बेहतरीन अदायगी की छाप छोड़ने वाले मशहूर सिने अभिनेता प्राण को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से प्राण को तीन मई 2013 को विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में नवाजा जाएगा। अपने छह […] Read more »
टॉप स्टोरी सिनेमा संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है! March 23, 2013 / March 23, 2013 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 3 Comments on संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है! संजय दत्त को जिस अपराध में सजा दी गयी है, उसमें उसे पहले ही विशेष कोर्ट द्वारा बहुत ही कम सजा दी गयी, अन्यथा देश के दुश्मनों और आतंकियों से सम्बन्ध रखने और उनसे गैर-कानूनी तरीके से घातक हथियार प्राप्त करने और उन्हें उपने घर में रखने। आतंकियों के बारे में ये जानते हुए कि […] Read more » संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है!
सिनेमा गुम हो रही हैं फिल्मी धरोहरें March 23, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment बेहद अफसोसजनक बात है कि भारतीय फिल्मों के जनक दादा साहब फाल्के की ही पहली फिल्म के केवल दो प्रिंट बचे हैं। ऐसा केवल उनके साथ ही नहीं बाद के कर्इ फिल्मकारों की माइलस्टोन फिल्मों के साथ भी हुआ है। व्यवसिथत रखरखाव के अभाव में गुम होती […] Read more » गुम हो रही हैं फिल्मी धरोहरें
चुटकुले बीवी का भाई March 23, 2013 / March 23, 2013 by सुधीर मौर्य 'सुधीर' | 1 Comment on बीवी का भाई दो लुटेरों में लूट के माल को लेकर झगड़ा हो गया। झगड़ा इतना बढ़ा की एक लुटेरे ने अपने पिस्तौल से दुसरे पर गोली चला दी। गोली सनसनाती हुई दुसरेलुटेरे के कान को हवा देती हुई निकल गयी। पहला हँसते हुए बोला खैरकर तू मेरी बीवी का भाई है नहीं तो गोली सीधे सर से […] Read more » बीवी का भाई