भगवान का जेंटलमेन गेम को अलविदा

 

 
Sachin-Tendulkarपाकिस्तान की धरती पर घुंघराले बालों वाले जब एक छोटे कद के खिलाड़ी ने कदम रखा तो शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि ये अपने कारनामे से अपना कद इतना ऊंचा कर लेगा कि खिलाड़ी उसके आस-पास भी नहीं आ पाएंगे।
16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर 40 तक आते-आते क्रिकेट के भगवान बन चुके थे। ऐसा क्या था कि जो लोग उन्हें भगवान का दर्जा देने लगे थे। इन 24 सालों में सचिन ने 22 गज की पिच पर खूब दमखम दिखाया। दिनोंदिन उनके नाम नए-नए रिकार्ड जुड़ते गए। सचिन तेंदुलकर के नाम इतने रिकार्ड बने कि उन्हें सचिन रमेश तेंदुलकर की कहने के बजाय सचिन रिकार्ड तेंदुलकर कहना ज्यादा मुफीद लगने लगा। सचिन ने हर वो आकड़ा पार किया जिसे पाना हर क्रिकेटर का सपना होता हैं। सचिन क्रिकेट की अमूल्य धरोहर बने. सचिन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके सीखने की ललक और कभी ना खत्म होने वाली रनों की भूख ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की श्रेणी में फेहरिस्त में शामिल किया। सचिन की एक और खासियत जो उन्हें अपने समकाकालीन खिलाड़ियों से अलग करती हैं वो हैं कि सचिन ने हमेशा से विरोधियों को जवाब अपने बल्ले से दिया।
सचिन किसी भी रिकार्ड के मोहताज नहीं है। अपने 24 सालों के इतिहास में सचिन ना सिर्फ एक खिलाड़ी बल्कि एक बेहतर इंसान के तौर पर और भी निखरते गए। क्रिकेट का हर शाट सचिन की डायरी में किसी एक अध्याय की तरह बनता गया। पैडल स्वीप हो या अपर कट सचिन ने हर शाट में अपनी काबिलियत दिखाई। सचिन का खौफ मैदान पर कदर था कि विश्वस्तरीय स्पिनर शेन वार्न के सपनों में आने लगे। सचिन ने लोगों के लिए क्रिकेट के मायने बदल दिए थे। घरेलू सरजमी हो या विदेशी जमी सचिन ने अपने प्रदर्शन से सबका मन मोह लिया। इन सालों में खिलाड़ी आते रहे जाते गए लेकिन सचिन का बल्ला बदस्तूर जारी रहा। दुनिया भर में सचिन के करोड़ों फैंस रहे। खुद आस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज डान ब्रैडमेन ने सचिन को खेलते हुए कहा था कि मुझे इसमे अपना अक्स दिखता है. सचिन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि उनके आउट होने पर लोग अपने घरों के टीवी बंद कर देते थे। बीच में कई दफा वो चोटों से भी परेशान रहे। बावजूद इसके सचिन ने हर बार वापसी की ।
सचिन ने 10 अक्टूबर 1996 को ही पहली बार कप्तानी की थी और संयोग से 10 अक्टूबर को उन्होंने क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप से संन्यास लिया।
10 अक्टूबर का दिन जेंटलमेन गेम के इतिहास में एक नई इबारत लिख कर आया। एक ओर टीवी न्यूज चैनलों पर भारत-आस्ट्रेलिया के राजकोट में एकमात्र टी ट्वेंटी के लिए खबरें लिखी जा रही थी कि अचानक एक ऐसी खबर आई जिसने तमाम क्रिकेट फैंस के साथ-साथ क्रिकेट दिग्गजों को भी सकते में डाल दिया वो था सचिन का 200 वें टेस्ट के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लेना। सचिन एकदिवसीय और टी-20 से पहले ही संन्यास ले चुके थे।
अभी कुछ ही दिन पहले सचिन ने टी-20 क्रिकेट से भी संन्यास लिया था । वैसे भी सचिन पर संन्यास लेने का इतना बोझ था कि वो पिछले कुछ समय से उनका खुद का फार्म उनके लिए बोझ बन गया था ।
इन सबके बीच एक सवाल आता है कि क्या सचिन ने संन्यास लिया या सचिन को संन्यास के लिए मजबूर किया गया। यूं तो सचिन के संन्यास लेने की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। अब तो सिर्फ इस पर मोहर ही लगनी बाकी थी। दुनिया के सबसे मंहगे बोर्ड का इस शानदार से खिलाड़ी से ऐसा रवैया समझ से परे रहा। शायद अब वो ज्जादा स्वछंद तरीके से खेल पायेंगे. सचिन ने खुद कहा कि वो नहीं जानते कि क्रिकेट के बिना कैसे जिएंगें। सचिन जैसे खिलाड़ी एक सदी में पैदा होते हैं। सचिन का विकल्प शायद ही भर पाए। सचिन ने जाते –जाते उन तमाम क्रिकेट प्रेमियों की पलकें भीगा दी जिनके आंखों में कभी उनके रनों की खुशी होती थी। सचिन को सलाम
रवि कुमार छवि

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