कविता स्वतंत्रता दिवस पर एक नारी की पीड़ा August 14, 2018 / August 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment 71 वर्ष हो गये आजादी के,पर मैं अभी आजाद नहीं दर दर ठोकरे खाती हूँ,पर कही मैं अभी आबाद नहीं बचपन में पिता,जवानी में पति,बुढापे में पुत्र के आधीन रही कैसा बीता मेरा ये जीवन, क्या किसी को यहाँ मालूम नहीं बाहर निकल कर नहीं सुरक्षित,घर में भी मैं सुरक्षित नहीं कैसे है मेरा असुरक्षित […] Read more » जवानी में पति नारी देवी बचपन में पिता बुढापे में पुत्र के आधीन रही स्वतन्त्रता दिवस
कविता कांवड़ यात्रा पर विवाद से दुखी है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा August 13, 2018 / August 13, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा सावन की पुकार…!! —————- बुलाते हैं धतुरे के वो फूल धागों की डोर बाबा धाम को जाने वाले रास्ते गंगा तट पर कांवरियों का कोलाहल बोल – बम का उद्गघोष मदद को बढ़ने वाले स्वयंसेवियों के हाथ कांवर की घंटी व घुंघरू शिविरों में मिलने वाली शिकंजी उपचार के बाद ताजगी देती […] Read more » कांवड़ यात्रा खांटी खड़गपुरिया शिव श्रावण
कविता तीन तलाक August 10, 2018 / August 10, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on तीन तलाक तीन तलाक़ का दौर खत्म हुआ,मिली है राहत मुस्लिम महिलाओं को गुलामियत का दौर ख़त्म हुआ,अब मिली है आजादी इन महिलाओं को ये जीत हार का सवाल नहीं,ये सवाल है मुस्लिम महिलाओ के अधिकारों का जो सदियो से थी गुलाम अपने शोहर की,मांग कर रही थी अपने अधिकारों का मुल्ला मोलवियो का अब दख्ल […] Read more » गुलाम तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं शोहर
कविता करुणा निधि करुणा के सागर थे August 8, 2018 / August 8, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करुणा निधि करुणा के सागर थे,जनता के अनोखे चहेते थे राजनीती के प्रकांड पंडित थे,हर बार एम एल ए बन जाते थे दक्षिण भारत में उनका बोलबाला था, पार्टी के वे सर्वा सर्वे थे वह नास्तिक होते हुये भी,झूठे आडम्बरो में खिलापत करते थे अस्त हो गया दक्षिण भारत का तारा,जो 3 जून १९२४ में […] Read more » करुना निधि करुना के सागर थे कवि व लेखक दक्षिण भारत
कविता पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये August 7, 2018 / August 8, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये आर के रस्तोगी पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये कू कू करे कोयल,मन को न भाये मन मोरा नाचे,ये किसको बुलाये जिसकी थी प्रतीक्षा,वो नहीं आये घिर घिर बदरवा,तन को तडफाये काली काली घटा,ये मुझको डराये पिया गये प्रदेश,वापिस नहीं आये क्या करू मैं,मुझे कोई तो समझाये यमुना तट मेरा कृष्ण बंशी बजाये सखिया सब आई,राधा […] Read more » किससे करू बाते पड़ गये झूले पिया नहीं अब प्रियतम नहीं आये मेरा कृष्ण बंशी बजाये यमुना तट
कविता भोले बाबा के मन की संवेदना August 6, 2018 / August 6, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी कल रात भोले बाबा भंडारी शंकर मेरे सपनो में आ गये कलयुग में कांवडियो की हरकते देखकर चक्कर खा गये वह बोले, रस्तोगी तुम्हारे क्षेत्र में यह क्या हो रहा है कांवडियो के कारनामो को देख कर दुखी हो रहा हूँ मैं बोल्या,प्रभु ये कांवडिये और ये क्षेत्र आपने ही बनाये है […] Read more » कांवडिये चरस भांग पुलिस प्रशासन भोले बाबा के मन की संवेदना सावन के महीने में
कविता बुढापा August 2, 2018 / August 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बहुतो ने भुला दिया मुझे गिला नहीं उनसे कोई मुझे पर अपने ही भुला देते जब मुझे सोचने को मजबूर कर देते है मुझे जीवन का अंतिम पड़ाव है ये काटे से कटता अब नहीं है ये जीवन में मुश्किलें आई तो बहुत आसानी से काट ली थी तब वे जिनको चलना सिखाया था मैंने […] Read more » अंतिम पड़ाव अँधेरा दिखा जीवन पैसे दवाई बुढापा
कविता तुम पास आ गई हो,दिल को चैन आ गया है August 1, 2018 / August 1, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम पास आ गई हो,दिल को चैन आ गया है पुरानी यादो का मुझे,आज ध्यान आ गया है छोड़ना ना मुझे तुम,कहीं जाना न अब तुम आखरी मोड़ पर मिले,साथ निभाना अब तुम बड़ी मुद्दतों के बाद,ऊपर वाला मेहरबा हो गया है तुम पास आ गई हो,दिल को अब चैन आ गया है कहाँ चली […] Read more » तुम पास आ गई हो दिल को करार आ गया है दिल को चैन आ गया है
कविता आ गया सावन,सजन घर नहीं आये July 31, 2018 / July 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी आ गया सावन,सजन घर नहीं आये क्या करू अब मै,मन कुछ नहीं भाये भेजे उनको कितनी बार मैंने सन्देशे हर बार हो गये मेरे सन्देशे अनदेखे क्या करू मुझको कोई तो बतलाये क्या करू मेरे सजन घर नहीं आये पड गया झूले सजन मेरे नहीं आये क्या करू मै,मुझे कोई तो समझाये […] Read more » आ गया सावन सजन घर नहीं आये साजन सावन सावन में शरारत
कविता मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है July 30, 2018 / July 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है दर्शन करने को हम सब लौट कर आये है छटा तुम्हारी सारे संसार में बिखरी है माया तुम्हारी सारी दुनिया में दिख रही है अनाथो के नाथ हो तुम,नाथ बनाने आये है तेरे दर्शन को हम सब लौट कर आये है तीनो लोक के मालिक हो,मृत्यु लोक […] Read more » तीनो लोक के मालिक हो मिलना अपने श्याम से मृत्यु लोक तुम्हारा है ये सोच कर आये है
कविता लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में छिपा लिया July 28, 2018 / July 28, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में मैंने छिपा लिया पड़े ना बुरी निगाह राहू-केतू की,उसे नयनों में समां लिया आयेगा जब बुरा वक्त मेरे चाँद पर,लडूंगी आखरी वक्त तक उसने मुझे दिल में समा लिया,मैंने उसे दिल में समां लिया कहते है लोग मेरे चाँद पे काले धब्बे दिखाई देते है अनेक ये […] Read more » उसे दिल में छिपा लिया चाँदनी को चाँद राहू-केतू लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को
कविता कर पाते कहाँ वे विकास ! July 28, 2018 / July 28, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १८०७२४) कर पाते कहाँ वे विकास, कर के कुछ प्रयास; वे लगाते रहे क़यास, बिना आत्म भास ! विश्वास कहाँ आश कहाँ, किए बिन सकाश; संकल्प कहाँ योग कहाँ, धारणा कहाँ ! है ध्येय कहाँ ज्ञेय रहा, गात मन थका; उद्देश्य सफल कहाँ हुआ, ना मिली दुआ ! बेहतर है प्रचुर कर्म करें, ज्ञान सृष्टि कर; सृष्टा को ध्यान कर के वरें, अपने कलेवर ! उर उनकी सुने चलते रहें, बृह्म भाव रस; ‘मधु’ के प्रभु के कार्य करें, उनके हृदय बस ! रचनाकार: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » कर पाते कहाँ वे विकास ! ज्ञान सृष्टि मधु संकल्प