कविता बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम July 3, 2018 / July 3, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम तन की तपन को शीतल कर ले सजन ये जीवन धीरे से ऐसे ही कट जाएगा आशाओ के सहारे ऐसे ही कट जाएगा निराशा न देना तुम मेरे प्यारे सनम आओ बारिश में भीगे हम तुम सजन बारिस का मौसम है, ………… मन को न मसोसे कभी हम और […] Read more » आओ भीगे सनम घनघोर घटाये बारिस का मौसम है सावन हरियाली
कविता सावन के महीने में विरहणी के प्रश्न July 2, 2018 / July 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी जब सावन का महीना आता क्या पिया का संदेशा लाता ? जब बादल आसमां में गरजते एक दूजे के लिये क्यों तरसते ? जब बिजली आसमां में चमकती माथे की बिंदिया क्यों दमकती ? जब घनघोर घटायें घिरती विरहणी क्यों दिन में डरती ? जब दिन में ही रात हो जाती पिया […] Read more » नन्नी नन्नी बुंदियाँ बिजली आसमां सावन के महीने में विरहणी के प्रश्न
कविता फांसी चढ़ा दो मंदसौर के दरिंदों को July 2, 2018 / July 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी फांसी पर चढ़ा दो,रेप करने वाले मंदसौर के दरिंदो को पृथ्वी पर भार बने है,जीने का हक़ नहीं इन दरिंदो को कैंडिल मार्च से कुछ नही होगा,पकड़ लो इन दरिंदो को चौपले पर गोली मारो,खत्म करो अब तुम इन दरिंदो को न्याय मिलेगा,कब मिलेगा,न्याय नहीं अब जल्द मिलता है इस प्रकार […] Read more » फांसी चढ़ा दो मंदसौर के दरिंदों को फांसी चढ़ाओ बलात्कार बेटियों
कविता ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै June 30, 2018 / June 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै तेरे गम में अपनी आँखे भिगोती नहीं हूँ मै ए पत्थर के सनम ! दिल को पत्थर बना लिया है मैंने जिसको माना था भगवान,उसको अब पूजती नहीं हूँ मै बहाये थे जिन आँखों से आँसू,उनको बंद कर लिया है […] Read more » आँखों से आँसू ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै पत्थर वैध हकीम
कविता मामूली हैं मगर बहुत खास है… June 30, 2018 / June 30, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा, मामूली हैं मगर बहुत खास है… बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और कड़ी मशक्कत से हासिल टिकट लेकर किसी विजेता की तरह पहली पंक्ति में […] Read more » कनखियों से रसगुल्लों फिल्मों बारिश मामूली हैं मगर बहुत खास है... रसगुल्लों की बाल्टियों
कविता सावन आया,उमंग लाया June 29, 2018 / June 29, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सावन आया,उमंग लाया उमड़ घुमड़ कर बदरा आये जिससे मेरा जिया घबराये काले बदलो ने आसमान घेरा जिससे छाया पृथ्वी पर अँधेरा अँधेरे में अब बिजली चमकी जिससे मेरी बिंदिया दमकी गरज गरज कर बदरा आये पिया का कुछ संदेशा लाये मैं बोली पिया का सन्देशा सुनाओ बदरा बोले हमारे करीब तो आओ अपने पिया […] Read more » उमंग लाया पृथ्वी पर अँधेरा बिजली चमकी वर्षा रानी सावन आया
कविता प्यार करते रहेगे हम जनम जनम June 26, 2018 / June 26, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कसम खाते है आज दोनों सनम प्यार करते रहेगे हम जनम जनम प्यार की डगर है कितनी कठिन इस पर चलना और भी कठिन इस पर चलते रहेगे सदा हम किसी का साथ छोड़ेगे ना हम कसम खाते है आज दोनों सनम प्यार करते हम जनम जनम ये गमो की दुनिया है बिकते है जख्म […] Read more » कसम खाते प्यार करते रहेगे प्यार की खरीद हम जनम जनम
कविता नेताओ के बारे में कुछ दोहे June 25, 2018 / June 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment योगी ने योग किया,मोदी ने मन की बात राबड़ी ने रबड़ी खाई,लालू ने खाये भात देश में बेरोजगारी बढ़ रही,मिल रही न जॉब तेजस्वी नवी फ़ैल है उनको कब मिलेगी जॉब राहुल भी बेरोजगार है,कब मिलेगा पी एम जॉब चिंता मर करो पप्पू भैया,जल्द मिलेगा ये जॉब माया को माया न मिली,मिले न उसे श्रीराम […] Read more » तेजस्वी नवी दिग्विजय नेताओ के बारे में कुछ दोहे मनमोहन जी मोदी ने मन योगी सोनिया जी
कविता आज की जनता June 25, 2018 / June 25, 2018 by विनीत कुमार शर्मा | Leave a Comment विनीत कुमार शर्मा मुश्किल थी तब बढ़ती जाती चिंता चारो ओर, गली गली में बैठे थे कुछ ऐसे समाज के चोर कुछ ऐसे चोर जो खाते जनता का पैसा, करते थे अय्यासी पता नहीं कैसा कैसा II बहकाते बरगलाते रोज जनता को ऐसे, देश की दौलत हो जैसे उनके बाप के पैसे, जनता का विस्वास […] Read more » आज की जनता नदी विकास रहनुमा समाज सहानुभूति
कविता अभी ना छोड़ कर जाओ सनम June 23, 2018 / June 23, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अभी ना छोड़ कर जाओ सनम कि दिल अभी भरा नहीं जुल्फे अभी संभाल तो लू गजरा उसमे सजा तो लू मांग में तुमने सिन्दूर भरा नहीं तुमसे गले अभी मिली भी नहीं अभी ना छोड़ कर जाओ सनम कि दिल अभी भरा नहीं मैंने अभी तक कुछ कहा नहीं तुमने अभी तक कुछ सुना […] Read more » अभी ना छोड़ कर जाओ सनम काजल चादर बिछा सिन्दूर
कविता प्रतीक्षा कर रही हूँ तुम्हारी सनम June 22, 2018 / June 22, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी प्रतीक्षा कर रही हूँ तुम्हारी सनम अभी तक क्यों नहीं आये सनम ? सूर्य भी अब अस्त हो चूका घर भी अपने वह जा चूका पक्षी भी घोंसले में आ चुके श्रमिक भी थक कर आ चुके मै किसको बताऊ ये अपना गम प्रतीक्षा कर रही हूँ तुम्हारी सनम अभी तक क्यों […] Read more » गगन चाँद तुम्हारी सनम प्रतीक्षा कर रही हूँ बिजली
कविता अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस June 21, 2018 / June 21, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आर के रस्तोगी प्यारे भाइयो,तुम अपनी दिनचर्या में यदि करते हो रोजना तुम योग मिल जायेगे सारे सुख सम्पत्ति उसका कर सकते हो तुम भोग तरह तरह के आसन है इसमें और तरह तरह के इसके नाम शरीर के सब अंग प्रय्तंगो को मिलता रहेगा तुमको आराम हर कोई इसको कर सकता है छोटा बड़ा […] Read more » 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ औषधि शरीर स्वस्थ