आलोचना

दलित -महादलित और चोरों के साधू सरदार नीतीश

नीतीश के विकास रथ के पहिये तले बिहार का सामाजिक , राजनैतिक व आर्थिक तानाबाना लहुलुहान हो जान की भीख मांग रहा है । १५ वर्षों के लालूराज की मरुभूमि में नीतीश नाम का पौधा खिला तो लोगों को लगा विकास

काव्यपाठ और राजनीति – दीपक चौरसिया ‘मशाल’

” ऐसी रचनाएँ तो सालों में, हजारों रचनाओं में से एक निकल के आती है. मेरी तो आँख भर आई” “ये ऐसी वैसी नहीं बल्कि आपको सुभद्रा कुमारी चौहान और महादेवी वर्मा जी की श्रेणी में पहुँचाने वाली कृति है”